पंचायत में धमकी, फिर गोलियां बरसाकर भून डाला, दहशत में परिवार
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मेरठ में यह जंगलराज नहीं तो क्या है। बेखौफ बदमाशों की रविवार रात पंचायत बैठी और सोमवार सुबह उन्होंने गोलियां बरसाकर बबलू की हत्या कर दी। बबलू का कसूर इतना था कि उसने पंचायत में बदमाशों की बात नहीं मानी। यह पंचायत झिटकरी ग्राम प्रधान के घर पर हुई थी। सवाल उठता है कि सावित्री की हत्या करने वाले इनामी बदमाश गांव में पंचायत करते हैं और फिर पैरवी करने वाले की हत्या कर देते है। लेकिन पुलिस को इसकी कोई भनक तक नहीं लगती।
बेटे चेतन की हत्या के मामले में गवाही से तीन दिन पहले तीन फरवरी को बदमाशों ने उसकी मां सावित्री पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। सिर में लगी गोली से सावित्री की मौत हो गई थी। सावित्री और उसका बेटा मितन (चेतन हत्याकांड में चश्मदीद गवाह) पुलिस अफसरों से सुरक्षा मांग रहे थे।
पुलिस अफसरों ने सुरक्षा का आश्वासन दिया। लेकिन उसके बावजूद बदमाशों ने सरेआम हत्या की वारदात कर पुलिस के दावों को खुली चुनौती दी थी। जिसके बाद सावित्री हत्याकांड के फरार आरोपियों पर एसएसपी ने 25-25 हजार का इनाम घोषित किया था।
बड़े दामाद हो, अपने साले को मनाओ
पुलिस के मुताबिक सुमन ने बताया कि वह सावित्री की बड़ी बेटी है। प्रधान संत सिंह ने पंचायत में कहा कि बबलू देखो, तुम बड़े दामाद हो। अपने सालो (मितन और रवि) को मनाओ। क्यों खूनखराबा करा रहो हो। सावित्री की हत्या कैसे और किसने की, इसकी कोई जानकारी नामजद आरोपियों को नहीं है। अपने सालो को मनाओ, नहीं तो बेकसूर लोग मारे जाएंगे। बबलू ने कहा कि प्रधान जी मेरे सालों ने केस दर्ज कराया है। मेरा उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है। वो नहीं मानेंगे। जिस पर प्रधान के बगल में बैठे आरोपियों ने कहा कि तुम जाओ, हम खुद निपटा लेंगे।
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खौफ के साये में मितन का परिवार
ताबड़तोड़ हत्याओं से मितन का परिवार खौफ में है। भाई चेतन, मां सावित्री और अब जीजा बबलू को खोने के बाद मितन और उसके परिवार को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करे। लगातार हो रही वारदातों से मितन के परिवार का पुलिस से भी भरोसा उठ गया है। पुलिस का इकबाल दम तोड़ चुका है। घर की चारदीवारी में बंद परिवार के सदस्यों के सामने रोजी रोटी का संकट बन गया है। वहीं, बहन का घर उजड़ता देख मितन अब असहाय हो गया है।
कुख्यात के शूटरों पर शक
सरूरपुर क्षेत्र के रहने वाले एक कुख्यात का नाम सावित्री और फिर उसके दामाद बबलू की हत्या में सामने आया है। पुलिस सूत्रों की मानें तो जेल में बंद इस कुख्यात ने अपने शूटरों से इन वारदात को अंजाम दिलाया।
कौन करेगा परिवार की देखभाल
बबलू के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। कृषि भूमि नहीं होने के कारण बबलू व उसके चार अन्य भाई मजदूरी करके गुजर बसर कर रहे हैं। बबलू के तीन भाइयों की शादी हो चुकी है। एक भाई का रिश्ता अभी हुआ है। बबलू राजमिस्त्री था। उसने बड़ी लड़की कोमल की शादी कर दी। उसके बाद परिवार में पत्नी सुमन, बेटी नीलम, सोनम और आरती के साथ बेटा शिवम है। बबलू की पत्नी रोते बिलखते हुये कह रही थी कि आखिर अब उसके परिवार की गुजर बसर कैसे होगी।
अब तो विश्वसनीयता पर ही सवाल
सिर पर इनाम होने के बावजूद बदमाशों ने झिटकरी गांव में प्रधान संत सिंह के घर पर रविवार रात पंचायत की। पंचायत में सावित्री की बेटी सुमन और दामाद बबलू को बुलाया गया। आरोप है कि प्रधान ने बबलू से कहा कि सावित्री की हत्या के मामले में समझौता कर लो। इस पंचायत में वांटेड नितिन और अतुल भी मौजूद बताए गए। लेकिन दंपति के न मानने पर इन्हीं बदमाशों ने सोमवार सुबह सावित्री के दामाद बबलू की सरेआम हत्या कर पुलिस की विश्वसनीयता और कार्यशैली पर ही सवाल उठा दिया है।
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