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बसपा प्रत्याशी के अपहरण में गहरी साजिश
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Fri, 15 Jul 2016 02:26 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बसपा प्रत्याशी मोहम्मद आरिफ जौला के अपहरण में गहरी साजिश सामने आ रही है। पुलिस इसे राजनैतिक, प्रॉपर्टी, कारोबार, निजी रिश्ते या किसी रंजिश से जोड़कर जांच में जुटी है। एसएसपी के अनुसार जांच का फोकस राजनीति और प्रॉपर्टी से जुड़े किसी विवाद पर है।
राजनैतिक कारण
बसपा ने आरिफ को तीन माह पहले ही बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया था। यह टिकट मेरठ में ठेकेदारी करने वाले बुढ़ाना कस्बे के नईम का काटा गया था। आरिफ को टिकट मिलने से पार्टी के एक वर्ग के अलावा दूसरे दलों के कुछ लोग भी अंदरूनी तौर पर नाखुश बताए गए। पुलिस की जांच रिपोर्ट में भी एक पूर्व विधायक का नाम भी सामने आया है। पुलिस ने तीन पूर्व विधायकों सहित कई नेताओं के फोन भी सर्विलांस पर लगाए हैं।
प्रॉपर्टी या कारोबार
आरिफ ने कुछ वर्षों में काफी तरक्की की। उनका कारोबार दिल्ली से पाकिस्तान और दुबई तक फैला है। पुलिस की एक टीम उनके बिजनेस पार्टनरों से पूछताछ के लिए दिल्ली में मौजूद है। वहीं, उनकी प्रॉपर्टी की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
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महिला कनेक्शन
आरिफ की स्कार्पियो में पिछली सीट पर महिला के बाल मिलना भी बड़ा सवाल है। पुलिस मान रही है कि आरोपियों के साथ महिला हो सकती है। जोकि पहले से गाड़ी में मौजूद थी। हो सकता है कि अपहरण दूसरी जगह किया गया हो और गाड़ी जानबूझकर हाईवे पर छोड़ी गई हो। जिससे पुलिस भटक जाए।
भटका रही मोबाइल की लोकेशन
खास बात यह है कि आरिफ के मोबाइल फोन की लोकेशन घटना वाले दिन चार घंटे तक रोहटा रोड स्थित खटीकपुरा में बताई गई। जबकि आधी रात को अचानक आरिफ का फोन उसकी स्कॉर्पियो में बरामद हो गया। जो इशारा करता है कि वारदात की जड़े काफी गहरी हैं। सवाल है कि अपहरण होने के चार घंटे बाद स्कॉर्पियो के अंदर आरिफ का मोबाइल किसने रखा। जबकि उस दौरान गाड़ी की चाबी भी पास ही बरामद हो गई थी।
दरअसल, बुढ़ाना के जौला गांव निवासी आरिफ के अगवा होने की जानकारी पुलिस को मंगलवार शाम 4:10 बजे मिली थी। जबकि कुछ देर बाद ही आरिफ की स्कॉर्पियो गाड़ी लॉक हालत में डाबका गांव के पास लावारिस मिली थी। शाम करीब सात बजे सर्विलांस जांच में आरिफ के फोन की अंतिम लोकेशन रोहटा रोड स्थित खटीकपुरा बताई गई। पुलिस जांच में आगे बढ़ती, इससे पहले ही भीड़ ने हाईवे जाम कर हंगामा खड़ा कर दिया था। पुलिस जांच छोड़कर भीड़ को हाईवे से हटाने में लग गई थी।
इस बीच रात करीब एक बजे अचानक स्कॉर्पियो की चाबी भी गाड़ी से कुछ कदम दूर पड़ी मिली। इस दौरान भी खूब धक्कामुक्की हुई थी। जांच में आरिफ का मोबाइल फोन गाड़ी में पड़ा मिला था। पुलिस ने मोबाइल की लोकेशन निकलवाई तो वह डाबका के पास (घटनास्थल) की आई। यह देखकर पुलिस भी दंग रह गई कि आखिर खटीकपुरा से मोबाइल फोन कौन लाया और किसने उसको आरिफ की गाड़ी में रख दिया।
एक्सपर्ट ने दी राय
क्या फोन की लोकेशन अलग-अलग बताई जा सकती है? पुलिस के इस सवाल पर साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि केवल 500-600 मीटर की दायरे में लोकेशन बदल सकती है। पांच किलोमीटर का तो सवाल ही नहीं उठता। जबकि खटीकपुरा और डाबका के बीच करीब पांच किलोमीटर की दूरी है।
भीड़ में शामिल था आरोपी
साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक खटीकपुरा से मोबाइल को लाया गया और मौका देखकर उसे स्कॉर्पियो में रखा गया। साफ है कि आरोपी भीड़ में शामिल था, जिससे यह काम किया है। सवाल है कि अपहरण में शामिल आरोपी मोबाइल और चाबी लेकर क्यों पहुंचा।
खटीकपुरा में प्लानिंग
पुलिस यह भी मान रही है कि अपहरण की प्लानिंग खटीकपुरा में बनी है। दोपहर 2:30 बजे से शाम 6:30 तक आरिफ के फोन की लोकेशन खटीकपुरा में रही। माना जा रहा है कि आरिफ को खटीकपुरा में चार घंटे तक रखा गया। इसे देखते हुए बृहस्पतिवार दिन भर पुलिस ने खटीकपुरा और आसपास के इलाके में सर्च अभियान चलाया। यह भी अनुमान है कि आरिफ को इसके बाद बदमाश ट्रेेन से लेकर कहीं दूर तो नहीं निकल गए।
गले नहीं उतरती कहानी
आरिफ द्वारा दिल्ली से स्कॉर्पियो खुद ड्राइव करते आना बात पुलिस के गले नहीं उतर रहा। पुलिस मान रही है कि उनके साथ गाड़ी में कोई ना कोई साथ था। घटनास्थल को देखने से लगता है कि गाड़ी को हाईवे पर जानबूझकर खड़ा किया गया। ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे माना जाए कि आरिफ को जबरन ले जाया गया।
रिश्तेदार पर भी शक
पुलिस के मुताबिक आरिफ का रिश्तेदार साजिद श्यामनगर, लिसाड़ीगेट में रहता है। आरिफ जब जौला गांव जाते थे तो साजिद को अक्सर मेरठ से लेकर जाते थे। घटना वाले दिन भी आरिफ ने दोपहर करीब दो बजे साजिद को फोन कर कंकरखेड़ा फ्लाईओवर पर बुलाया था। आरिफ ने खुद को मोहिउद्दीनपुर के पास बताया था। आरिफ के आने-जाने का पता साजिद को होता था। पुलिस ने साजिद पर शक जताकर पूछताछ की। हालांकि आरिफ के परिवार का कहना है कि साजिद तो करीब 20 साल उनसे जुड़ा है। वह ऐसा काम नहीं कर सकता।
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राजनैतिक कारण
बसपा ने आरिफ को तीन माह पहले ही बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया था। यह टिकट मेरठ में ठेकेदारी करने वाले बुढ़ाना कस्बे के नईम का काटा गया था। आरिफ को टिकट मिलने से पार्टी के एक वर्ग के अलावा दूसरे दलों के कुछ लोग भी अंदरूनी तौर पर नाखुश बताए गए। पुलिस की जांच रिपोर्ट में भी एक पूर्व विधायक का नाम भी सामने आया है। पुलिस ने तीन पूर्व विधायकों सहित कई नेताओं के फोन भी सर्विलांस पर लगाए हैं।
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प्रॉपर्टी या कारोबार
आरिफ ने कुछ वर्षों में काफी तरक्की की। उनका कारोबार दिल्ली से पाकिस्तान और दुबई तक फैला है। पुलिस की एक टीम उनके बिजनेस पार्टनरों से पूछताछ के लिए दिल्ली में मौजूद है। वहीं, उनकी प्रॉपर्टी की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
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महिला कनेक्शन
आरिफ की स्कार्पियो में पिछली सीट पर महिला के बाल मिलना भी बड़ा सवाल है। पुलिस मान रही है कि आरोपियों के साथ महिला हो सकती है। जोकि पहले से गाड़ी में मौजूद थी। हो सकता है कि अपहरण दूसरी जगह किया गया हो और गाड़ी जानबूझकर हाईवे पर छोड़ी गई हो। जिससे पुलिस भटक जाए।
भटका रही मोबाइल की लोकेशन
खास बात यह है कि आरिफ के मोबाइल फोन की लोकेशन घटना वाले दिन चार घंटे तक रोहटा रोड स्थित खटीकपुरा में बताई गई। जबकि आधी रात को अचानक आरिफ का फोन उसकी स्कॉर्पियो में बरामद हो गया। जो इशारा करता है कि वारदात की जड़े काफी गहरी हैं। सवाल है कि अपहरण होने के चार घंटे बाद स्कॉर्पियो के अंदर आरिफ का मोबाइल किसने रखा। जबकि उस दौरान गाड़ी की चाबी भी पास ही बरामद हो गई थी।
दरअसल, बुढ़ाना के जौला गांव निवासी आरिफ के अगवा होने की जानकारी पुलिस को मंगलवार शाम 4:10 बजे मिली थी। जबकि कुछ देर बाद ही आरिफ की स्कॉर्पियो गाड़ी लॉक हालत में डाबका गांव के पास लावारिस मिली थी। शाम करीब सात बजे सर्विलांस जांच में आरिफ के फोन की अंतिम लोकेशन रोहटा रोड स्थित खटीकपुरा बताई गई। पुलिस जांच में आगे बढ़ती, इससे पहले ही भीड़ ने हाईवे जाम कर हंगामा खड़ा कर दिया था। पुलिस जांच छोड़कर भीड़ को हाईवे से हटाने में लग गई थी।
इस बीच रात करीब एक बजे अचानक स्कॉर्पियो की चाबी भी गाड़ी से कुछ कदम दूर पड़ी मिली। इस दौरान भी खूब धक्कामुक्की हुई थी। जांच में आरिफ का मोबाइल फोन गाड़ी में पड़ा मिला था। पुलिस ने मोबाइल की लोकेशन निकलवाई तो वह डाबका के पास (घटनास्थल) की आई। यह देखकर पुलिस भी दंग रह गई कि आखिर खटीकपुरा से मोबाइल फोन कौन लाया और किसने उसको आरिफ की गाड़ी में रख दिया।
एक्सपर्ट ने दी राय
क्या फोन की लोकेशन अलग-अलग बताई जा सकती है? पुलिस के इस सवाल पर साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि केवल 500-600 मीटर की दायरे में लोकेशन बदल सकती है। पांच किलोमीटर का तो सवाल ही नहीं उठता। जबकि खटीकपुरा और डाबका के बीच करीब पांच किलोमीटर की दूरी है।
भीड़ में शामिल था आरोपी
साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक खटीकपुरा से मोबाइल को लाया गया और मौका देखकर उसे स्कॉर्पियो में रखा गया। साफ है कि आरोपी भीड़ में शामिल था, जिससे यह काम किया है। सवाल है कि अपहरण में शामिल आरोपी मोबाइल और चाबी लेकर क्यों पहुंचा।
खटीकपुरा में प्लानिंग
पुलिस यह भी मान रही है कि अपहरण की प्लानिंग खटीकपुरा में बनी है। दोपहर 2:30 बजे से शाम 6:30 तक आरिफ के फोन की लोकेशन खटीकपुरा में रही। माना जा रहा है कि आरिफ को खटीकपुरा में चार घंटे तक रखा गया। इसे देखते हुए बृहस्पतिवार दिन भर पुलिस ने खटीकपुरा और आसपास के इलाके में सर्च अभियान चलाया। यह भी अनुमान है कि आरिफ को इसके बाद बदमाश ट्रेेन से लेकर कहीं दूर तो नहीं निकल गए।
गले नहीं उतरती कहानी
आरिफ द्वारा दिल्ली से स्कॉर्पियो खुद ड्राइव करते आना बात पुलिस के गले नहीं उतर रहा। पुलिस मान रही है कि उनके साथ गाड़ी में कोई ना कोई साथ था। घटनास्थल को देखने से लगता है कि गाड़ी को हाईवे पर जानबूझकर खड़ा किया गया। ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे माना जाए कि आरिफ को जबरन ले जाया गया।
रिश्तेदार पर भी शक
पुलिस के मुताबिक आरिफ का रिश्तेदार साजिद श्यामनगर, लिसाड़ीगेट में रहता है। आरिफ जब जौला गांव जाते थे तो साजिद को अक्सर मेरठ से लेकर जाते थे। घटना वाले दिन भी आरिफ ने दोपहर करीब दो बजे साजिद को फोन कर कंकरखेड़ा फ्लाईओवर पर बुलाया था। आरिफ ने खुद को मोहिउद्दीनपुर के पास बताया था। आरिफ के आने-जाने का पता साजिद को होता था। पुलिस ने साजिद पर शक जताकर पूछताछ की। हालांकि आरिफ के परिवार का कहना है कि साजिद तो करीब 20 साल उनसे जुड़ा है। वह ऐसा काम नहीं कर सकता।