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प्रमाण पत्रों की दलाली में गोपनीय के आठ कर्मचारी रडार पर
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प्रमाण पत्रों की दलाली में गोपनीय विभाग के आठ कर्मचारी रडार पर
- समिति ने खंगाले रिकॉर्ड, आरोपियों को नोटिस दिए जाने की तैयारी
- मार्कशीट जारी करने में भी हुआ बड़ा गड़बड़झाला
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में डिग्री और प्रमाण पत्र की दलाली प्रकरण में गोपनीय विभाग समेत दूसरे विभाग के आठ कर्मचारी रडार पर आ गए हैं। समिति को प्रमाण पत्रों के रिकॉर्ड में भी भारी गड़बड़ियां मिली हैं। ऐसे में गड़बड़ी करने वाले इन कर्मचारियों को नोटिस जारी करने की तैयारी हो गई है। इसके अलावा सामने आया है कि सिर्फ डिग्री जारी करने में ही घूस नहीं ली गई, बल्कि मार्कशीट जारी करने में भी लंबे समय से खेल चल रहा है। ऐसा करने वाले इन कर्मचारियों से नोटिस में पूछा जाएगा कि पुराने प्रमाण पत्र पेंडिंग रहने के बावजूद उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में रोजाना आने वाले आवेदनों पर कैसे डिग्री और मार्कशीट जारी कर दी।
अमर उजाला के स्टिंग के बाद कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने साफ कर दिया है कि यूनिवर्सिटी में ऐसा घृणित कार्य करने वाले कर्मचारी बाहर किए जाएंगे। इसको लेकर उन्होंने समिति से जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट देने को कहा है। समिति में शामिल प्रो. जयमाला, प्रो. बीरपाल सिंह और प्रो. एसके दत्ता को जांच सौंपी गई है। समिति ने रिकॉर्ड जुटाना शुरू कर दिया है। जांच पड़ताल में सामने आया है कि सिर्फ डिग्री में ही गड़बड़ियां नहीं हुई बल्कि मार्कशीट जारी करने में भी घूस ली जा रही थी। ऐसे में समिति ने पुरानी जारी की गईं मार्कशीटों का भी रिकॉर्ड मांग लिया है। यह भी स्प्ष्ट कर दिया गया है कि अगर किसी ने पुराना रिकॉर्ड मिटाने की कोशिश की तो ऐसा करने वालों पर मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।
अब तक की जांच में बड़ी चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही हैं। समिति के सदस्य भी हैरान हैं कि पुराने प्रमाण पत्र पेंडिंग रहने के बावजूद रोजाना आने वाले आदवेनों केप्रमाण पत्र इतनी संख्या में कैसे बनाए जा रहे थे। ऐसा करने वाले आठ कर्मचारी रडार पर आ गए हैं। इस प्रकरण में इनकी संलिप्तता पूरी तरह से सामने आ रही है। समिति ने कई ओर रिकॉर्ड भी जुटाए हैं।
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रजिस्ट्रार ने तलब किए कर्मचारी, जवाबदेही होगी तय
यूनिवर्सिटी कैंपस में लापरवाही के मामलों में अब हर कर्मचारी की जवाबदेही तय होगी। ऐसा नहीं होगा कि गलती कर्मचारी करे और उसकी सजा ऊपर वाले अधिकारी को मिले। इसको लेकर कार्यवाहक रजिस्ट्रार वीपी कौशल ने बुधवार को कर्मचारियों को बुलाकर स्पष्ट कर दिया कि हरेक की जिम्मेदारी तय होगी। लापरवाही किए जाने पर वह खुद जिम्मेदार होगा।
फर्जी ट्रांसक्रिप्ट बनाने वालों पर भी शिकंजा
कैंपस में फर्जी ट्रांसक्रिप्ट के जरिए प्रमाण पत्रों को सत्यापित कराने का मामला हाल ही में पकड़ा गया है। ऐसे में ट्रांसक्रिप्ट सेक्शन में भी सख्ती की जा रही है। ऐसे करने वालों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। इसकेसाथ ही सीबीएसई के एक अधिकारी के बीएससी के 1987 के कागजातों का सत्यापन कराने के दौरान चार्ट केपन्ने फाड़े जाने पर भी कार्रवाई की तैयारी है। फिलहाल उनके कागजातों का सत्यापन करा दिया गया है।
गलत करने वालों को दंड मिलेगा
डिग्री केसाथ ही पिछले दिनों बनाई गईं सभी मार्कशीटों का भी रिकॉॅर्ड खंगाला जा रहा है। समिति तेजी से जांच करके रिपोर्ट देगी। गलत कार्य करने वालों को दंड तो मिलेगा ही। - प्रो. वाई विमला, प्रति कुलपति चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय
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- समिति ने खंगाले रिकॉर्ड, आरोपियों को नोटिस दिए जाने की तैयारी
- मार्कशीट जारी करने में भी हुआ बड़ा गड़बड़झाला
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में डिग्री और प्रमाण पत्र की दलाली प्रकरण में गोपनीय विभाग समेत दूसरे विभाग के आठ कर्मचारी रडार पर आ गए हैं। समिति को प्रमाण पत्रों के रिकॉर्ड में भी भारी गड़बड़ियां मिली हैं। ऐसे में गड़बड़ी करने वाले इन कर्मचारियों को नोटिस जारी करने की तैयारी हो गई है। इसके अलावा सामने आया है कि सिर्फ डिग्री जारी करने में ही घूस नहीं ली गई, बल्कि मार्कशीट जारी करने में भी लंबे समय से खेल चल रहा है। ऐसा करने वाले इन कर्मचारियों से नोटिस में पूछा जाएगा कि पुराने प्रमाण पत्र पेंडिंग रहने के बावजूद उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में रोजाना आने वाले आवेदनों पर कैसे डिग्री और मार्कशीट जारी कर दी।
अमर उजाला के स्टिंग के बाद कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने साफ कर दिया है कि यूनिवर्सिटी में ऐसा घृणित कार्य करने वाले कर्मचारी बाहर किए जाएंगे। इसको लेकर उन्होंने समिति से जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट देने को कहा है। समिति में शामिल प्रो. जयमाला, प्रो. बीरपाल सिंह और प्रो. एसके दत्ता को जांच सौंपी गई है। समिति ने रिकॉर्ड जुटाना शुरू कर दिया है। जांच पड़ताल में सामने आया है कि सिर्फ डिग्री में ही गड़बड़ियां नहीं हुई बल्कि मार्कशीट जारी करने में भी घूस ली जा रही थी। ऐसे में समिति ने पुरानी जारी की गईं मार्कशीटों का भी रिकॉर्ड मांग लिया है। यह भी स्प्ष्ट कर दिया गया है कि अगर किसी ने पुराना रिकॉर्ड मिटाने की कोशिश की तो ऐसा करने वालों पर मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।
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अब तक की जांच में बड़ी चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही हैं। समिति के सदस्य भी हैरान हैं कि पुराने प्रमाण पत्र पेंडिंग रहने के बावजूद रोजाना आने वाले आदवेनों केप्रमाण पत्र इतनी संख्या में कैसे बनाए जा रहे थे। ऐसा करने वाले आठ कर्मचारी रडार पर आ गए हैं। इस प्रकरण में इनकी संलिप्तता पूरी तरह से सामने आ रही है। समिति ने कई ओर रिकॉर्ड भी जुटाए हैं।
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रजिस्ट्रार ने तलब किए कर्मचारी, जवाबदेही होगी तय
यूनिवर्सिटी कैंपस में लापरवाही के मामलों में अब हर कर्मचारी की जवाबदेही तय होगी। ऐसा नहीं होगा कि गलती कर्मचारी करे और उसकी सजा ऊपर वाले अधिकारी को मिले। इसको लेकर कार्यवाहक रजिस्ट्रार वीपी कौशल ने बुधवार को कर्मचारियों को बुलाकर स्पष्ट कर दिया कि हरेक की जिम्मेदारी तय होगी। लापरवाही किए जाने पर वह खुद जिम्मेदार होगा।
फर्जी ट्रांसक्रिप्ट बनाने वालों पर भी शिकंजा
कैंपस में फर्जी ट्रांसक्रिप्ट के जरिए प्रमाण पत्रों को सत्यापित कराने का मामला हाल ही में पकड़ा गया है। ऐसे में ट्रांसक्रिप्ट सेक्शन में भी सख्ती की जा रही है। ऐसे करने वालों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। इसकेसाथ ही सीबीएसई के एक अधिकारी के बीएससी के 1987 के कागजातों का सत्यापन कराने के दौरान चार्ट केपन्ने फाड़े जाने पर भी कार्रवाई की तैयारी है। फिलहाल उनके कागजातों का सत्यापन करा दिया गया है।
गलत करने वालों को दंड मिलेगा
डिग्री केसाथ ही पिछले दिनों बनाई गईं सभी मार्कशीटों का भी रिकॉॅर्ड खंगाला जा रहा है। समिति तेजी से जांच करके रिपोर्ट देगी। गलत कार्य करने वालों को दंड तो मिलेगा ही। - प्रो. वाई विमला, प्रति कुलपति चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय