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एसपी से लेकर आईजी पर कर चुका रौब गालिब
Updated Mon, 31 Jul 2017 02:42 AM IST
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मेरठ। इंस्पेक्टर सिविल लाइन धीरज शुक्ला ने बताया कि फर्जी मुख्य सचिव बनकर एसएसपी को कॉल करने वाले आरोपी अरुण ने पूर्व एसपी देहात प्रवीण रंजन को भी कॉल कर रौब गालिब किया था। बीते सितंबर उसने खुद को पीएमओ में सचिव बताकर आईजी जोन सुजीत पांडे के सीयूजी नंबर पर कॉल कर एक थानेदार और सीओ की सिफारिश की थी। जिसके बाद वह जेल गया था।
आसपास फैला रखा मायाजाल
गंगानगर बी ब्लॉक निवासी बीए पास अरुण मिश्रा (39) पुत्र रामलोचन। पिता बीएसएनएल से रिटायर्ड कर्मचारी हैं। पूछताछ में अरुण ने 250 चिल्ड्रन बुक्स लिखने का दावा किया। कभी लखनऊ तो दिल्ली में बड़ा सरकारी अफसर बताकर रौब गालिब करने वाले अरुण ने गंगानगर, डिफेंस कॉलोनी, रक्षापुरम, मीनाक्षीपुरम में मायाजाल फैला रखा है। वह सप्ताह में तीन दिन घर से बैग लेकर निकलता और अगले दिन लौट आता था।
थाने में पीता था चाय
जांच में सामने आया कि अरुण कई बार गंगानगर थाने में पुलिसकर्मियों के साथ चाय पी चुका था। पुलिस ने तत्कालीन एसओ ओमवीर गुप्ता से पूछताछ की तो ओमवीर ने पल्ला झाड़ लिया कि मैं किसी अरुण को नहीं जानता।
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मुझे दरोगा ने फंसाया
सिविल लाइन थाने में इंस्पेक्टर के पैर पकड़कर रोते आरोपी ने दावा किया कि 25 जुलाई को उसका मोबाइल खो गया था। डुप्लीकेट सिम वह ले नहीं पाया। 25 जुलाई को ही वह शालीमार से वैष्णो देवी चला गया था। दावा है कि गंगानगर थाने के एक दरोगा ने उसे फंसाया है। उसके वकील के पास दरोगा का पूरा रिकॉर्ड है। कॉल डिटेल में वह बच जाएगा। इंस्पेक्टर ने दरोगा का नाम पूछा तो बोला जमानत मिलने के बाद बता दूंगा।
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आसपास फैला रखा मायाजाल
गंगानगर बी ब्लॉक निवासी बीए पास अरुण मिश्रा (39) पुत्र रामलोचन। पिता बीएसएनएल से रिटायर्ड कर्मचारी हैं। पूछताछ में अरुण ने 250 चिल्ड्रन बुक्स लिखने का दावा किया। कभी लखनऊ तो दिल्ली में बड़ा सरकारी अफसर बताकर रौब गालिब करने वाले अरुण ने गंगानगर, डिफेंस कॉलोनी, रक्षापुरम, मीनाक्षीपुरम में मायाजाल फैला रखा है। वह सप्ताह में तीन दिन घर से बैग लेकर निकलता और अगले दिन लौट आता था।
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थाने में पीता था चाय
जांच में सामने आया कि अरुण कई बार गंगानगर थाने में पुलिसकर्मियों के साथ चाय पी चुका था। पुलिस ने तत्कालीन एसओ ओमवीर गुप्ता से पूछताछ की तो ओमवीर ने पल्ला झाड़ लिया कि मैं किसी अरुण को नहीं जानता।
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मुझे दरोगा ने फंसाया
सिविल लाइन थाने में इंस्पेक्टर के पैर पकड़कर रोते आरोपी ने दावा किया कि 25 जुलाई को उसका मोबाइल खो गया था। डुप्लीकेट सिम वह ले नहीं पाया। 25 जुलाई को ही वह शालीमार से वैष्णो देवी चला गया था। दावा है कि गंगानगर थाने के एक दरोगा ने उसे फंसाया है। उसके वकील के पास दरोगा का पूरा रिकॉर्ड है। कॉल डिटेल में वह बच जाएगा। इंस्पेक्टर ने दरोगा का नाम पूछा तो बोला जमानत मिलने के बाद बता दूंगा।