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नगर निकायों में सरकारी जमीनों पर हुआ सेटिंग का खेल
Updated Sat, 31 Mar 2018 01:55 AM IST
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जमीनों पर कब्जा, रिपोर्ट दर्ज, कार्रवाई शून्य
मेरठ। जनपद की नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में भी सरकारी जमीनों पर बड़े कब्जे सामने आ रहे हैं। इनके खिलाफ प्रशासनिक सख्ती के चलते मुकदमे भी दर्ज हो रहे हैं, लेकिन जमीन खाली कराने के नाम पर कार्रवाई अभी तक शून्य है। मवाना नगर पालिका में ही 17 खसरा नंबरों पर करीब 20 हजार वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर कब्जा कर दुकान व मकान बना डाले। इन मामलों में 195 लोगों पर मुकदमा दर्ज होने के साथ ही एसडीएम कोर्ट में पीपी एक्ट के तहत वाद भी दायर हो चुका है। इसके अलावा सरधना पालिका के साथ सभी नगर पंचायतों में भी जमीनों पर कब्जे हुए हैं।
इन सरकारी खसरा नंबर पर हुआ कब्जा
नगर पालिका मवाना में खसरा नंबर 3440 तालाब है, जिसमें मकान बन चुके हैं। मुख्य बाजार में कपिल सिनेमा के सामने खसरा नंबर 2160 तालाब दर्ज है, लेकिन यहां दुकानें बन चुकी हैं। खसरा नंबर 352, 353 और 354 में तालाब दर्ज हैं, लेकिन यहां पक्के मकान बन चुके हैं। खसरा नंबर 2217 बच्चा कब्रिस्तान में दर्ज है और नगर पालिका से बिल्कुल सटी हुई जमीन है, लेकिन यहां भी कब्जा कर मकान बना लिया गया। खसरा नंबर 161 ढिकौली रोड पर तालाब में दर्ज है, यहां भी मकान बन चुके हैं। खसरा नंबर 1809 फलावदा रोड पर है और बंजर में दर्ज है। इस पर भी मकान व दुकान बन चुके हैं। खसरा नंबर 434 में तालाब है तो खसरा नंबर 1808 फलावदा रोड पर तालाब में दर्ज हैं। इसमें भी पक्के निर्माण कर कब्जा किया जा चुका है। जबकि खसरा नंबर 190 और खसरा नंबर 210 में भी तालाब दर्ज है, लेकिन यहां भी पक्के निर्माण हो चुके हैं। खसरा नंबर 2511 कसबे के काबली गेट मोहल्ला में तालाब दर्ज है, लेकिन यहां पक्के मकान बन चुके हैं। खसरा नंबर 3254 मोहल्ला तिहाई झुग्गी में श्मशान घाट के रूप में दर्ज है, लेकिन यहां भी पक्के निर्माण कर लिया। इसके साथ ही खसरा नंबर 1807 फलावदा रोड पर कुम्हार गड्ढों में दर्ज है, लेकिन यहां भी पक्का निर्माण किया जा चुका है।
15 साल में हुए सारे कब्जे
नगर पालिका और मवाना के लोगों के अनुसार इन सरकारी जमीनों पर अधिकांश कब्जे पिछले 15 सालों के दौरान हुए। इन जमीनों पर कब्जा कराने में सभी राजनीतिक दलों के लोग रहे। वहीं नगर पालिका परिषद के वर्षों से जमे मठाधीश कर्मचारियों की मिलीभगत भी इन कब्जों के पीछे रही। जब फर्जी बैनामों के जरिये इन निर्माणों को वैध कराने का प्रयास किया गया तो इन कर्मचारियों ने गृहकर लगा दिया।
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वर्तमान चेयरमैन भी फंसे कब्जा कराने में
नगर पालिका परिषद के वर्तमान चेयरमैन अय्यूब कालिया जमीन पर कब्जा कराने के मामले में फंस गए हैं। खसरा नंबर 4582 जो कि राजोवाला तालाब और नाला में दर्ज है, इसमें कब्जा हुआ है। यहां पर चेयरमैन अय्यूब कालिया ने 105 मीटर का बैनामा कराया था। लेकिन बाद में उन्होंने जब इस जमीन को बेचा तो दूसरे पक्ष को 180 मीटर का बैनामा कर दिया। इसमें उन्होंने रजिस्ट्री के स्टांप को बदलते हुए 105 मीटर की जगह 180 मीटर दर्ज करा दिया और कब्जा भी करा दिया। इस अतिरिक्त जमीन के लिए उन्होंने नाले को पाटकर उस पर कब्जा किया। इसका खुलासा होने पर नगर पालिका द्वारा वर्तमान कब्जाधारक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई। जब उक्त कब्जाधारक ने अपना पक्ष मंडलायुक्त के सामने रखा तो जांच में साफ हो गया कि खेल अय्यूब कालिया ने किया है। यही नहीं पूर्व में सभासद रहते हुए अय्यूब कालिया टैक्स समिति के अध्यक्ष भी थे, तो उन्होंने 180 मीटर पर ही टैक्स भी तय करा दिया।
जांच की तो खुला खेल
प्रदेश में भाजपा सरकार बनते ही एंटी भूमाफिया टास्कफोर्स गठित की गई। इसके बाद जब मवाना नगर पालिका ने अपनी जमीनों को खंगाला तो सारे कब्जे सामने आ गये। इस पर 195 लोगों के खिलाफ मवाना थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई और एसडीएम कोर्ट में पीपी एक्ट के तहत वाद भी दायर किये गए। जिसमें अब सुनवाई चल रही है।
वादों का तेजी से निस्तारण होगा
नगर पालिका मवाना मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसकी समीक्षा की जाएगी और जमीन कब्जा मुक्त कराने के लिए वादाें का तेजी से निस्तारण करते हुए कार्रवाई तय कराई जाएगी। इस मामले में जहां पर लापरवाही नजर आएगी, वहीं पर सख्ती से कार्रवाई होगी।
सत्यप्रकाश पटेल, अपर जिलाधिकारी प्रशासन
खुद को निर्दोष साबित करूंगा
मुझे राजनीतिक रंजिश में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि मेरे पास 105 मीटर की रजिस्ट्री और 75 मीटर जमीन की नोटरी है। मैं अपना पक्ष रखते हुए खुद को निर्दोष साबित कर दूंगा। - अय्यूब कालिया, चेयरमैन नगर पालिका मवाना
खास बातें:
मवाना नगर पालिका में 17 खसरों पर कब्जाई गई 20 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन
तालाबों, गड्ढों, श्मशान और कब्रिस्तान की जमीन पर कर लिया पक्का निर्माण
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मेरठ। जनपद की नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में भी सरकारी जमीनों पर बड़े कब्जे सामने आ रहे हैं। इनके खिलाफ प्रशासनिक सख्ती के चलते मुकदमे भी दर्ज हो रहे हैं, लेकिन जमीन खाली कराने के नाम पर कार्रवाई अभी तक शून्य है। मवाना नगर पालिका में ही 17 खसरा नंबरों पर करीब 20 हजार वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर कब्जा कर दुकान व मकान बना डाले। इन मामलों में 195 लोगों पर मुकदमा दर्ज होने के साथ ही एसडीएम कोर्ट में पीपी एक्ट के तहत वाद भी दायर हो चुका है। इसके अलावा सरधना पालिका के साथ सभी नगर पंचायतों में भी जमीनों पर कब्जे हुए हैं।
इन सरकारी खसरा नंबर पर हुआ कब्जा
नगर पालिका मवाना में खसरा नंबर 3440 तालाब है, जिसमें मकान बन चुके हैं। मुख्य बाजार में कपिल सिनेमा के सामने खसरा नंबर 2160 तालाब दर्ज है, लेकिन यहां दुकानें बन चुकी हैं। खसरा नंबर 352, 353 और 354 में तालाब दर्ज हैं, लेकिन यहां पक्के मकान बन चुके हैं। खसरा नंबर 2217 बच्चा कब्रिस्तान में दर्ज है और नगर पालिका से बिल्कुल सटी हुई जमीन है, लेकिन यहां भी कब्जा कर मकान बना लिया गया। खसरा नंबर 161 ढिकौली रोड पर तालाब में दर्ज है, यहां भी मकान बन चुके हैं। खसरा नंबर 1809 फलावदा रोड पर है और बंजर में दर्ज है। इस पर भी मकान व दुकान बन चुके हैं। खसरा नंबर 434 में तालाब है तो खसरा नंबर 1808 फलावदा रोड पर तालाब में दर्ज हैं। इसमें भी पक्के निर्माण कर कब्जा किया जा चुका है। जबकि खसरा नंबर 190 और खसरा नंबर 210 में भी तालाब दर्ज है, लेकिन यहां भी पक्के निर्माण हो चुके हैं। खसरा नंबर 2511 कसबे के काबली गेट मोहल्ला में तालाब दर्ज है, लेकिन यहां पक्के मकान बन चुके हैं। खसरा नंबर 3254 मोहल्ला तिहाई झुग्गी में श्मशान घाट के रूप में दर्ज है, लेकिन यहां भी पक्के निर्माण कर लिया। इसके साथ ही खसरा नंबर 1807 फलावदा रोड पर कुम्हार गड्ढों में दर्ज है, लेकिन यहां भी पक्का निर्माण किया जा चुका है।
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15 साल में हुए सारे कब्जे
नगर पालिका और मवाना के लोगों के अनुसार इन सरकारी जमीनों पर अधिकांश कब्जे पिछले 15 सालों के दौरान हुए। इन जमीनों पर कब्जा कराने में सभी राजनीतिक दलों के लोग रहे। वहीं नगर पालिका परिषद के वर्षों से जमे मठाधीश कर्मचारियों की मिलीभगत भी इन कब्जों के पीछे रही। जब फर्जी बैनामों के जरिये इन निर्माणों को वैध कराने का प्रयास किया गया तो इन कर्मचारियों ने गृहकर लगा दिया।
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वर्तमान चेयरमैन भी फंसे कब्जा कराने में
नगर पालिका परिषद के वर्तमान चेयरमैन अय्यूब कालिया जमीन पर कब्जा कराने के मामले में फंस गए हैं। खसरा नंबर 4582 जो कि राजोवाला तालाब और नाला में दर्ज है, इसमें कब्जा हुआ है। यहां पर चेयरमैन अय्यूब कालिया ने 105 मीटर का बैनामा कराया था। लेकिन बाद में उन्होंने जब इस जमीन को बेचा तो दूसरे पक्ष को 180 मीटर का बैनामा कर दिया। इसमें उन्होंने रजिस्ट्री के स्टांप को बदलते हुए 105 मीटर की जगह 180 मीटर दर्ज करा दिया और कब्जा भी करा दिया। इस अतिरिक्त जमीन के लिए उन्होंने नाले को पाटकर उस पर कब्जा किया। इसका खुलासा होने पर नगर पालिका द्वारा वर्तमान कब्जाधारक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई। जब उक्त कब्जाधारक ने अपना पक्ष मंडलायुक्त के सामने रखा तो जांच में साफ हो गया कि खेल अय्यूब कालिया ने किया है। यही नहीं पूर्व में सभासद रहते हुए अय्यूब कालिया टैक्स समिति के अध्यक्ष भी थे, तो उन्होंने 180 मीटर पर ही टैक्स भी तय करा दिया।
जांच की तो खुला खेल
प्रदेश में भाजपा सरकार बनते ही एंटी भूमाफिया टास्कफोर्स गठित की गई। इसके बाद जब मवाना नगर पालिका ने अपनी जमीनों को खंगाला तो सारे कब्जे सामने आ गये। इस पर 195 लोगों के खिलाफ मवाना थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई और एसडीएम कोर्ट में पीपी एक्ट के तहत वाद भी दायर किये गए। जिसमें अब सुनवाई चल रही है।
वादों का तेजी से निस्तारण होगा
नगर पालिका मवाना मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसकी समीक्षा की जाएगी और जमीन कब्जा मुक्त कराने के लिए वादाें का तेजी से निस्तारण करते हुए कार्रवाई तय कराई जाएगी। इस मामले में जहां पर लापरवाही नजर आएगी, वहीं पर सख्ती से कार्रवाई होगी।
सत्यप्रकाश पटेल, अपर जिलाधिकारी प्रशासन
खुद को निर्दोष साबित करूंगा
मुझे राजनीतिक रंजिश में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि मेरे पास 105 मीटर की रजिस्ट्री और 75 मीटर जमीन की नोटरी है। मैं अपना पक्ष रखते हुए खुद को निर्दोष साबित कर दूंगा। - अय्यूब कालिया, चेयरमैन नगर पालिका मवाना
खास बातें:
मवाना नगर पालिका में 17 खसरों पर कब्जाई गई 20 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन
तालाबों, गड्ढों, श्मशान और कब्रिस्तान की जमीन पर कर लिया पक्का निर्माण