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संशोधित फाइल प्रथम श्रेणी की गारंटी

Mon, 25 Feb 2019 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 25 Feb 2019 12:30 AM IST
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संशोधित फाइल प्रथम श्रेणी की गारंटी
प्रथम श्रेणी की गारंटी देकर भरवाए थे बोर्ड परीक्षा के फार्म
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मुजफ्फरनगर। यूपी में इंटरमीडिएट के गैर राज्य, गैर बोर्ड के सबसे ज्यादा विद्यार्थियों ने जिले में ही पंजीकरण कराया है। नौवी और ग्यारहवी की परीक्षा उत्तीर्ण कराने के साथ हाईस्कूल और इंटरमीडिएट प्रथम श्रेणी से पास कराने का ठेका लिया जाता है। बीते एक दशक में करोड़ों के वारे-न्यारे कर चुके नकल माफिया और माध्यमिक शिक्षा विभाग अधिकारियों के गठजोड़ ने मुजफ्फरनगर को उत्तर भारत में नकल से परीक्षा पास करने का गढ़ बना दिया। पूरा सिस्टम को लाचार और पंगु बना रहा।
जनता इंटर कॉलेज बाढ़ में एसटीएफ के सामूहिक नकल के खुलासे के बाद कई तथ्य उजागर हुए हैं।शासन ने परीक्षा केंद्र निर्धारित करने की समिति का अध्यक्ष हर जिले के डीएम को बनाया था। नकल विहीन परीक्षा पर सीएम योगी निर्देशों का अधिकारियों और व्यवस्था पर कोई फर्क नहीं पड़ा। योजनाबद्ध तरीके से नकल माफियाओं ने वेस्ट यूपी सहित आसपास के राज्यों के 1022 छात्र-छात्राओं के प्राइवेट फार्म जिले में पंजीकृत कराए, जिनमें 771 इंटरमीडिएट और 251 हाईस्कूल से रहे। यह सभी विद्यार्थी विज्ञान वर्ग के हैं। इनमें सीबीएसई परीक्षा में फेल हो चुके अभ्यर्थियों की संख्या अधिक है। अभिभावक कुछ भी खर्च कर अनुत्तीर्ण हो चुके छात्र-छात्राओं को यूपी बोर्ड से 12वीं उत्तीर्ण कराना चाहते हैं। यही जरूरत नकल के कारोबार को करोड़ों का बना चुकी है। नौवी और ग्यारहवी की परीक्षा का उत्तीर्ण प्रमाण पत्र मदरसा बोर्ड से उपलब्ध कराया गया है। पंजीकरण में इस प्रमाणपत्र का प्रयोग कर हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के फार्म भरवाए गए। बीते एक दशक से फेल को पास कराने का यह खेल जारी है।
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सॉल्वर दे रहे थे कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी
मुजफ्फरनगर। नकल माफिया का डीआईएस ऑफिस पर ऐसा शिकंजा है कि बोर्ड परीक्षा केंद्र पर फर्जी आईडी के आधार पर सॉल्वर कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी निभाते पाए गए। एसटीएफ ने बाढ़ के कॉलेज के ऐसे आठ शिक्षक पकड़े हैं।
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जांच में पाया गया कि पुरकाजी ब्लाक के गांव खुड्डा स्थित डॉ जाकिर हुसैन इंटर कॉलेज के प्रबंधक कमर इंतखाब ने हजारों अभ्यर्थियों के व्यक्तिगत फार्म चरथावल क्षेत्र के राजकीय इंटर कॉलेज रोनी हरजीपुर और मुथरा से पंजीकृत कराए। डीआईओएस और उनके कार्यालय के स्टाफ ने प्राइवेट फार्म भरवाने में जीआईसी मुजफ्फरनगर की अनदेखी की। यहां केवल 70 प्राइवेट अभ्यर्थियों का पंजीकरण बोर्ड परीक्षा में हुआ है, जबकि जीआईसी रोनी हरजीपुर में दसवीं के 218 और 12वीं के 350 विद्यार्थियों का पंजीकरण कराया गया। ऐसे ही मुथरा के जीआईसी में 12वीं के लिए 179 का पंजीकरण हुआ। जीआईसी जंधेड़ी में दसवीं के 33 और 12वीं के 242 अभ्यर्थियों के फार्म भरे गए। पूर्व योजना के अनुसार रोनी हरजीपुर और मुथरा जीआईसी में पंजीकृत छात्र-छात्राओं का सेंटर जनता इंटर कॉलेज बाढ़ में लगाया गया। जंधेड़ी जीआईसी का सेंटर खतौली क्षेत्र के गंगधाडी में बना दिया गया। बाढ़ में गत वर्ष भी इसी तरह परीक्षा केंद्र बनाकर धड़ल्ले से नकल कराई गई थी।


नकल के खेल में विज्ञान वर्ग के छात्र
मुजफ्फरनगर। व्यक्तिगत परीक्षा पास कराने के खेल में कला और कॉमर्स के विद्यार्थी नहीं है। केवल विज्ञान वर्ग से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट पास करने वालों का पंजीकरण जिले में कराया गया था। नकल के धंधे का नेटवर्क फैलने की एक वजह यह भी है कि विज्ञान वर्ग से परीक्षा उत्तीर्ण के बाद ये अभ्यर्थी एमबीबीएस, इंजीनियरिंग, बीफार्मा, एमबीए आदि प्रोफेशनल कोर्स के लिए पात्र हो जाते हैं।
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