{"_id":"5b0086844f1c1b5c798b53ea","slug":"131526761092-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"योगेश वर्मा पर रासुका को शासन की मंजूरी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
योगेश वर्मा पर रासुका को शासन की मंजूरी
Updated Sun, 20 May 2018 01:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
योगेश वर्मा पर रासुका को शासन की मंजूरी
मेरठ। बसपा के पूर्व विधायक एवं महापौर पति योगेश वर्मा पर मेरठ जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) को शासन ने मंजूर कर दिया है।
एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में दो अप्रैल को दलितों ने भारत बंद का आह्वान कर किया था। मेरठ में हुए उस आंदोलन में हिंसा और आगजनी हुई थी। जिसके आरोप में पुलिस ने बसपा नेता योगेश वर्मा को मुख्य आरोपी बनाते हुए उनके सहित 165 आरोपियों को जेल भेजा था। जिसके बाद जिला प्रशासन ने योगेश वर्मा के खिलाफ रासुका की कार्यवाही शुरू कर दी थी। इसके विरोध में योगेश वर्मा की पत्नी महापौर सुनीता वर्मा द्वारा अनुसूचित आयोग में अपील की गयी थी। जहां सुनवाई के दौरान तत्कालीन एसएसपी द्वारा योगेश वर्मा पर रासुका की कार्यवाही न करने और मेरठ जिला जेल से स्थानांतरित न करने का आश्वासन दिया था। लेकिन बाद में जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने योगेश वर्मा पर रासुका तामील कराकर पत्रावली शासन को भेज दी थी। जिस पर शासन ने अवलोकन के बाद रासुका को मंजूरी दे दी है।
कमेटी लेगी अब निर्णय
जेल में बंद योगेश वर्मा को इस कानून के विरोध में अपनी आपत्ति शासन के समक्ष जतानी होगी। शासन द्वारा इसका अनुमोदन के बाद अब 15 दिनों बाद एडवाइजरी कमेटी को इस मामले में निर्णय लेना है। यदि कमेटी से रासुका स्वीकृत हो जाता है तो फिर योगेश वर्मा को जेल में करीब एक साल तक निरुद्ध रहना पड़ सकता है।
विज्ञापन
खास बातें:
भारत बंद के दौरान हुई हिंसा में मुख्य आरोपी हैं बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा
शासन ने किया अनुमोदन, अब एडवाइजरी कमेटी लेगी रासुका लगाने का निर्णय
विज्ञापन
मेरठ। बसपा के पूर्व विधायक एवं महापौर पति योगेश वर्मा पर मेरठ जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) को शासन ने मंजूर कर दिया है।
एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में दो अप्रैल को दलितों ने भारत बंद का आह्वान कर किया था। मेरठ में हुए उस आंदोलन में हिंसा और आगजनी हुई थी। जिसके आरोप में पुलिस ने बसपा नेता योगेश वर्मा को मुख्य आरोपी बनाते हुए उनके सहित 165 आरोपियों को जेल भेजा था। जिसके बाद जिला प्रशासन ने योगेश वर्मा के खिलाफ रासुका की कार्यवाही शुरू कर दी थी। इसके विरोध में योगेश वर्मा की पत्नी महापौर सुनीता वर्मा द्वारा अनुसूचित आयोग में अपील की गयी थी। जहां सुनवाई के दौरान तत्कालीन एसएसपी द्वारा योगेश वर्मा पर रासुका की कार्यवाही न करने और मेरठ जिला जेल से स्थानांतरित न करने का आश्वासन दिया था। लेकिन बाद में जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने योगेश वर्मा पर रासुका तामील कराकर पत्रावली शासन को भेज दी थी। जिस पर शासन ने अवलोकन के बाद रासुका को मंजूरी दे दी है।
विज्ञापन
कमेटी लेगी अब निर्णय
जेल में बंद योगेश वर्मा को इस कानून के विरोध में अपनी आपत्ति शासन के समक्ष जतानी होगी। शासन द्वारा इसका अनुमोदन के बाद अब 15 दिनों बाद एडवाइजरी कमेटी को इस मामले में निर्णय लेना है। यदि कमेटी से रासुका स्वीकृत हो जाता है तो फिर योगेश वर्मा को जेल में करीब एक साल तक निरुद्ध रहना पड़ सकता है।
विज्ञापन
खास बातें:
भारत बंद के दौरान हुई हिंसा में मुख्य आरोपी हैं बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा
शासन ने किया अनुमोदन, अब एडवाइजरी कमेटी लेगी रासुका लगाने का निर्णय