बेटे और दो भाइयों के हत्यारे को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा
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बिजनौर में अपर सत्र न्यायाधीश रजनीश कुमार की अदालत ने संपत्ति विवाद में दो सगे भाइयों और पुत्र को सोते समय जिंदा जलाकर मारने के आरोपी इरफान उर्फ नाका को फांसी की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने घटना को अत्यंत जघन्य विरलतम श्रेणी का अपराध माना है।
नजीबाबाद के मोहल्ला मुगलूशाह में पांच अगस्त 2014 की रात इरफान के भाई नौशाद व इरशाद और पुत्र इस्लामुद्दीन की हत्या की गई थी। इरफान अपराधी प्रवृत्ति का है, वह उत्तराखंड में हुई एक हत्या के मामले में जेल में था, लेकिन इस वारदात के वक्त वह जमानत पर था।
शासकीय अधिवक्ता संजीव वर्मा ने बताया कि आरोपी इरफान उर्फ नाका ने दूसरा निकाह कर लिया था। उसकी पहली पत्नी से पैदा हुआ पुत्र इस्लामुद्दीन इस निकाह से नाराज था। वह पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा मांग रहा था, जिस पर इरफान उसे पीटता था। इरफान के दोनों भाई भतीजे को पीटने का विरोध करते थे और संपत्ति विवाद में भी उसका पक्ष ले रहे थे। घटना वाली रात यह तीनों एक कमरे में सोए हुए थे। रात करीब साढ़े 12 बजे इरफान ने कमरे को बाहर से बंद कर अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी। चीख-पुकार मचने पर परिवारीजनों व मोहल्ले वालों ने इन्हें बुरी तरह से जली हालत में दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला। बाद में उपचार के दौरान दिल्ली के एक अस्पताल में नौ अगस्त को इरशाद और 18 अगस्त को नौशाद व इस्लामुद्दीन की मौत हो गई थी। इस घटना की रिपोर्ट आरोपी के ताऊ ससुर यूनुस ने दर्ज कराई थी।
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