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गंगा में डॉल्फिन गिनती के लिए अभियान जारी

Sun, 13 Oct 2019 01:50 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Oct 2019 01:50 AM IST
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counting compain of dolfin in ganga continue
हस्तिनापुर। गांगेय डॉल्फिन गणना अभियान के तहत डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइल्ड फंड) की टीम ने गंगा में डॉल्फिन की गणना शुरू कर दी है। टीम ने शनिवार को बोट द्वारा डॉल्फिन की गणना के लिए खरखाली से गढ़मुक्तेश्वर के बीच अभियान चलाया। इस टीम में ब्रिटेन से आईं डॉ. गिल ब्रोलिक भी शामिल हैं। गंगा में डॉल्फिन को बचाने के लिए वन विभाग ने डॉल्फिन को सेंसस करने का फैसला लिया है। इसके तहत शनिवार को गंगा डॉल्फिन गणना 2019 अभियान अंतर्गत डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की टीम ने डॉल्फिन की गणना के लिए खरखाली से गढ़मुक्तेश्वर के बीच लगभग 60 किलोमीटर अभियान चलाया। इस बीच गंगा में मौजूद डॉल्फिन को लोकेट किया गया।
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हस्तिनापुर सेंक्चुरी और नरौरा रामसर साइट क्षेत्र में ये सेंसस गंगा नदी ही नहीं बल्कि गंगा की सहायक नदियों में भी होगा। गणना दस अक्तूबर से बिजनौर से शुरू हो चुकी है। यह 15 अक्तूबर तक जारी रहेगी। डॉल्फिन को बचाना काफी जरूरी है। देशभर में भले ही डॉल्फिन की संख्या घट रही है, लेकिन यहां इनकी संख्या बढ़ रही है। मेरी गंगा मेरी डॉल्फिन अभियान के तहत विश्व प्रकृति निधि भारत और उत्तर प्रदेश वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एचएसबीसी के सहयोग से डॉल्फिन गणना का कार्य चल रहा है। इसका उद्देश्य बिजनौर बैराज से लगभग 50 किलोमीटर ऊपर बालावाली से नरौरा के बीच डॉल्फिन गणना करना है।
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बिजनौर बैराज से नरौरा तक लगभग 225 किलोमीटर की धारा में डॉल्फिन की गणना की जाती रही है। इस बार गंगा बैराज से पीछे बालावाली घाट से डॉल्फिन की गिनती शुरू की गई है। डॉल्फिन गंगा की धारा के विपरीत तैरना पसंद करती है। पहाड़ों पर बारिश के समय गंगा बैराज के गेट खोले जाते हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान कुछ डॉल्फिन पुल के दूसरी ओर जरूर गई होंगी। इन्हें भी चिह्नित करने के लिए बालावाली घाट से डॉल्फिन की गिनती शुरू की गई है। गणना में इस बार दो बोट लगाई गई हैं। ये बोट कुछ दूरी के अंतराल पर चल रही हैं। दोनों बोट पर सवार टीम के सदस्य 15 अक्तूबर तक डॉल्फिन की गिनती करेंगे। उसके बाद 18 अक्टूबर को गणना के परिणाम घोषित होंगे।
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ऐसे होगी गणना
जहां डॉल्फिन दिखेगी उस जगह को जीपीएस से चिह्नित किया जाएगा और गूगल मैप पर उनकी लोकेशन देखकर गिनती की जाएगी। दूसरी बोट भी डॉल्फिन को देखकर स्थान को जीपीएस के चिह्नित करेगी। इस तरह बोट द्वारा जीपीएस से चिह्नित लोकेशन को मिलाया जाएगा। जीपीएस की लोकेशन अलग-अलग मिलने पर दोनों डॉल्फिन को अलग अलग माना जाएगा। वर्ल्ड वाइल्ड फंड के सीनियर कोआर्डिनेटर संजीव यादव के अनुसार डॉल्फिन की गिनती शुरू कर दी गई है। गणना पूरी होने के बाद ही डॉल्फिन की सही संख्या के बारे में पता चलेगा। इस टीम में ब्रिटेन से आई डॉक्टर गिल ब्रोलिक, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सीनियर कोऑर्डिनेटर संजीव यादव, कोऑर्डिनेटर शाहनवाज खान, वन विभाग के डिप्टी रेंजर विनोद कुमार, सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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