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लागत से बेहद कम घोषित हुआ एफआरपी
amar ujala meerut
Updated Tue, 30 May 2017 03:35 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार ने दो साल बाद गन्ना एफआरपी (उचित एवं लाभकारी मूल्य) में 10.87 की वृद्धि करते हुए 255 रुपये प्रति क्विंटल तो कर दी, लेकिन अभी भी ये रेट गन्ना उत्पादन लागत से बेहद कम है। किसानों ने एफआरपी को बेहद कम बताते हुए इसे छलावा बताया है।
भाजपा ने लोकसभा चुनाव में किसानों को उनकी फसल का दाम उत्पादन लागत से डेढ़ गुणा देने की घोषणा की थी। लेकिन केंद्र सरकार ने गत पेराई सत्र 2016-17 में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में कोई वृद्धि नहीं की थी। पिछले साल भी एफआरपी 230 रुपये प्रति क्विंटल यथावत रही थी। इसका किसान संगठनों ने कड़ा विरोध करते हुए बढ़ोतरी की मांग की थी। अब केंद्र सरकार ने आगामी पेराई सत्र 2017-18 में एफआरपी में 10.87 फीसदी की वृद्धि करते हुए 255 रुपये प्रति क्विंटल घोषित की है। दो साल बाद की गई इस बढ़ोतरी को किसान संगठनों ने नाकाफी बताया है। किसान संगठनों का कहना है कि एफआरपी गन्ना उत्पादन लागत से कम है।
284 रुपये प्रति क्विंटल आंकी थी लागत
गत पेराई सत्र 2016-17 के लिए गन्ना शोध संस्थान ने गन्ना उत्पादन लागत 284 रुपये प्रति क्विंटल आंकी थी। जबकि कृषि विशेषज्ञ किसानों की रिपोर्ट में गन्ना लागत 320 रुपये तक पहुंच रही थी। प्रदेश सरकार को गन्ना लागत रिपोर्ट सौंपने वाले किसान नेता चौधरी पीतम सिंह का कहना है कि महंगाई के चलते हर साल फसल लागत बढ़ती है। इस साल यह 350 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक बैठेगी।
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प्रदेश सरकार पर बढ़ा एसएपी बढ़ोतरी का दबाव
केंद्र सरकार द्वारा गन्ना एफआरपी में 25 रुपये बढ़ोतरी करने से प्रदेश सरकार पर भी गन्ने के राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) में बढ़ोतरी करने का दबाव आ गया है। पेराई सत्र 2016-17 में एसएपी सामान्य प्रजाति का 305 रुपये और अगेती प्रजाति का 315 रुपये प्रति क्विंटल था।
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भाजपा ने लोकसभा चुनाव में किसानों को उनकी फसल का दाम उत्पादन लागत से डेढ़ गुणा देने की घोषणा की थी। लेकिन केंद्र सरकार ने गत पेराई सत्र 2016-17 में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में कोई वृद्धि नहीं की थी। पिछले साल भी एफआरपी 230 रुपये प्रति क्विंटल यथावत रही थी। इसका किसान संगठनों ने कड़ा विरोध करते हुए बढ़ोतरी की मांग की थी। अब केंद्र सरकार ने आगामी पेराई सत्र 2017-18 में एफआरपी में 10.87 फीसदी की वृद्धि करते हुए 255 रुपये प्रति क्विंटल घोषित की है। दो साल बाद की गई इस बढ़ोतरी को किसान संगठनों ने नाकाफी बताया है। किसान संगठनों का कहना है कि एफआरपी गन्ना उत्पादन लागत से कम है।
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284 रुपये प्रति क्विंटल आंकी थी लागत
गत पेराई सत्र 2016-17 के लिए गन्ना शोध संस्थान ने गन्ना उत्पादन लागत 284 रुपये प्रति क्विंटल आंकी थी। जबकि कृषि विशेषज्ञ किसानों की रिपोर्ट में गन्ना लागत 320 रुपये तक पहुंच रही थी। प्रदेश सरकार को गन्ना लागत रिपोर्ट सौंपने वाले किसान नेता चौधरी पीतम सिंह का कहना है कि महंगाई के चलते हर साल फसल लागत बढ़ती है। इस साल यह 350 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक बैठेगी।
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प्रदेश सरकार पर बढ़ा एसएपी बढ़ोतरी का दबाव
केंद्र सरकार द्वारा गन्ना एफआरपी में 25 रुपये बढ़ोतरी करने से प्रदेश सरकार पर भी गन्ने के राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) में बढ़ोतरी करने का दबाव आ गया है। पेराई सत्र 2016-17 में एसएपी सामान्य प्रजाति का 305 रुपये और अगेती प्रजाति का 315 रुपये प्रति क्विंटल था।