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Meerut News: सरकारी दफ्तरों में बिचौलियों के जरिये फैल रहा भ्रष्टाचार, कार्रवाई की तैयारी
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मेरठ। सरकारी दफ्तरों में बिचौलियों के जरिये भ्रष्टाचार फैल रहा है। तहसील, आरटीओ और नगर निगम में इनका बोलबाला है। आलम है कि अधिकारियों ने घूसखोरी के पैसे पर बाहरी लोगों को कंप्यूटर ऑपरेटर बनाकर रखा है, जो रिश्वत लेकर काम कराते हैं। बृहस्पतिवार को सहारनपुर की कार्रवाई में 19 बिचौलियों के पकड़े जाने के बाद मेरठ के सरकारी दफ्तर में खलबली मच गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद जिला प्रशासन बिचौलियों और विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी में लग गया है।
सदर, मवाना और सरधना तहसील परिसर में भी दिनभर बिचौलिये घूमते रहते हैं। इनके संबंध सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों से हैं। जिनके कहते ही अधिकारी फाइल को आगे बढ़ा देते हैं, यानि बिना जांच पड़ताल के काम हो जाता है। आरटीओ में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आम जनता को बिचौलियों के जरिये लूटा जा रहा है। इसके अलावा वाहनों की जांच में बड़ा खेल इन बिचौलियों के जरिये होना बताया जाता है। आरटीओ के अधिकारी उक्त बिचौलियों के सिफारिश पर तुरंत फाइल को आगे बढ़ा देते हैं, जबकि आम आदमी अपने लाइसेंस के लिए कई दिनों तक चक्कर काटने पड़ते हैं।
निगम के निर्माण विभाग, जलकल या अन्य विभाग में बाहरी लोगों को तनख्वाह देकर रखा हुआ है, जिनसे कंप्यूटर ऑपरेटर या अन्य काम पर रखा हुआ है। उक्त बिचौलियों की जड़े सरकारी दफ्तरों में बहुत गहरी है।
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तत्कालीन कमिश्नर ने पकड़े थे बिचौलिये, दर्ज कराया था मुकदमा
तत्कालीन कमिश्नर प्रभात कुमार ने सदर तहसील में छापा मारकर तहसील के कर्मचारियों और बिचौलियों का भंड़ाफोड़ किया था। इस मामले में देहलीगेट थाने में तहसील सदर के कई कर्मचारियों और बिचौलियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इस मामले में कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ ने डीएम कार्यालय में अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी थी। इस कार्रवाई के विरोध में प्रदेश के कई जनपदों में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। हालांकि, तहसील के कर्मचारियों की जमानत के बाद मामला हड़ताल खत्म हो गई थी।
वर्जन
सरकारी दफ्तरों में बिचौलियों की जानकारी की जाएगी। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी से बिचौलिये के संबंध मिले तो निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी। कलक्ट्रेट, तहसील, आरटीओ, नगर निगम सहित सरकारी दफ्तरों में जांच कराई जाएगी। - दीपक मीणा, डीएम
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सदर, मवाना और सरधना तहसील परिसर में भी दिनभर बिचौलिये घूमते रहते हैं। इनके संबंध सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों से हैं। जिनके कहते ही अधिकारी फाइल को आगे बढ़ा देते हैं, यानि बिना जांच पड़ताल के काम हो जाता है। आरटीओ में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आम जनता को बिचौलियों के जरिये लूटा जा रहा है। इसके अलावा वाहनों की जांच में बड़ा खेल इन बिचौलियों के जरिये होना बताया जाता है। आरटीओ के अधिकारी उक्त बिचौलियों के सिफारिश पर तुरंत फाइल को आगे बढ़ा देते हैं, जबकि आम आदमी अपने लाइसेंस के लिए कई दिनों तक चक्कर काटने पड़ते हैं।
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निगम के निर्माण विभाग, जलकल या अन्य विभाग में बाहरी लोगों को तनख्वाह देकर रखा हुआ है, जिनसे कंप्यूटर ऑपरेटर या अन्य काम पर रखा हुआ है। उक्त बिचौलियों की जड़े सरकारी दफ्तरों में बहुत गहरी है।
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तत्कालीन कमिश्नर ने पकड़े थे बिचौलिये, दर्ज कराया था मुकदमा
तत्कालीन कमिश्नर प्रभात कुमार ने सदर तहसील में छापा मारकर तहसील के कर्मचारियों और बिचौलियों का भंड़ाफोड़ किया था। इस मामले में देहलीगेट थाने में तहसील सदर के कई कर्मचारियों और बिचौलियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इस मामले में कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ ने डीएम कार्यालय में अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी थी। इस कार्रवाई के विरोध में प्रदेश के कई जनपदों में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। हालांकि, तहसील के कर्मचारियों की जमानत के बाद मामला हड़ताल खत्म हो गई थी।
वर्जन
सरकारी दफ्तरों में बिचौलियों की जानकारी की जाएगी। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी से बिचौलिये के संबंध मिले तो निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी। कलक्ट्रेट, तहसील, आरटीओ, नगर निगम सहित सरकारी दफ्तरों में जांच कराई जाएगी। - दीपक मीणा, डीएम