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Meerut News: नगर निगम में भ्रष्टाचार का नेटवर्क... 1400 रुपये दीजिए और 14 दिन में जन्म प्रमाणपत्र पाइए

Sat, 25 Apr 2026 02:32 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Apr 2026 02:32 AM IST
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Corruption rife in the municipal corporation... Pay Rs 1,400 and get a birth certificate in 14 days
नगर निगम परिसर में इन दिनों सेवा नहीं बल्कि सौदा हो रहा है। अगर आपको अपने बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र चाहिए तो सरकारी कायदे-कानून दरकिनार कर दीजिए और जेब में 1400 रुपये लेकर आइए। अमर उजाला की टीम ने लगातार पांच दिनों तक नगर निगम की खाक छानी और रिश्वतखोरों के इस नेटवर्क तक पहुंची। इस दौरान भ्रष्टाचार का ऐसा मकड़जाल सामने आया जिसमें आम जनता और क्षेत्रीय पार्षद धक्के खा रहे हैं लेकिन रिश्वत देने वालों की स्पेशल फाइल सरपट दौड़ रही है।
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हैरानी की बात यह है कि नगर निगम परिसर में ही रिश्वतखोरों ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है। एक साल से अधिक उम्र के बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवाना यहां सबसे बड़ा धंधा बन चुका है। नियमों को ताक पर रखकर माता-पिता के फोटो, आधार कार्ड और अस्पताल के कार्ड के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। दुकानदार 1400 लेता है। इसकी एवज में वह इसमें एक एफिडेविट व फॉर्म खुद भरता है। स्टिंग में यह खुलासा हुआ कि रिश्वत का यह पैसा सिर्फ एक हाथ में नहीं रहता। दुकानदार ने कैमरे के सामने कबूला कि 1400 रुपये की इस वसूली में से 400 रुपये निगम के कर्मचारियों को जाते हैं जो आगे अपने अधिकारियों तक हिस्सा पहुंचाते हैं। रोजाना करीब 50 सेटिंग वाली फाइल तहसील भेजी जाती हैं जिनका स्पेशल वेरिफिकेशन पलक झपकते ही हो जाता है। जबकि रूटीन प्रक्रिया में वालीं फाइलें कई-कई महीनों तक निगम और तहसील में धूल फांकती रहती हैं।
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जब रिपोर्टर ने खुद किया सौदा

सीन 1: निगम कार्यालय (दोपहर का वक्त)

रिपोर्टर : मेरा तीन साल का बेटा है, स्कूल में एडमिशन कराना है। उसका जन्म प्रमाण पत्र बना दीजिए।

नगर निगम : आप गंगानगर के निवासी है, वहां पर निगम का कार्यालय है। वहीं से जन्म प्रमाण पत्र बनेगा।

रिपोर्टर : बच्चे के एडमिशन में लगना है, देख लीजिए, यह तो निगम का हेड ऑफिस है। यहां से बनवा दीजिए।

नगर निगम : समझ में नहीं आता, कितनी बार बताना पड़ेगा की निगम में जोनल व्यवस्था बनी हुई हुई है। यहां नहीं बनेगा

रिपोर्टर : कितने दिन में बन जाता है।

नगर निगम : कुछ खर्च कर लो... नीचे दुकान वालों से संपर्क करो, काम हो जाएगा। कम से कम दो महीने लगेंगे प्रमाण पत्र बनवाने में





(निगम में दुकानदार से बातचीत का कुछ अंश)

सीन 2: निगम परिसर में दुकान

रिपोर्टर : मेरे बेटे का जन्म प्रमाण पत्र बनवा दीजिए

दुकानदार : बन जाएगा, 1400 रुपये लगेंगे

रिपोर्टर : कितने दिन में बन जाएगा और क्या-क्या चाहिए

दुकानदार : 14 दिन में दे देंगे। माता-पिता के फोटो, आधार कार्ड और जिस अस्पताल में बच्चे ने जन्म दिया, वहां का कार्ड।

रिपोर्टर : यह तो निगम मुफ्त में बना है। कुछ पैसे कम कर लीजिए, एक हजार में बना दीजिए। 500 रुपये एडवांस में दिए।

दुकानदार : नहीं होगा, यह पैसा निगम से तहसील तक देना पड़ता है। पैसे पूरे ही देने होंगे, बनने के बाद 1000 दे देना।



शाम 5 बजे के बाद शुरू होता है असली खेल

जांच में सामने आया कि जब शाम 5 बजे आम जनता और पार्षद अपने घरों को लौट जाते हैं तब निगम के कमरों में सेटिंग वाली फाइलों का अंबार लगता है। भ्रष्टाचार का गठजोड़ इतना मजबूत है कि बिना किसी गहन दस्तावेज जांच के इन फाइलों को स्पेशल कैटेगरी में डालकर तुरंत पास कर दिया जाता है।
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पार्षदों की लाचारी, जनता की बर्बादी

जहां एक ओर रिश्वत देकर 14 दिन में काम हो रहा है वहीं दूसरी ओर ईमानदार जनता 6-6 महीने से खिड़कियों के चक्कर काट रही है। स्थिति इतनी दयनीय है कि क्षेत्रीय पार्षदों तक को अपने वार्ड के लोगों के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता है और कर्मचारियों के आगे मिन्नतें करनी पड़ती हैं। नगर निगम में सिर्फ जन्म प्रमाण पत्र ही नहीं बल्कि मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम पर भी इसी तरह का बड़ा खेल खेला जा रहा है।


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निगम द्वारा जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र मुफ्त में जारी कराए जाते है। प्रमाणपत्र के आवेदन करने वालों से अगर कोई भी रिश्वत ले रहा है तो थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। निगम के कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। निगम परिसर में भ्रष्टाचार करने वाले लोगों से निगम अपनी दुकान भी खाली कराएगा। - सौरभ गंगवार, नगर आयुक्त
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