चीन से लौटे युवकों ने सुनाई आपबीती, बोले- हमने देखा वो मंजर, आप सबक लें और घर में ही रहें
अमर उजाला ने चीन से लौटकर आए लोगों से बात की और उनके अनुभव और आप बीती आपसे साझा कर रहे हैं, ताकि आप भी इस गंभीरता को समझें और घर में ही रहें।
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चीन के वुहान प्रांत से कोरोना वायरस दुनिया भर में फैला। इस दौरान वहां कैसा माहौल था, किस तरह के उपाय किए गए, वहां के लोगों का रवैया कैसा था, इस पर अमर उजाला ने चीन से लौटकर आए लोगों से बात की और उनके अनुभव और आप बीती आपसे साझा कर रहे हैं, ताकि आप भी इस गंभीरता को समझें और घर में ही रहें। इन सभी का यही कहना है कि सरकार ने सही समय पर लॉकडाउन कर दिया है, लेकिन लोग इसकी गंभीरता नहीं समझ रहे हैं।
भारत जैसा कदम चीन उठा लेता तो यह नौबत ना आती
शामली के कुडाना गांव के कई युवक चीन के शहर वुहान में योग का ज्ञान बांट रहे हैं। वहां से लौटे कुलदीप मलिक ने बताया कि वुहान में एक दिसंबर से ही कोरोना वायरस की शुरुआत हुई। 18 जनवरी तक तो उन्होंने भी योग क्लासेस की, लेकिन जब वहां मौतों का सिलसिला बढ़ गया तो 22 जनवरी को वहां लॉकडाउन की घोषणा की गई। सब मुश्किल में फंस गए घर में खाने को ज्यादा सामान नहीं था, जो बचा था दिन में थोड़ा बहुत खा कर पूरा दिन गुजारते थे। मन में इतना डर बैठ गया कि घर में भी मास्क लगाकर रहने लगे। यदि चीन सरकार भी भारत की तरह पहले ही लॉकडाउन का कदम उठा लेती तो ऐसी नौबत ना आती। चीन से आए कुडाना के विकास ने कहा कि हमारे देश की सरकार ने चीन से पहले लॉकडाउन का सही और सटीक निर्णय लिया है।
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बचाव और एकांत ही कोरोना का उपचार
मुजफ्फरनगर में कस्बा शाहपुर के मोहल्ला रामनगर निवासी जमाल सैय्यद चीन में एमबीबीएस कर रहे है, उनका कहना है कि बचाव और एकांत ही कोरोना वायरस का उपचार है। सोशल डिस्टेंस और घरों में रहकर ही इस महामारी से बचा जा सकता है। पीएम मोदी ने सही समय पर उचित कदम उठाया है। दो फरवरी को वह कस्बे में पहुंचे हैं, जबकि पूरे चीन में पांच फरवरी को लॉकडाउन किया गया।
यूएएस में रहने वालों को सता रही वतन की चिंता
अमेरिका में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लॉकडाउन के निर्णय की सराहना हो रही है। जिला बार संघ के पूर्व अध्यक्ष अनिल जिंदल का बेटा मिलिंद जिंदल परिवार के साथ वाशिंगटन के सिएटल में हैं। वहां मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते हैं। उनका कहना है कि दो मार्च से 18 मई तक लॉकडाउन है। घर में रहकर इस महामारी से बच सकता है। कस्बे के महाब्राह्म्मणान निवासी सतीश चंद के बेटे वैभव को जॉर्गिया स्टेट के अटलांटा में करीब एक दशक से निजी कंपनी में जॉब पर हैं। हालांकि वहां के हालत अभी खराब नहीं है, लेकिन लॉकडाउन में घर से ही काम कर रहे हैं।
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