कोरोना के साइड इफेक्ट: संक्रमण को हराया लेकिन घर कर गईं कई बीमारियां, मन में बैठा डर
कोविड 19 संक्रमण से तो लोग जीतकर घर लौट रहे हैं लेकिन ठीक होने के बाद उन्हें कई अन्य बीमारियां घेर ले रही हैं। इस संक्रमण से ठीक होने के बाद शरीर के कई दूसरे अंगों पर भी पड़ रहा है।
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कोविड-19 बीमारी में दिल, दिमाग, मांसपेशियां, धमनियां और नसों, खून, आंखें जैसे शरीर के कई दूसरे अंग पर भी असर पड़ रहा है। यही वजह है कि हार्ट अटैक, डिप्रेशन, थकान, बदन दर्द, ब्लड क्लॉटिंग और ब्लैक फंगस जैसी दिक़्क़तों का सामना लोग कर रहे हैं।
सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी शरीर के दूसरे अंगों में होने वाले बदलाव को नजरअंदाज न करें। कमजोरी, एक साथ ज्यादा काम करने पर थकान, भूख न लगना, नींद बहुत आना, या बिल्कुल न आना, शरीर में दर्द, शरीर का हल्का गरम रहना और घबराहट, ये कुछ ऐसे लक्षण है जो मरीजों में आम तौर पर देखने को मिल रहे हैं। रिकवरी के दौरान खाने-पीने का विशेष ख्याल रखें। प्रोटीन और हरी सब्जियां ज्यादा मात्रा में लें।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया कि नियमित योग और प्राणायाम करें। गरम या गुनगुना पानी ही पीएं। दिन में दो बार भाप जरूर लें। 8-10 घंटे की नींद लें और आराम करें।
डायबिटीज रोगियों के लिए कोविड-19 को बेहद खतरनाक माना जाता है। ये वायरस पैंक्रियाज जैसे शरीर के प्रमुख अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है और इंसुनिल रेगुलेशन को बाधित कर सकता है। इसलिए बीमारी से जूझ रहे लोगों को नियमित रूप से ब्लड शुगर लेवल की जांच करनी चाहिए।
केस स्टडी-1 मैं बचूंगा नहीं, कोरोना मार डालेगा
एक मसाला कारोबारी ने काउंसलर को फोन कर बताया कि मुझे कोरोना हुआ था, रिपोर्ट निगेटिव आ गई है। लेकिन अभी कमजोरी है। लग रहा है मैं बचूंगा नहीं, कोरोना मुझे मार डालेगा। घंटों की काउंसिलिंग के बाद वह सामान्य हुए।
केस स्टडी-2 हमारे पर तो अंतिम संस्कार के भी पैसे नहीं
हेल्पलाइन पर फोन आया कि हम चार बहनें हैं। किसी की शादी नहीं हुई है। पिता का कारोबार कोरोना में खत्म हो गया। अब अगर मर जाएं तो अंतिम संस्कार तक के पैसे नहीं हैं। सबको डिप्रेशन हो रहा है, क्या करें। इनकी काउंसिलिंग चल रही है।
केस स्टडी-3
एक कॉलर ने बताया कि मेरे कभी डिप्रेशन के लक्षण ज्यादा हो जाते हैं और कभी कम। मुझे पता नहीं चलता कि आगे क्या करना है। सबसे ज्यादा मौतें 45 साल से अधिक उम्र के लोगों की हुई हैं। इसलिए कई बार सब कुछ ठप सा हो जाता है। मेरी उम्र 55 साल है। मन में नकारात्मक बातें ही आती हैं।
सावधानी बन रही सनक
ओसीडी यानी ऑब्सेसिव कंपिल्सव डिसऑर्डर, यह एक तरह की सनक है जो डिप्रेशन का कारण बन सकती है। इस अवस्था में मरीज एक ही काम को बार-बार करता है। जैसे बार-बार हाथ धोना, बार-बार नहाना, गेट बंद होने पर भी खुले होने की आशंका, उसे बार बार चेक करना, साफ होने पर भी गंदगी महसूस करना आदि। कोरोना काल से पहले भी लोगों को यह परेशानी होती थी। सावधानी बहुत जरूरी है, लेकिन सावधानी सनक का रूप ले ले यह गलत है। - डॉ. विभा नागर, क्लिनिकल साइक्लोजिस्ट, नेशनल मेंटल हेल्थ क्राइसिस हेल्पलाइन
एंग्जाइटी डिसऑर्डर के मरीज ज्यादा
जो जीवन में आए इस परिवर्तन को समझ नहीं रहे, उसे स्वीकार नहीं कर रहे। ऐसे लोग एंग्जाइटी डिसऑर्डर के शिकार हो रहे हैं। यह परेशानी का सबब बन रहा है। - डॉ. रवि राणा, मनोचिकित्सक
ऐसे करें तनाव दूर
- अच्छा खाएं, नींद पूरी लें, कसरत करें
- अपने प्रियजनों के संपर्क में रहें और जितना संभव हो सके अपने आपको व्यस्त रखें
- तनाव को दूर करने के लिए धूम्रपान, शराब या ड्रग्स का सेवन न करें
- खुद को समझाएं कि आप अकेले नहीं है जिस पर ये परेशानी आई है