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कोरोना संक्रमित डॉक्टर दंपती ने लगवाया एंटीबॉडी कॉकटेल इंजेक्शन
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कोरोना संक्रमित डॉक्टर दंपती ने लगवाया एंटीबॉडी कॉकटेल इंजेक्शन
मेरठ। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लगने के बाद चर्चा में आया मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल इंजेक्शन रविवार को न्यूटिमा अस्पताल में एक डॉक्टर दंपती को लगाया गया है। प्रदेश में यह इंजेक्शन पहली बार किसी मरीज को लगाया गया है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
मेरठ निवासी 52 वर्षीय कोरोना संक्रमित एक चिकित्सक और उनकी पत्नी को मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल का इंजेक्शन लगाया गया। न्यूटिमा के एमडी डॉ. संदीप गर्ग ने बताया कि डॉक्टर मरीज के भाई का कोरोना से निधन हुआ है। ऐसे में जब इन्हें संक्रमण हुआ तो इन्होंने यह डोज लिया। इस डोज की कीमत एक लाख 20 हजार रुपये है। इंजेक्शन लगवाने के दो घंटे के बाद डॉक्टर दंपती घर चले गए। इंजेक्शन लेने वाले दंपती अपना नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते हैं।
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच इन दिनों मोनोक्लोनल एंटीबॉडी या एंटीबॉडी कॉकटेल दवा की चर्चा चल रही है। विशेषज्ञों का दावा है कि इस दवा के इस्तेमाल के बाद कोविड-19 वायरस के म्यूटेशन की संभावना नहीं रह जाती है। हालांकि आने वाले वक्त में ही पता चलेगा कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवा कोविड और उसके वैरिएंट्स के खिलाफ कितनी प्रभावी है।
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इंजेक्शन में दो दवाओं का मिश्रण
मोनोक्नोल एंटीबॉडी दवा दो दवाओं का मिश्रण है। इसलिए इसे एंटीबॉडी कॉकटेल दवा भी कहा जाता है। इसे दो दवाओं कासिरिविमाब और इम्देवीमाब के 600-600 एमजी की डोज मिलाकर तैयार किया जाता है। किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडी जरूरी होती है। एंटीबॉडी प्रोटीन होते हैं, जो किसी भी बीमारी से शरीर बचाते हैं। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को किसी खास बीमारी से लड़ने के लिए लैब में तैयार किया जाता है। ये दवा शरीर में कोरोना वायरस को फैलने से रोकती है।
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मेरठ। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लगने के बाद चर्चा में आया मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल इंजेक्शन रविवार को न्यूटिमा अस्पताल में एक डॉक्टर दंपती को लगाया गया है। प्रदेश में यह इंजेक्शन पहली बार किसी मरीज को लगाया गया है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
मेरठ निवासी 52 वर्षीय कोरोना संक्रमित एक चिकित्सक और उनकी पत्नी को मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल का इंजेक्शन लगाया गया। न्यूटिमा के एमडी डॉ. संदीप गर्ग ने बताया कि डॉक्टर मरीज के भाई का कोरोना से निधन हुआ है। ऐसे में जब इन्हें संक्रमण हुआ तो इन्होंने यह डोज लिया। इस डोज की कीमत एक लाख 20 हजार रुपये है। इंजेक्शन लगवाने के दो घंटे के बाद डॉक्टर दंपती घर चले गए। इंजेक्शन लेने वाले दंपती अपना नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते हैं।
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कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच इन दिनों मोनोक्लोनल एंटीबॉडी या एंटीबॉडी कॉकटेल दवा की चर्चा चल रही है। विशेषज्ञों का दावा है कि इस दवा के इस्तेमाल के बाद कोविड-19 वायरस के म्यूटेशन की संभावना नहीं रह जाती है। हालांकि आने वाले वक्त में ही पता चलेगा कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवा कोविड और उसके वैरिएंट्स के खिलाफ कितनी प्रभावी है।
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इंजेक्शन में दो दवाओं का मिश्रण
मोनोक्नोल एंटीबॉडी दवा दो दवाओं का मिश्रण है। इसलिए इसे एंटीबॉडी कॉकटेल दवा भी कहा जाता है। इसे दो दवाओं कासिरिविमाब और इम्देवीमाब के 600-600 एमजी की डोज मिलाकर तैयार किया जाता है। किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडी जरूरी होती है। एंटीबॉडी प्रोटीन होते हैं, जो किसी भी बीमारी से शरीर बचाते हैं। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को किसी खास बीमारी से लड़ने के लिए लैब में तैयार किया जाता है। ये दवा शरीर में कोरोना वायरस को फैलने से रोकती है।