फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Corona continues to dominate life even after defeating

हारने के बाद भी जिंदगी पर भारी पड़ रहा कोरोना

Sun, 13 Dec 2020 02:11 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Dec 2020 02:11 AM IST
विज्ञापन
Corona continues to dominate life even after defeating
हराने के बाद भी जिंदगी पर भारी पड़ रहा कोरोना
विज्ञापन

मेरठ। आंकड़ों में कोरोना का हमला पिछले कुछ दिनों से कम जरूर हुआ है, लेकिन हराने के बाद भी यह जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। दरअसल कोरोना को हराने वाले लोगों की भी मौत हो रही है। यह वायरस मरीज के दिल, फेफड़े और गुर्दों को बेकार कर रहा है। रिकवरी के बाद भी शरीर में कई दिक्कतें आ रही हैं। इसकी वजह से लोगों की मौत भी हो रही है। हालांकि ऐसे मरीजों की मौत का कोई आंकड़ा नहीं है।
मेडिकल के कोविड अस्पताल के प्रभारी डॉ. सुधीर राठी ने बताया कि कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा प्रभाव फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर पड़ता है। कई बार सामान्य एक्सरे में कोरोना का ज्यादा असर पता नहीं चल पाता। कोरोना से रिकवर होने के बाद यह फेफड़ों पर सफेद निशान छोड़ देता है। इसकी वजह से कुछ मरीजों के फेफड़े सिकुड़ जाते हैं। लचीलापन खत्म हो जाता है। कार्यक्षमता प्रभावित हो जाती है। मरीज के ठीक होने के बाद भी उसमें एक्यूट रेसपेरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम पैदा हो जाता है। लेवल थ्री के मरीजों में इसकी स्थिति गंभीर होती है। काफी इलाज के बाद भी मरीज की मौत हो जाती है।
विज्ञापन

ये हो रहीं दिक्कत
कोविड अस्पताल के सह प्रभारी डॉ. धीरज बालियान ने बताया कि कोरोना वायरस से रिकवर होने वाले मरीजों को सांस लेने में दिक्कत के साथ सांस फूलना, खांसी, दिल पर दबाव बढ़ना, सीने में चुभन जैसी समस्याएं काफी देखने में आ रही हैं। जल्दी सांस फूल जाना, हाथों-पैरों में दर्द भी कोरोना विजेताओं को दिक्कत दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

------------
ऐसे मरीजों का नहीं है कोई आंकड़ा
जिला सर्विलांस अधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि कोरोना को हराने के बाद भी कितने मरीजों की मौत हुई है। इसका कोई अलग से आंकड़ा नहीं है। इस साल 27 मार्च को मेरठ में पहला कोरोना मामला सामने आने का बाद से अब तक कुल 382 मरीजों की मौत कोरोना के इलाज के दौरान हुई है।
------------
केस-1
लिसाड़ी गेट क्षेत्र की 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला कोरोना संक्रमित होने के बाद उपचार से ठीक हो गई थीं। मेडिकल कॉलेज में लोगों ने उनका फूल मालाओं से स्वागत किया था, लेकिन दो दिन बाद ही उनकी मौत हो गई थी। उनके फेफड़ों में खतरनाक निमोनिया और एक्यूट रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम हो गया था।
केस-2
दौराला क्षेत्र के 70 साल के व्यक्ति को कोरोना वायरस का संक्रमण हुआ था। करीब 10 दिन अस्पताल में रहने के बाद वह ठीक हो गए थे। उनकी कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी, लेकिन अगले ही दिन उनकी मौत हो गई। उनके गुर्दों में संक्रमण था।

केस-3
50 साल के एक मरीज को कोरोना की पुष्टि हुई थी। करीब 15 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद इनका कोरोना संक्रमण ठीक हो गया था, लेकिन इसकी वजह से फेफड़ों में निमोनिया हो गया। एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम की वजह से उनकी मौत हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed