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कूलर और एसी का पानी बना रहा बीमार
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sun, 11 Sep 2016 02:45 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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जिन घरों में कूलर और एसी का इस्तेमाल किया जा रहा है, वहां एडिस मच्छर अपने पैर पसार रहा है। मेडिकल कॉलेज समेत शहर की तीन बड़ी कॉलोनियों में भेजी गई टीमों की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इन कॉलोनियों में ही सबसे पहले डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज सामने आए थे। वहीं माछरा और परीक्षितगढ़ ब्लॉक के गांवों में भी एडिस की भरमार है। जिसके चलते चिकनगुनिया और डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।
डेंगू और चिकनगुनिया की पुष्टि होने के बाद मलेरिया विभाग संबंधित व्यक्ति के घर पर टीम भेजकर सैंपल लेने के साथ ही कीटनाशक का छिड़काव करता है। मेडिकल कॉलेज कैंपस सहित जागृति विहार, शास्त्री नगर और अजंता कालोनी में भेजी गई टीमों की रिपोर्ट से साफ हुआ है कि एडिस मच्छर का लार्वा कूलर या फिर एसी से निकलने वाले पानी के अंदर मिला। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत का कहना है कि जिन घरों में डेंगू और चिकनगुनिया के केस सामने आए हैं, वहां लोगों ने अपने कूलर से पानी खाली नहीं किया और एसी से निकलने वाला पानी घर में ही एक जगह पर एकत्र होता रहा है। इसके अलावा ऐसे घरों में गमलों के अंदर भरे गए पानी के अंदर भी लार्वा पाया गया।
चिकनगुनिया ने तोड़ी कमर
वायरल बुखार और डेंगू के साथ अब चिकनगुनिया के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। शनिवार को डेंगू के दो नए मामले सामने आए, जिसके बाद जिले में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या 58 हो गई है। वहीं चिकनगुनिया के 20 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद जिले में चिकनुनिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़कर 130 हो गई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग महज कैंपों तक सिमटा है।
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जागृति विहार के चार सेक्टर में सबसे ज्यादा मामले
मेरठ। जागृति बिहार और मेडिकल कॉलेज कैंपस में सबसे ज्यादा लोग एडिस मच्छर के शिकार हुए हैं। जिला मलेरिया विभाग के अनुसार अभी तक डेंगू और चिकनगुनिया के 53 मामले इसी क्षेत्र से दर्ज किए गए हैं। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत ने बताया है कि जागृति विहार के सेक्टर सात में 10, आठ में 6 मामले डेंगू और चिकनगुनिया के सामने आए हैं। सेक्टर चार और दो में भी नौ मामले आए हैं। उधर, मेडिकल कालेज कैंपस में अब तक 13 मामले आए हैं, जिनमें से 11 चिकनगुनिया के ही हैं। इसके अलावा क्षेत्र में और भी कई केस सामने आए हैं।
जलभराव असली वजह
मलेरिया विभाग का मानना है कि सेक्टर सात और आठ में काफी डेयरी हैं। जहां पर पशुओं को नहलाने के लिए हर रोज हजारों लीटर पानी का इस्तेमाल होता है। इसमें डेयरी संचालक बड़ी संख्या में पानी हौज या ड्रम में भरकर भी रखते हैं, जो एडिस मच्छर के पनपने के लिए सबसे माकूल जगह है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में आवासी क्षेत्र के अंदर टंकी से हजारों लीटर पानी निकलता है, जो नीचे भरा रहता है। जिला मलेरिया अधिकारी का कहना है कि इस पानी से लार्वा भी मिला है॥ जिससे पुष्टि होती है कि यहां पर एडिस मच्छर बड़ी संख्या में पनप रहा है।
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डेंगू और चिकनगुनिया की पुष्टि होने के बाद मलेरिया विभाग संबंधित व्यक्ति के घर पर टीम भेजकर सैंपल लेने के साथ ही कीटनाशक का छिड़काव करता है। मेडिकल कॉलेज कैंपस सहित जागृति विहार, शास्त्री नगर और अजंता कालोनी में भेजी गई टीमों की रिपोर्ट से साफ हुआ है कि एडिस मच्छर का लार्वा कूलर या फिर एसी से निकलने वाले पानी के अंदर मिला। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत का कहना है कि जिन घरों में डेंगू और चिकनगुनिया के केस सामने आए हैं, वहां लोगों ने अपने कूलर से पानी खाली नहीं किया और एसी से निकलने वाला पानी घर में ही एक जगह पर एकत्र होता रहा है। इसके अलावा ऐसे घरों में गमलों के अंदर भरे गए पानी के अंदर भी लार्वा पाया गया।
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चिकनगुनिया ने तोड़ी कमर
वायरल बुखार और डेंगू के साथ अब चिकनगुनिया के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। शनिवार को डेंगू के दो नए मामले सामने आए, जिसके बाद जिले में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या 58 हो गई है। वहीं चिकनगुनिया के 20 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद जिले में चिकनुनिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़कर 130 हो गई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग महज कैंपों तक सिमटा है।
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जागृति विहार के चार सेक्टर में सबसे ज्यादा मामले
मेरठ। जागृति बिहार और मेडिकल कॉलेज कैंपस में सबसे ज्यादा लोग एडिस मच्छर के शिकार हुए हैं। जिला मलेरिया विभाग के अनुसार अभी तक डेंगू और चिकनगुनिया के 53 मामले इसी क्षेत्र से दर्ज किए गए हैं। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत ने बताया है कि जागृति विहार के सेक्टर सात में 10, आठ में 6 मामले डेंगू और चिकनगुनिया के सामने आए हैं। सेक्टर चार और दो में भी नौ मामले आए हैं। उधर, मेडिकल कालेज कैंपस में अब तक 13 मामले आए हैं, जिनमें से 11 चिकनगुनिया के ही हैं। इसके अलावा क्षेत्र में और भी कई केस सामने आए हैं।
जलभराव असली वजह
मलेरिया विभाग का मानना है कि सेक्टर सात और आठ में काफी डेयरी हैं। जहां पर पशुओं को नहलाने के लिए हर रोज हजारों लीटर पानी का इस्तेमाल होता है। इसमें डेयरी संचालक बड़ी संख्या में पानी हौज या ड्रम में भरकर भी रखते हैं, जो एडिस मच्छर के पनपने के लिए सबसे माकूल जगह है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में आवासी क्षेत्र के अंदर टंकी से हजारों लीटर पानी निकलता है, जो नीचे भरा रहता है। जिला मलेरिया अधिकारी का कहना है कि इस पानी से लार्वा भी मिला है॥ जिससे पुष्टि होती है कि यहां पर एडिस मच्छर बड़ी संख्या में पनप रहा है।