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Meerut News: कांवड़ में बेटियों को बैठाकर दिया संदेश
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दौराला - दादरी गांव से अपनी भांजी को कांवड़ में बैठाकर गुजरता संजू। स्रोत: संवाद
- बोले- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ तभी बनेगा सशक्त समाज
संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला। शिवभक्ति और सामाजिक संदेश का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला, जब अलीगढ़ निवासी संजू अपनी पत्नी बीना, बेटी राधिका 8 वर्ष और भांजी देवांशी 10 वर्ष के साथ कांवड़ यात्रा करते हुए दौराला क्षेत्र के दादरी गांव पहुंचे। ग्रामीणों ने परिवार का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उनकी अनोखी पहल की सराहना की।
संजू ने बताया कि वह 22 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल लेकर रवाना हुए थे। उनकी कांवड़ के एक ओर गंगाजल से भरा कलश है, जबकि दूसरी ओर भांजी देवांशी बैठी हैं। इसी प्रकार उनकी पत्नी बीना की कांवड़ के एक ओर कलश और दूसरी ओर बेटी राधिका बैठी हैं। पूरे मार्ग में यह दृश्य श्रद्धालुओं और राहगीरों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। संजू ने बताया कि उनकी इस अनूठी कांवड़ यात्रा का उद्देश्य केवल भगवान शिव की आराधना करना नहीं, बल्कि समाज को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश देना भी है।
उन्होंने कहा कि आज भी समाज में कई लोग बेटियों को बोझ समझते हैं और जन्म से पहले ही उन्हें गर्भ में मार देते हैं। ऐसी मानसिकता बदलने की जरूरत है। बेटियां परिवार, समाज और देश का भविष्य हैं, इसलिए उन्हें समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने राजस्थान की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटियों पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे मामलों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने वाला सख्त कानून बने।
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दादरी गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने परिवार का स्वागत किया और उनकी सामाजिक सोच की प्रशंसा करते हुए कहा कि धार्मिक यात्राओं के माध्यम से यदि ऐसे सकारात्मक संदेश समाज तक पहुंचें तो लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और बेटियों के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला। शिवभक्ति और सामाजिक संदेश का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला, जब अलीगढ़ निवासी संजू अपनी पत्नी बीना, बेटी राधिका 8 वर्ष और भांजी देवांशी 10 वर्ष के साथ कांवड़ यात्रा करते हुए दौराला क्षेत्र के दादरी गांव पहुंचे। ग्रामीणों ने परिवार का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उनकी अनोखी पहल की सराहना की।
संजू ने बताया कि वह 22 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल लेकर रवाना हुए थे। उनकी कांवड़ के एक ओर गंगाजल से भरा कलश है, जबकि दूसरी ओर भांजी देवांशी बैठी हैं। इसी प्रकार उनकी पत्नी बीना की कांवड़ के एक ओर कलश और दूसरी ओर बेटी राधिका बैठी हैं। पूरे मार्ग में यह दृश्य श्रद्धालुओं और राहगीरों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। संजू ने बताया कि उनकी इस अनूठी कांवड़ यात्रा का उद्देश्य केवल भगवान शिव की आराधना करना नहीं, बल्कि समाज को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश देना भी है।
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उन्होंने कहा कि आज भी समाज में कई लोग बेटियों को बोझ समझते हैं और जन्म से पहले ही उन्हें गर्भ में मार देते हैं। ऐसी मानसिकता बदलने की जरूरत है। बेटियां परिवार, समाज और देश का भविष्य हैं, इसलिए उन्हें समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने राजस्थान की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटियों पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे मामलों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने वाला सख्त कानून बने।
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दादरी गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने परिवार का स्वागत किया और उनकी सामाजिक सोच की प्रशंसा करते हुए कहा कि धार्मिक यात्राओं के माध्यम से यदि ऐसे सकारात्मक संदेश समाज तक पहुंचें तो लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और बेटियों के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होगी।

दौराला - दादरी गांव से अपनी भांजी को कांवड़ में बैठाकर गुजरता संजू। स्रोत: संवाद