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सरंक्षण के दावे फेल: बजट के अभाव में भरपेट चारे को तरस रहे गोवंश, कीचड़ में तड़पकर तोड़ रहे दम
Wed, 06 Jan 2021 04:48 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Wed, 06 Jan 2021 04:48 PM IST
सार
- अस्थाई गोशालाओं में गोवंश के संरक्षण के लिए नहीं पर्याप्त उपाय
- बाबरी गोशाला में कीचड़ में मरणासन्न पड़े हैं गोवंश
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गौशाला, शामली में गौशाला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश की गोशालाओं में गोवंश के सरंक्षण के दावे फेल हो रहे हैं। बजट की कमी के चलते गोवंशों की अनदेखी की जा रही है। गोवंशों को खाने के लिए सूखा भूसा दिया जा रहा है। गोशालाओं की हालत दयनीय है। भरपेट चारा नहीं मिलने से पशु असमय दम तोड़ जाते हैं। क्षेत्र में 198 गोवंशों को भरपेट चारा नहीं मिल रहा। अमर उजाला ने मुजफ्फरनगर और शामली जनपदों में गोशालाओं का रुख किया तो जमीनी हकीकत सामने आई: -
मुजफ्फरनगर के चरथावल थानेक्षेत्र के कसौली गांव की गोशाला में सुविधाओं का अभाव है। फिलहाल 65 गोवंश हैं। ग्रामीण मुकेश कुमार कहते हैं कि गोवंश के लिए गोशाला में कोई सुविधा नहीं है। भरपेट भोजन के अभाव में पशु दम तोड़ देते हैं। किसान अशोक कुमार कहते हैं कि पशुओं को शासन से मिलने वाला बजट नाकाफी है। युवक शेखर का कहना है बारिश में पशु बाहर बंधे है। ठंड से बचाव को कुछ पशुओं को बोरे दिए गए हैं।
उनके फटने के बाद बचाव की कोई व्यवस्था नहीं है। मास्टर मामचंद पुंडीर बताते हैं कि पशुओं की भूख भूसे पर टिकी है। वहीं, बधाई कलां में करोड़ों रुपये से बनी वृहद गोशाला की तस्वीर भी जुदा नहीं है। यहां 85 पशु हैं। मलिक पिंकी बताते हैं यहां कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलता। गोवंश की दुर्गति आम है। चरथावल नगर पंचायत गोशाला में 50 पशु हैं। बजट के अभाव में गोवंश पशुओं को दिक्कत है।
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यह भी पढ़ें: Weather: भीषण ठंड की चपेट में पश्चिमी यूपी, मेरठ समेत कई जिलों में तेज बारिश, अब कोहरा बनेगा मुसीबत
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मुजफ्फरनगर के चरथावल थानेक्षेत्र के कसौली गांव की गोशाला में सुविधाओं का अभाव है। फिलहाल 65 गोवंश हैं। ग्रामीण मुकेश कुमार कहते हैं कि गोवंश के लिए गोशाला में कोई सुविधा नहीं है। भरपेट भोजन के अभाव में पशु दम तोड़ देते हैं। किसान अशोक कुमार कहते हैं कि पशुओं को शासन से मिलने वाला बजट नाकाफी है। युवक शेखर का कहना है बारिश में पशु बाहर बंधे है। ठंड से बचाव को कुछ पशुओं को बोरे दिए गए हैं।
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उनके फटने के बाद बचाव की कोई व्यवस्था नहीं है। मास्टर मामचंद पुंडीर बताते हैं कि पशुओं की भूख भूसे पर टिकी है। वहीं, बधाई कलां में करोड़ों रुपये से बनी वृहद गोशाला की तस्वीर भी जुदा नहीं है। यहां 85 पशु हैं। मलिक पिंकी बताते हैं यहां कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलता। गोवंश की दुर्गति आम है। चरथावल नगर पंचायत गोशाला में 50 पशु हैं। बजट के अभाव में गोवंश पशुओं को दिक्कत है।
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इस संबंध में एडीओ पंचायत राजेंद्र कुमार का कहना है कि भूसे के अलावा हरे चारे का भी समय से प्रबंध कराते हैं। ठंड से बचने के लिए बोरी के कवर दिए गए हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अमरदीप सिंह ने बताया यह मौसम बीमारी से बचाव का सबसे अच्छा माना जाता है। गोशालाओं में सभी का टीकाकरण करा दिया था। आहार की व्यवस्था शासन द्वारा दी जा रही राशि से विकास खंड स्तर से की जा रही है।
खेड़ी में ठंड से पशुओं को बचाने के नहीं किए गए उपाय
बुढ़ाना के फतेहपुर खेड़ी गांव की गोशाला की व्यवस्था चिंताजनक है। गोशाला में मौजूद गोवंश को ठंड से बचाने के उचित उपाय नहीं किए गए है। गोशाला में एक गाय बीमार है। बीमार गाय को ठंड से बचाने के लिए भी उचित संसाधन नहीं है। गोशाला में 20 गोवंश रखे जाने की व्यवस्था है। वर्तमान में गोशाला में नौ गोवंश हैं।
मीरापुर में सड़कों पर घूम रहे गोवंश
मीरापुर कस्बे में पशु चिकित्सालय के बराबर में बन रही गोशाला का निर्माण कई माह बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। इस कारण कई गोवंश कड़ाके की सर्दी में भी बेसहारा हालत में इधर-उधर घूम रहे हैं। नगर पंचायत द्वारा पानी की टंकी के पास करीब 40 गोवंशों को ही ठिकाना मिला हुआ है। किंतु बेसहारा घूम रहे गोवंशों पर उनकी नजर नहीं पड़ रही है। चेयरमैन तंजीला कुरैशी का कहना है कि ईओ का पद खाली चलने के कारण इस कार्य में देरी हुई है।
भोपा में हरा चारा नहीं मिल रहा
भोपा कस्बा स्थित गोशाला की अव्यवस्था गोवंश पर भारी पड़ रही है। यहां पशुओं के चारा काटने की मशीन खराब पड़ी है। साथ ही विद्युत कनेक्शन नहीं होने से विद्युत व्यवस्था भी नहीं है। पानी के लिए भी पानी का हौज हाथों से नल चलाकर भरना पड़ता है। यहां पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी खराब पड़े हैं। व्यवस्था में लगे कर्मचारी ने बताया कि गोवंश को भूसा खिलाया जा रहा है। इस समय 15 गोवंश गोशाला में मौजूद है।
यह भी पढ़ें: यूपी: अपराधियों ने बदले अपराध करने के तौर-तरीके, वारदात खोलने में छूट रहे पुलिस के पसीने
खेड़ी में ठंड से पशुओं को बचाने के नहीं किए गए उपाय
बुढ़ाना के फतेहपुर खेड़ी गांव की गोशाला की व्यवस्था चिंताजनक है। गोशाला में मौजूद गोवंश को ठंड से बचाने के उचित उपाय नहीं किए गए है। गोशाला में एक गाय बीमार है। बीमार गाय को ठंड से बचाने के लिए भी उचित संसाधन नहीं है। गोशाला में 20 गोवंश रखे जाने की व्यवस्था है। वर्तमान में गोशाला में नौ गोवंश हैं।
मीरापुर में सड़कों पर घूम रहे गोवंश
मीरापुर कस्बे में पशु चिकित्सालय के बराबर में बन रही गोशाला का निर्माण कई माह बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। इस कारण कई गोवंश कड़ाके की सर्दी में भी बेसहारा हालत में इधर-उधर घूम रहे हैं। नगर पंचायत द्वारा पानी की टंकी के पास करीब 40 गोवंशों को ही ठिकाना मिला हुआ है। किंतु बेसहारा घूम रहे गोवंशों पर उनकी नजर नहीं पड़ रही है। चेयरमैन तंजीला कुरैशी का कहना है कि ईओ का पद खाली चलने के कारण इस कार्य में देरी हुई है।
भोपा में हरा चारा नहीं मिल रहा
भोपा कस्बा स्थित गोशाला की अव्यवस्था गोवंश पर भारी पड़ रही है। यहां पशुओं के चारा काटने की मशीन खराब पड़ी है। साथ ही विद्युत कनेक्शन नहीं होने से विद्युत व्यवस्था भी नहीं है। पानी के लिए भी पानी का हौज हाथों से नल चलाकर भरना पड़ता है। यहां पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी खराब पड़े हैं। व्यवस्था में लगे कर्मचारी ने बताया कि गोवंश को भूसा खिलाया जा रहा है। इस समय 15 गोवंश गोशाला में मौजूद है।
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कीचड़ में पड़े गोवंश
- फोटो : अमर उजाला
कीचड़ में तड़पकर दम तोड़ रहे गोवंश
कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की सर्दी और अब बारिश में आश्रय स्थलों में रखे गए गोवंश की दुर्दशा हो रही है। कीचड़ और ठंड के बीच गोवंश तड़पकर मर रहे हैं। स्थाई गोशालाओं में तो व्यवस्था कुछ ठीक नजर आती हैं लेकिन अस्थाई आश्रय स्थलों में बदहाली है। बाबरी के आश्रय स्थल में गोवंशों की हालत बेहद खराब मिली।
जनपद में दो वृहद गो-संरक्षण केंद्र और 26 आश्रय स्थल हैं। इनमें 3511 गोवंशों को रखा गया है। इनमें से ज्यादातर वृद्ध एवं बीमार गोवंश हैं। गोवंशों को ओढ़ाने के लिए जूट के बोरे तक नहीं है। बीते करीब तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से आश्रय स्थलों में रखे गए पशुओं की और दुर्दशा हो रही है। शामली के पास बनत में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए शेड के चारों को टाट के पर्दे लगाए गए हैं। बारिश के मौसम में गोवंश खुले में घूमते नजर आए। यहां के कर्मचारियों ने बताया कि गोशाला में 272 पशु हैं। इनके चारे एवं ठंड से बचाने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं।
मंगलवार को एक गोवंश की मौत
बाबरी में अस्थाई गोशाला में गोवंश कीचड़ में पड़े तड़प रहे हैं। इन्हें बारिश से बचाने के उपाय नहीं हैं। मंगलवार को एक गोवंश की मौत हो गई जबकि दो मरणासन्न पड़े थे। वहां मौजूद कर्मचारी किरण ने बताया कि गोशाला में करीब 140 गोवंश हैं। एक माह में करीब 8-10 गोवंश मर गए हैं। बड़े पशु छोटे पशुओ को चारा नहीं खाने देते, जिसके चलते पशु कमजोर हो जाते हैं। बड़े पशु छोटे पशुओं को टक्कर मारकर घायल कर देते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है।
उधर, अलीपुर कला गोशाला में मुजफ्फरनगर के तितावी से कुछ किसान एक गाय को खेत से पकड़कर गोशाला में छोड़ने के लिए लाए तो कर्मचारियों ने मना कर दिया। बाद में किसानों ने बीडीओ थानाभवन से फोन पर बात कराई। इस पर कर्मचारियों ने गाय को गोशाला में रखा।
नाकाफी हैं गोवंश को ठंड से बचाने के उपाय
जलालाबाद देहात में संचालित गोशाला में करीब 80 गोवंश को रखा गया है। शेड के तीन ओर टाट के पर्दे लगे हुए हैं लेकिन एक ओर से सीधी हवा का सामना गोवंशों को करना पड़ता है। सर्दी से बचाव के लिए ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं। हालत यह है कि एक तरफ से सीधी हवा गोवंश को लगती है। बारिश के मौसम में भी गोवंश खुले में घूमते रहते हैं।
कैराना स्थित देवी मंदिर तालाब रोड पर गोशाला में 50 गोवंश हैं। सभी गोवंश लिंटर के पक्के बरामदे के नीचे बने हुए हैं। सर्दी और बरसात से बचाव के लिए बरामदे के जंगलों के आगे तिरपाल डाला गया है। गोवंश की देखभाल करने वाले अमित ने बताया कि सभी गोवंश को हरा चारा व भूसा दिया जाता है। सर्दी से बचाने के लिए प्रत्येक गोवंश को शाम के समय 100 ग्राम गुड़ दिया जाता है।
कांधला में कैराना बाईपास स्थित गोविंद गोशाला में 70 गोवंश हैं। गोवंशों को पक्के हॉल में रखा गया है तथा सर्दी से बचाव के लिए तिरपाल लगाया गया है।
इन्होंने कहा...
आश्रय स्थलों में रखे गए गोवंशों को सर्दी से बचाव के लिए पूरे इंतजाम हैं। जो पशु बीमार होता है उसका उपचार कराया जाता है। चारे आदि की पर्याप्त व्यवस्था की जाती है। आश्रय स्थलों में रह रहे प्रत्येक पशु के लिए 30 रुपये प्रतिदिन दिया जा रहा है। - डा. यशवंत सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की सर्दी और अब बारिश में आश्रय स्थलों में रखे गए गोवंश की दुर्दशा हो रही है। कीचड़ और ठंड के बीच गोवंश तड़पकर मर रहे हैं। स्थाई गोशालाओं में तो व्यवस्था कुछ ठीक नजर आती हैं लेकिन अस्थाई आश्रय स्थलों में बदहाली है। बाबरी के आश्रय स्थल में गोवंशों की हालत बेहद खराब मिली।
जनपद में दो वृहद गो-संरक्षण केंद्र और 26 आश्रय स्थल हैं। इनमें 3511 गोवंशों को रखा गया है। इनमें से ज्यादातर वृद्ध एवं बीमार गोवंश हैं। गोवंशों को ओढ़ाने के लिए जूट के बोरे तक नहीं है। बीते करीब तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से आश्रय स्थलों में रखे गए पशुओं की और दुर्दशा हो रही है। शामली के पास बनत में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए शेड के चारों को टाट के पर्दे लगाए गए हैं। बारिश के मौसम में गोवंश खुले में घूमते नजर आए। यहां के कर्मचारियों ने बताया कि गोशाला में 272 पशु हैं। इनके चारे एवं ठंड से बचाने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं।
मंगलवार को एक गोवंश की मौत
बाबरी में अस्थाई गोशाला में गोवंश कीचड़ में पड़े तड़प रहे हैं। इन्हें बारिश से बचाने के उपाय नहीं हैं। मंगलवार को एक गोवंश की मौत हो गई जबकि दो मरणासन्न पड़े थे। वहां मौजूद कर्मचारी किरण ने बताया कि गोशाला में करीब 140 गोवंश हैं। एक माह में करीब 8-10 गोवंश मर गए हैं। बड़े पशु छोटे पशुओ को चारा नहीं खाने देते, जिसके चलते पशु कमजोर हो जाते हैं। बड़े पशु छोटे पशुओं को टक्कर मारकर घायल कर देते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है।
उधर, अलीपुर कला गोशाला में मुजफ्फरनगर के तितावी से कुछ किसान एक गाय को खेत से पकड़कर गोशाला में छोड़ने के लिए लाए तो कर्मचारियों ने मना कर दिया। बाद में किसानों ने बीडीओ थानाभवन से फोन पर बात कराई। इस पर कर्मचारियों ने गाय को गोशाला में रखा।
नाकाफी हैं गोवंश को ठंड से बचाने के उपाय
जलालाबाद देहात में संचालित गोशाला में करीब 80 गोवंश को रखा गया है। शेड के तीन ओर टाट के पर्दे लगे हुए हैं लेकिन एक ओर से सीधी हवा का सामना गोवंशों को करना पड़ता है। सर्दी से बचाव के लिए ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं। हालत यह है कि एक तरफ से सीधी हवा गोवंश को लगती है। बारिश के मौसम में भी गोवंश खुले में घूमते रहते हैं।
कैराना स्थित देवी मंदिर तालाब रोड पर गोशाला में 50 गोवंश हैं। सभी गोवंश लिंटर के पक्के बरामदे के नीचे बने हुए हैं। सर्दी और बरसात से बचाव के लिए बरामदे के जंगलों के आगे तिरपाल डाला गया है। गोवंश की देखभाल करने वाले अमित ने बताया कि सभी गोवंश को हरा चारा व भूसा दिया जाता है। सर्दी से बचाने के लिए प्रत्येक गोवंश को शाम के समय 100 ग्राम गुड़ दिया जाता है।
कांधला में कैराना बाईपास स्थित गोविंद गोशाला में 70 गोवंश हैं। गोवंशों को पक्के हॉल में रखा गया है तथा सर्दी से बचाव के लिए तिरपाल लगाया गया है।
इन्होंने कहा...
आश्रय स्थलों में रखे गए गोवंशों को सर्दी से बचाव के लिए पूरे इंतजाम हैं। जो पशु बीमार होता है उसका उपचार कराया जाता है। चारे आदि की पर्याप्त व्यवस्था की जाती है। आश्रय स्थलों में रह रहे प्रत्येक पशु के लिए 30 रुपये प्रतिदिन दिया जा रहा है। - डा. यशवंत सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।