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कांग्रेस का वैश्य कार्ड, भाजपा की परेशानी
Tue, 19 Mar 2019 03:31 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Tue, 19 Mar 2019 03:31 AM IST
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हरेंद्र अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
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48 घंटे में ही कांग्रेस ने क्रांतिधरा पर अपना प्रत्याशी बदल दिया। वैश्य वोटों पर फोकस करते हुए कांग्रेस ने पूर्व एमएलसी हरेंद्र अग्रवाल को प्रत्याशी घोषित कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं कि इस सीट पर कांग्रेस के टारगेट पर भाजपा है।
शनिवार रात को कांग्रेस ने वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. ओपी शर्मा को मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर प्रत्याशी घोषित किया था। लेकिन सोमवार की रात यह निर्णय बदलकर हरेंद्र अग्रवाल को उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। इससे पहले सियासी गलियारों में चर्चा थी कि कांग्रेस ने ब्राह्मण वोटरों पर सेंध लगाने की कोशिश की है। लेकिन नए प्रत्याशी से समीकरण बदल गए। भाजपा की बात करें तो इस सीट पर पिछले दो चुनावों से राजेंद्र अग्रवाल जीत रहे हैं। चर्चा है कि चाहे राजेंद्र अग्रवाल का टिकट बरकरार रहे या फिर किसी अन्य को टिकट दिया जाए। लेकिन इस बार भी भाजपा वैश्य उम्मीदवार को ही मैदान में उतारने की तैयारी में है। ऐसे में हरेंद्र अग्रवाल का चुनावी मैदान में आना भाजपा की परेशानी बढ़ा सकता है। चूंकि दो वैश्य उम्मीदवार होने से वैश्य मतों का विभाजन होने के प्रबल समीकरण बन जाते हैं।
18 लाख वोटरों से ज्यादा की मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर लगभग सवा दो लाख वैश्य मतदाता बताए जाते हैं। यह भी भाजपा की जीत का प्रबल आधार बनते रहे हैं। अब इनमें कांग्रेस की सेंध सीधी भाजपा को चोट पहुंचा सकती है। उधर, गठबंधन को इस टिकट से राहत मिल सकती है।
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पूर्व सीएम के पुत्र हैं हरेंद्र
हरेंद्र अग्रवाल उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास गुप्ता के पुत्र हैं। मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले हरेंद्र अग्रवाल एमएलसी भी रह चुके हैं और इस समय गाजियाबाद में रहते हैं। मेरठ में विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति रहती है।
ओपी शर्मा ने खरीद लिया था पर्चा
पहले चरण के मतदान के लिए सोमवार से पर्चा वितरण का काम शुरू हुआ था। कांग्रेस से प्रत्याशी घोषित किए गए डॉ. ओमप्रकाश शर्मा एडवोकेट ने पहले ही दिन पर्चा भी खरीद लिया था। लेकिन देर रात निर्णय बदल दिया गया।
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शनिवार रात को कांग्रेस ने वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. ओपी शर्मा को मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर प्रत्याशी घोषित किया था। लेकिन सोमवार की रात यह निर्णय बदलकर हरेंद्र अग्रवाल को उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। इससे पहले सियासी गलियारों में चर्चा थी कि कांग्रेस ने ब्राह्मण वोटरों पर सेंध लगाने की कोशिश की है। लेकिन नए प्रत्याशी से समीकरण बदल गए। भाजपा की बात करें तो इस सीट पर पिछले दो चुनावों से राजेंद्र अग्रवाल जीत रहे हैं। चर्चा है कि चाहे राजेंद्र अग्रवाल का टिकट बरकरार रहे या फिर किसी अन्य को टिकट दिया जाए। लेकिन इस बार भी भाजपा वैश्य उम्मीदवार को ही मैदान में उतारने की तैयारी में है। ऐसे में हरेंद्र अग्रवाल का चुनावी मैदान में आना भाजपा की परेशानी बढ़ा सकता है। चूंकि दो वैश्य उम्मीदवार होने से वैश्य मतों का विभाजन होने के प्रबल समीकरण बन जाते हैं।
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18 लाख वोटरों से ज्यादा की मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर लगभग सवा दो लाख वैश्य मतदाता बताए जाते हैं। यह भी भाजपा की जीत का प्रबल आधार बनते रहे हैं। अब इनमें कांग्रेस की सेंध सीधी भाजपा को चोट पहुंचा सकती है। उधर, गठबंधन को इस टिकट से राहत मिल सकती है।
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पूर्व सीएम के पुत्र हैं हरेंद्र
हरेंद्र अग्रवाल उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास गुप्ता के पुत्र हैं। मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले हरेंद्र अग्रवाल एमएलसी भी रह चुके हैं और इस समय गाजियाबाद में रहते हैं। मेरठ में विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति रहती है।
ओपी शर्मा ने खरीद लिया था पर्चा
पहले चरण के मतदान के लिए सोमवार से पर्चा वितरण का काम शुरू हुआ था। कांग्रेस से प्रत्याशी घोषित किए गए डॉ. ओमप्रकाश शर्मा एडवोकेट ने पहले ही दिन पर्चा भी खरीद लिया था। लेकिन देर रात निर्णय बदल दिया गया।