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कमांडर के वाट्स एप पर ऑनलाइन ‘मेरठ पुलिस’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jun 2016 02:14 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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कंट्रोल रूम द्वारा वायरलेस से थानेदारों की लोकेशन लेने के दिन अब लद गए हैं। पहले तो थानेदारों और सीओ की फर्जी लोकेशन दे दी जाती थी। लेकिन अब हाईटेक दौर में उनकी हाजिरी से लेकर लोकेशन कमांडर (एसएसपी) के वाट्सएप ग्रुप पर नोट हो रही है। तुरंत पता चल रहा है कि कौन गोली दे रहा है और कौन ऑनड्यूटी है। यही नहीं, पूरे दिन क्या किया, इसका लेखा-जोखा भी देना पड़ रहा है। इस ग्रुपबाजी को लेकर कई थानेदारों को परेशानी है, लेकिन डर तो यह है कि आदेश बॉस का है इसलिए कोई खेल किया तो अगली हाजिरी सीधे लाइन में ही लगेगी।
यूं बना वाट्सएप ग्रुप
जिले के थानेदारों, सीओ और एएसपी की कार्य कुशलता जानने और उन्हें एक्टिव रखने के लिए एसएसपी जे. रविंदर गौड़ ने यह नया फार्मूला निकाला है। ‘मेरठ पुलिस’ नाम से एसएसपी ने वाट्सएप ग्रुप बनाया। इसके ग्रुप एडमिन खुद एसएसपी हैं तो जिले के सभी थाना प्रभारी और राजपत्रित अफसर ग्रुप मेंबर।
सुबह 8:00 बजे से...
सुबह के आठ बजते ही एसएसपी का ग्रुप पर गुड मार्निंग का मेसेज पहुंचता है। उसके बाद वायरलेस सेट पर सीओ और थानेदार से उनकी लोकेशन पूछी जाती हैं। एसएसपी दिन भर जिस थानेदार की लोकेशन के साथ जानना चाहते हैं कि थानेदार क्या कर रहा है तो उसे वाट्स एप पर ही पूछ लेते हैं।
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थानेदार अपनी लोकेशन और ड्यूटी के बारे में बताता है तो उसे एसएसपी का आदेश मिलता है कि लाइव फोटो भेजो। यानी यदि किसी थानेदार ने किसी चौराहे पर चेकिंग करने की बात कही है तो एसएसपी उससे चेकिंग करते हुए की फोटो मांग लेते हैं। थोड़ी देर बाद फिर उसी थानेदार से वहां जहां भी है, उसकी फोटो खींचकर भेजने को कहा जाता है। यही नहीं, अगर थानेदार ने चेकिंग करते हुए कोई पुरानी फोटो भेजी तो एसएसपी जरा सी भी शक होने पर अपने चैनल से भी जांच कराते हैं कि थानेदार की असल लोकेशन क्या है। थानेदारों, सीओ और एएसपी से दिन भर की रूटीन चेकिंग, थाने, ऑफिसों पर फरियादियों की सुनवाई, किसी घटना या फिर वांछित अपराधी की दबिश के दौरान की फोटो तुरंत भेजने को कहा जाता है।
होती है समीक्षा
एसएसपी वाट्स एप पर ही थानेदारों के काम की समीक्षा करते हैं। थानेदार के अच्छे काम पर गुडवर्क और खराब काम पर डांट भी पूरे ग्रुप में लगाई जाती है।
हम तो परेशान हो गए ...
इस वाट्सएप ग्रुप को लेकर कई थानेदारों को परेशानी है। थानेदारों और सीओ को एसएसपी को तुरंत रिप्लाई करना होता है। नाम न छापने की शर्त पर शहर के तीन थानेदार बोले कि एसएसपी के इस वाट्सएप ग्रुप से तो हम परेशान हो गए हैं। पता नहीं चलता कि कब कौन सा मेसेज आ जाए और साहब क्या पूछ लें। हर जवाब को फोटो के साथ वाट्सएप पर भेजना जरूरी हो गया है।
बताओ! 24 घंटे क्या किया
एसपी सिटी, एसपी देहात, एसपी क्राइम, एसपी ट्रैफिक, सीओ और थानेदारों को रोजाना शाम को ग्रुप में बताना होता है कि आज 24 घंटे में उन्होंने क्या-क्या काम किया। क्या अपराध हुआ, कितनी शिकायतों का निस्तारण हुआ। यह सभी जानकारी ग्रुप में डालनी अनिवार्य हो गई है।
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यूं बना वाट्सएप ग्रुप
जिले के थानेदारों, सीओ और एएसपी की कार्य कुशलता जानने और उन्हें एक्टिव रखने के लिए एसएसपी जे. रविंदर गौड़ ने यह नया फार्मूला निकाला है। ‘मेरठ पुलिस’ नाम से एसएसपी ने वाट्सएप ग्रुप बनाया। इसके ग्रुप एडमिन खुद एसएसपी हैं तो जिले के सभी थाना प्रभारी और राजपत्रित अफसर ग्रुप मेंबर।
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सुबह 8:00 बजे से...
सुबह के आठ बजते ही एसएसपी का ग्रुप पर गुड मार्निंग का मेसेज पहुंचता है। उसके बाद वायरलेस सेट पर सीओ और थानेदार से उनकी लोकेशन पूछी जाती हैं। एसएसपी दिन भर जिस थानेदार की लोकेशन के साथ जानना चाहते हैं कि थानेदार क्या कर रहा है तो उसे वाट्स एप पर ही पूछ लेते हैं।
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थानेदार अपनी लोकेशन और ड्यूटी के बारे में बताता है तो उसे एसएसपी का आदेश मिलता है कि लाइव फोटो भेजो। यानी यदि किसी थानेदार ने किसी चौराहे पर चेकिंग करने की बात कही है तो एसएसपी उससे चेकिंग करते हुए की फोटो मांग लेते हैं। थोड़ी देर बाद फिर उसी थानेदार से वहां जहां भी है, उसकी फोटो खींचकर भेजने को कहा जाता है। यही नहीं, अगर थानेदार ने चेकिंग करते हुए कोई पुरानी फोटो भेजी तो एसएसपी जरा सी भी शक होने पर अपने चैनल से भी जांच कराते हैं कि थानेदार की असल लोकेशन क्या है। थानेदारों, सीओ और एएसपी से दिन भर की रूटीन चेकिंग, थाने, ऑफिसों पर फरियादियों की सुनवाई, किसी घटना या फिर वांछित अपराधी की दबिश के दौरान की फोटो तुरंत भेजने को कहा जाता है।
होती है समीक्षा
एसएसपी वाट्स एप पर ही थानेदारों के काम की समीक्षा करते हैं। थानेदार के अच्छे काम पर गुडवर्क और खराब काम पर डांट भी पूरे ग्रुप में लगाई जाती है।
हम तो परेशान हो गए ...
इस वाट्सएप ग्रुप को लेकर कई थानेदारों को परेशानी है। थानेदारों और सीओ को एसएसपी को तुरंत रिप्लाई करना होता है। नाम न छापने की शर्त पर शहर के तीन थानेदार बोले कि एसएसपी के इस वाट्सएप ग्रुप से तो हम परेशान हो गए हैं। पता नहीं चलता कि कब कौन सा मेसेज आ जाए और साहब क्या पूछ लें। हर जवाब को फोटो के साथ वाट्सएप पर भेजना जरूरी हो गया है।
बताओ! 24 घंटे क्या किया
एसपी सिटी, एसपी देहात, एसपी क्राइम, एसपी ट्रैफिक, सीओ और थानेदारों को रोजाना शाम को ग्रुप में बताना होता है कि आज 24 घंटे में उन्होंने क्या-क्या काम किया। क्या अपराध हुआ, कितनी शिकायतों का निस्तारण हुआ। यह सभी जानकारी ग्रुप में डालनी अनिवार्य हो गई है।