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जनता चाहे सफाई, सस्ती दवाई, बेहतर पढ़ाई

Mon, 01 Apr 2019 03:20 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Mon, 01 Apr 2019 03:20 AM IST
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Cleanliness, affordable medicine, better education, whether public
अपराजिता - फोटो : अमर उजाला
शहर में बढ़ते प्रदूषण, पैर पसारते अतिक्रमण और जाम से लोगों को निजात दिलाने के लिए नेताओं ने कभी काम नहीं किया। महिला सुरक्षा के लिए योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन इनका असर नहीं दिखाई देता। महिला स्वास्थ्य की योजनाएं हैं, लेकिन चिकित्सक नहीं हैं। निशुल्क महिला शिक्षा के लिए स्कूलों में शिक्षक नहीं है। बेरोजगारी के कारण आधारभूत जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं। नेता इन मुद्दों पर कभी गंभीरता नहीं दिखाते। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत लोकसभा चुनाव पर महिला संवाद का आयोजन रविवार को अमर उजाला के मोहकमपुर स्थित कार्यालय में हुआ। इसमें शहर के विभिन्न वर्ग की महिलाओं ने विचार रखे। महिलाओं ने बताया कि शहर को कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार और सर्वसामान्य की सोचने वाले नेता की जरूरत है।  
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शिक्षकों की कमी पूरी हो
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। जिन स्कूलों में शिक्षक हैं वहां बच्चे नहीं, जहां बच्चे हैं वहां शिक्षक नहीं, इसे दूर किया जाए। -डॉ. रेखा शर्मा, एसडी गर्ल्स इंटर कॉलेज
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भर्ती परीक्षाओं में लाएं पारदर्शिता
स्कूलों में फिजिक ल एजूकेशन का विषय है लेकिन शिक्षक ही नहीं हैं। जनप्रतिनिधि संसद में इस मुद्दे को उठाएं। -इरफानी शाहीन प्रिंसिपल हमीदिया गर्ल्स इंटर कॉलेज खैरनगर
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अंग्रेजी की शिक्षा मिले
सस्ती के साथ अच्छी शिक्षा हर बच्चे का हक है। लोग बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने से इसलिए कतराते हैं क्योंकि वहां अंग्रेजी नहीं पढ़ाते। -पायल जैन, समाजसेविका
सबको मिले स्वास्थ्य सुविधाएं
जनप्रतिनिधि का पहला कर्तव्य है जनता को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाए। गांवों में आज भी लोगों को अच्छी दवा, इलाज नहीं मिल पाता। -मोनिका विनायक
लागू हो शराबबंदी
अपराध बढ़ने का प्रमुख कारण शराब है। जो नेता बने वो शराब की दुकानें बंद करने पर काम करे। -डॉ. लता कुमार, प्रवक्ता शहीद मंगल पांडे महिला डिग्री कॉलेज माधवपुरम
महिला सुरक्षा पर गंभीर
नेताओं के एजेंडे में महिला सुरक्षा का मुद्दा केवल दिखावा होता है, नेता इस मुद्दे पर गंभीरता से काम नहीं करते। इस पर जनप्रतिनिधि गंभीरता दिखाएं। -नीलम मिश्रा, कराटे प्रशिक्षक
जल निकासी की हो उचित व्यवस्था
नेताजी विकास की बातें तो करते हैं, लेकिन शहर में कहीं भी जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं है। इससे परेशानी होती है। -सारिका सिंघल, शिक्षिका मेरठ सिटी पब्लिक स्कूल
आरक्षण पर कसे लगाम
आरक्षण ने देश की जड़ों को खोखला कर दिया है। आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू हो न कि जाति, बिरादरी के अनुसार। -नंदिनी प्रधान, डायरेक्टर कार्डिनल चिल्ड्रंस एकेडमी
पर्यावरण को बनाएं मुद्दा
नेता चाहे कोई भी आए लेकिन पर्यावरण कभी चुनावी मुद्दा नहीं बना। बढ़ता प्रदूषण मुसीबत है नेता इस पर ध्यान क्यों नहीं देते। -पूनम पंडित, संचालिका ग्रीन केयर सोसाइटी
जीत के बाद भी नजर आएं नेता
पहले जनता नेताओं को परेशानी बताती है, चुनाव के बाद नेता जनता की नहीं सुनते। इसलिए नेता जीत के बाद भी जनता के बीच आएं। -सुचेता सहगल, दीवान पब्लिक स्कूल
नालों की समस्या दूर करें
शहर के खुले हुए नालों से बदबू और प्रदूषण तो फैलता ही है, इनमें पशु, बच्चे गिर जाते हैं इस पर भी काम होना चाहिए। इंदु मेहरा, कोआर्डिनेटर मेरठ सिटी पब्लिक स्कूल
महीने में हो जनता दरबार
अफसरों की तरह नेताओं को भी जनता दरबार करना चाहिए। जनप्रतिनिधि ऐसा हो जो क्षेत्र में नजर आए। -नायब जेहरा जैदी, सेवानिवृत्त प्राचार्य केंद्रीय विद्यालय
धरातल पर करे काम
नेता हवा हवाई वादे न करे बल्कि वादों को जीत के बाद पूरा करे। रोजगार, कर्जमाफी या अन्य सुविधाओं की बातें बोले तो उन पर काम भी करे। -रिया जावला, करियर काउंसलर
जाम की समस्या दूर करे
शहर में बड़ी परेशानी जाम है। स्कूली बच्चों से लेकर आम आदमी, नौकरीपेशा व्यक्ति का आधा वक्त जाम में खराब हो जाता है। -निधि मित्तल, प्रिंसिपल चड्डा पब्लिक स्कूल
सही प्रचार कराए
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण सरकारी योजनाओं की जानकारी हर वर्ग तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में इनका लाभ कैसे मिलेगा। -डॉ. अरुणा यादव नेत्र रोग विशेषज्ञ
जीत के बाद भी आएं
नेता वो होना चाहिए जो जीत के बाद गायब न हो जाए, बल्कि उसकी उपलब्धता अपनी जनता के लिए हमेशा रहे। -डॉ. सरिता त्यागी, महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ
कचरा प्रबंधन है गंभीर मुद्दा
शहर में कचरे का उचित प्रबंधन न होना एक बड़ी समस्या है। नाले कचरे से पट जाते हैं और गंदगी सड़कों पर होती है। -प्राची मिश्रा, प्रिंसिपल गीतांजलि पब्लिक स्कूल
पीड़िताओं को मिले इंसाफ
सांसद ऐसा हो जो महिला सुरक्षा के प्रति सोचे, सदन में इस मुद्दे को उठाए इसके साथ ही दुष्कर्म पीड़िताओं को इंसाफ दिलाने पर भी सोचे। -कल्पना पांडे, अध्यक्ष सारथी संस्था
महिला आरक्षण पर हो पहल
संसद में आज भी महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी का मामला अटका है। जनप्रतिनिधि ऐसा हो जो महिलाओं के हक में आवाज उठाए। -संगीता शर्मा, समाजसेविका
कानून व्यवस्था में करे सुधार
शहर में कानून व्यवस्था पूरी तरह खराब है। आए दिन चेन खींचने, पर्स लूट की घटना होती है। अपराध पर नियंत्रण लगना चाहिए। -डॉ. मोनिका, समाजसेवी
सस्ती शिक्षा है जरूरत
सरकारी स्कूलों में शिक्षक और सुविधाओं का अभाव है। हर वर्ग को अच्छी और सस्ती शिक्षा मिले नेता को इस पर सोचना चाहिए। -जूही त्यागी, अध्यक्ष यथार्थ के सारथी
जाति और धर्म पर न करें राजनीति
नेता के लिए समाज का हर वर्ग समान होता है, लेकिन नेता स्वयं असमानता फैलाते हैं। नेताओं को इससे बचना चाहिए। मुद्दों पर बात करना चाहिए। -डॉ. कविता जैन, प्रिंसिपल
काली नदी पर सोचें
काली नदी में प्रदूषण की वजह से लोगों में कैंसर फैल रहा है। दूसरी समस्या मिड डे मील है 50 पैसे में बच्चे को भोजन कैसे मिले इस पर सोचें। -डॉ. भावना गांधी डाइटीशियन
बढ़ती जनसंख्या है समस्या
बेरोजगारी, अशिक्षा, असमानता जितनी भी परेशानियां है सबकी मुख्य वजह बढ़ती जनसंख्या है। नेता इसे मुद्दा बनाएं। डॉ. किरन प्रदीप, प्रिंसिपल कनोहर लाल महिला डिग्री कॉलेज
जनता से मिलें
जनता नेता इसलिए चुनती है कि वो क्षेत्र में जाकर लोगों की समस्याएं सुने। जीतने के बाद नेता केवल रिबन काटने जनता के बीच जाते हैं। -डॉ. कशिका जैन, करियर काउंसलर
वीआईपी कल्चर हो खत्म
जब नेताजी क्षेत्र में जाएंगे तो सड़क बन जाएगी, सफाई हो जाएगी ताकि नेताओं को परेशानी न हो। यह व्यवस्था बंद होनी चाहिए। -अलका गुप्ता, आलमाइटी महिला क्लब
महिला प्रत्याशियों से कतराना हो बंद
पार्टियां महिला सुरक्षा, सशक्तिकरण की बात करती हैं लेकिन महिलाओं का नेतृत्व आज भी नहीं स्वीकारते। -डॉ. मृदुला शर्मा प्रिंसिपल इस्माइल गर्ल्स इंटर कॉलेज शास्त्रीनगर
जनता के बीच आएं
जनता बहुत उम्मीदों से अपना नेता चुनती है। लेकिन चुनाव जीतने के बाद नेताजी जनता के बीच नहीं आते। ऐसा नहीं होना चाहिए। -ममता श्रीवास्तव, ममताशा संस्था
एजेंडे में आएं कलाकार
अभिनेता और कलाकार केवल पार्टियों के प्रत्याशी बनकर रह गए हैं, हालांकि यह संख्या भी बहुत कम है। कभी कलाकारों के हित घोषणा पत्र पर नहीं आए।  -डॉ. मीनाक्षी शास्त्री
बेरोजगारी पर हो काम
बेरोजगारी देश के युवाओं की सबसे बड़ी समस्या है। सरकार भत्ते देने को तो तैयार हो जाती है लेकिन रोजगार क्यों नहीं देती। बेरोजगारी दूर करना ही मुद्दा है। -अर्चना यादव
अतिक्रमण से मिले मुक्ति
लोग अतिक्रमण, जाम से जूझते रहते हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं। पुलिस अतिक्रमण हटवाने जाए तो लोग विरोध करते हैं। नेता इस पर सोचे। -डॉ. रजनी यादव, फिजियोथेरेपिस्ट

खुलेआम मीट की बिक्री हो बंद
खुलेआम मांस की बिक्री लोगों की बड़ी समस्या है इसका उचित प्रबंधन होना चाहिए। ताकि आने जाने वाले लोगों को राहत मिल सके। -कीर्ति गुप्ता, समाजसेविका
हर वर्ग को चाहिए शुद्ध हवा, पानी
शहर में कई ऐसे इलाके  हैं जहां साफ पानी, हवा चाहिए लेकिन नेताओं ने कभी उस पर ध्यान नहीं दिया। इन्हें पूरा करना तो नेताओं का पहला धर्म है। -निशी मित्तल, समाजसेविका
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