मेरठ को खुले में शौचमुक्त बनाने के दावे फेल, सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा, 504 शौचालय हुए गायब
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मेरठ महानगर को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) करने के दावों में फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। फिलहाल 10 वार्डों की 1468 शौचालयों के दावों की जो जांच रिपोर्ट सामने आई है, वह चौंकाने वाली है। इसमें 504 शौचालय गायब मिले हैं। ऐसे में महानगर के सभी 90 वार्डों की जांच होगी तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
यह है मामला
नगर निगम को ओडीएफ के लिए महानगर में 20404 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य दिया गया था। जिसमें निगम ने 15845 शौचालय बनाने के साथ महानगर को ओडीएफ घोषित होने का दावा करते हुए मंडलायुक्त अनीता सी. मेश्राम को रिपोर्ट दी थी। नगर निगम के इस दावे की सत्यता जांचने के लिए मंडलायुक्त ने उच्चाधिकारियों की चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी।
अपर आयुक्त रजनीश राय की अध्यक्षता में गठित कमेटी में एडीएम सिटी मुकेश चंद्र, उप निदेशक पंचायत अमरजीत सिंह, अधीक्षण अभियंता जल निगम केपी सिंह को सदस्य बनाया गया था। इन अधिकारियों को दिसंबर माह में रिपोर्ट देने को कहा गया था। अब फिलहाल 10 वार्डों की ही रिपोर्ट निगम के दावों की पोल खोल रही है।
यह आई जांच रिपोर्ट
एडीएम सिटी ने नगर निगम के वार्ड 1 से वार्ड 10 तक में बनवाए गए शौचालयों की जांच कराई। उन्होंने नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को दी और उनसे भौतिक सत्यापन कराते हुए रिपोर्ट तलब की। इन वार्डों की जांच रिपोर्ट बहुत ही चौंकाने वाली रही है।
नगर निगम द्वारा इन 10 वार्ड में कुल 1468 शौचालय निर्माण की सूची उपलब्ध कराई गई थी। जिसमें 712 शौचालय ही पूर्ण निर्मित मिले। जबकि 176 शौचालयों का निर्माण अभी भी अधूरा है और 76 शौचालयों का तो निर्माण ही नहीं हुआ है।
वहीं, नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर हुई जांच में जब लाभार्थियों के घर तलाशे गए तो उसमें 225 का तो पता ही नहीं मिला, जबकि 279 लाभार्थी अभी भी ऐसे हैं, जिनके पते अधूरे हैं और उनकी खोज चल रही है। लेकिन आशंका जताई जा रही है कि ये लाभार्थी भी फर्जी हैं।
पूरे निर्माण पर उठ रहे हैं सवाल
एडीएम सिटी की मात्र 10 वार्ड की रिपोर्ट में ही 34 प्रतिशत शौचालय गायब नजर आए हैं। ऐसे में पूरे महानगर में जो 15845 शौचालयों का निर्माण हुआ है, उनको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि इस आंकडे़ के अनुसार करीब पांच हजार शौचालयों के निर्माण में फर्जीवाड़ा हो सकता है। एक शौचालय निर्माण के लिए शासन से 14000 रुपये अनुदान दिया गया था। ऐसे में शौचालय निर्माण में 7 करोड़ का चूना लगा दिया गया है।
खेल तो यहां भी पूरा
सूत्रों की मानें तो बड़ी संख्या में लाभार्थी ऐसे भी हैं, जिनके यहां पहले से शौचालय बना था। लेकिन दलालों की सेटिंग से नगर द्वारा उन्हें भी पात्रता सूची में शामिल कर शौचालय निर्माण अनुदान दिला दिया गया, जिसमें भी गड़बड़ी की आशंका है। हालांकि यह बिंदु जांच में नहीं रखा गया था। यदि यह बिंदु भी जांच में शामिल किया जाता तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता था।
मंडलायुक्त के निर्देश पर नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों से शौचालयों का भौतिक सत्यापन कराया गया था। हालांकि अभी जांच पूरी नहीं हुई है। लेकिन समय सीमा के भीतर जितनी जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई, वह मंडलायुक्त को भेज दी गई है। - मुकेश चंद्र, एडीएम सिटी