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'योगीराज' में अफसरों के दावे फेल, घर की दहलीज से शहर तक महफूज नहीं बेटियां

Thu, 06 Sep 2018 02:54 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 06 Sep 2018 02:54 PM IST
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Claims fail of police officers in Yogi Sarkar, and daughters are not safe in Meerut city
फाइल फोटो

यूपी के मेरठ में इसे मनचलों का दुस्साहस कहें या फिर सिस्टम की कमजोरी। बेटियां घर की दहलीज से लेकर सड़क, बाजार कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। कहीं शोहदे छेड़छाड़ का विरोध करने पर घर में घुसकर जिंदा जला देते हैं तो कहीं सड़क से अपहरण कर लिया जाता है। बुधवार को एक और बड़ी घटना हो गई, जिसकी गूंज लखनऊ तक पहुंच गई। पुलिस महकमे में खलबली मची है तो आम जनता में यह चर्चा का विषय बना है। सवाल बड़ा है कि क्या इस शहर में बेटियों को महफूज रखने के लिए कानून के हाथ छोटे पड़ गए हैं या फिर ऐसे ही खोखले दावे होते रहेंगे।

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मेडिकल थाना क्षेत्र के जागृति विहार में बेटी की इज्जत की खातिर एक पिता दुनिया से ही चला गया। शोहदे लगातार कभी छात्रा को परेशान करते थे तो कभी छात्रा के पिता को घर में घुसकर धमकी देते थे। जाति सूचक शब्द कहते हुए आरोपियों ने यहां तक भी कह दिया कि ऐसा ही हाल कर देंगे जैसे छात्रा को उठाया था। या तो दर्ज मुकदमे में समझौता कर ले, नहीं तो बेटी को ऐसा बदनाम कर देंगे कि घर से बाहर मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहेगा। बेटी की इज्जत की खातिर पिता बेचारा इसी उधेड़बुन में रहा कि आखिर मैं क्या करूं। मेरा इस तरह से उत्पीड़न किया गया कि मैं जिंदा नहीं रह सकता। आखिरकार  छात्रा के पिता ने मौत को गले लगा लिया।

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बेटे और पत्नी ने की समझाने की कोशिश
छात्रा के पिता ने जब घर पहुंचकर आपबीती सुनाई तो उनकी पत्नी और बेटे ने समझाने की कोशिश की थी। लेकिन छात्रा का पिता इस कदर चुप्पी साधे रहा कि परिवार को भी लगा कि वह कोई गलत कदम नहीं उठाएंगे। जब तक परिवार को पता चलता, तब तक काफी देर हो चुकी थी। बुधवार को परिवार के लोगों का रो रोकर बुरा हाल था। 

पढ़ाई छोड़ने के मामले सबसे ज्यादा
मनचलों से परेशान होकर पढ़ाई छोड़कर घर में कैद होने के मामले भी कम नहीं हैं। भावनपुर, कंकरखेड़ा और लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में ऐसे मामले सबसे ज्यादा सामने आए। परतापुर, कोतवाली और ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में भी अक्सर ऐसे चर्चाएं सामने आती रही हैं। खास बात यह है कि पीड़ित छात्राओं ने थाना पुलिस से शिकायत भी की। लेकिन सुनवाई न होने और सुरक्षा न मिलने पर बेटियों को मजबूरन घर बैठना पड़ा।

कब रुकेंगी ऐसी घटनाएं

कंकरखेड़ा: छेड़छाड़ से परेशान एक छात्रा ने कोई सुनवाई न होने पर खुद को घर में आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसी छात्रा की मौत हो गई।

भावनपुर: किशोरी छात्रा से स्कूल लौटते समय अश्लील हरकतें की गईं। छात्रा इस बेइज्जती को सहन नहीं कर पाई और घर पहुंचते ही केरोसिन उड़ेलकर खुद को आग लगा ली। पांच दिनों बाद वह अस्पताल में मौत से हार गई।

खरखौदा: मनचलों से परेशान होकर किशोरी ने जहर खा लिया। अस्पताल में भर्ती इस किशोरी ने घटना के छठवें दिन तड़पते हुए दम तोड़ दिया। 

सरधना: छेड़छाड़ से परेशान छात्रा के विरोध करने पर दबंगों ने घर में घुसकर अपहरण करने का प्रयास किया। विरोध करने पर छात्रा को जिंदा जला दिया। गंभीर रूप से झुलसी छात्रा ने 19 दिनों बाद अस्पताल में आखिरी सांस ली।

मेडिकल: शोहदों ने बेटी का अपहरण किया। बरामदगी के बाद आरोपियों ने मुकदमा वापस न लेने पर बेटी को बदनाम करने की धमकी। दबाव में आए पिता ने जान दे दी।

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