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दावा था 80 करोड़ का, हाउस टैक्स मिला 34 करोड़

Tue, 23 Apr 2019 03:03 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Tue, 23 Apr 2019 03:03 AM IST
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Claim was 80 crores, House tax got 34 crores
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 शहर का विस्तार भले ही तेजी से हो रहा हो, लेकिन उस स्तर से नगर निगम कोष में हाउस टैक्स की वसूली नहीं बढ़ रही है। इससे नगर निगम के हाउस टैक्स विभाग की कार्य प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। बोर्ड बैठकों में हर बार पार्षद हाउस टैक्स विभाग के अधिकारियों को घेरते रहे हैं। वित्तीय वर्ष में हाउस टैक्स से आय को 80 करोड़ तक ले जाने की बात भी की जाती है, लेकिन हाउस टैक्स वसूली 34 करोड़ ही पहुंच पाई है।
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50 प्रतिशत कॉमर्शियल भवनों ने नहीं लिया जा रहा टैक्स
वर्ल्ड बैंक द्वारा चयनित जीआईएस कस्टोडियन संस्था ने पिछले साल शहर में कामर्शियल भवनों की गणना की थी। इस दौरान संस्था को विरोध भी झेलना पड़ा था। संस्था की रिपोर्ट के अनुसार, केवल 50 प्रतिशत कामर्शियल भवनों से ही हाउस टैक्स की वसूली हो रही है। यह रिपोर्ट नगर निगम प्रशासन को भी दी गई थी। बताया जा रहा है कि शहर में लगभग डेढ़ लाख कामर्शियल प्रॉपर्टी सामने आई थीं।
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सात माह में 6490 भवन स्वामियों ने किए आवेदन  
हालांकि हाउस टैक्स को लेकर जनता कुछ जागरूक दिखाई दे रही है। नगर निगम के रिकार्ड के मुताबिक पिछले सात माह में महानगर के 6490 भवन स्वामियों ने अपने आवासीय और कामर्शियल भवनों पर टैक्स लगाने के लिए आवेदन किए। 1745 ने अपने भवनों पर नाम परिवर्तन के लिए आवेदन किया। नगर निगम ने इनसे सात माह में 64 लाख रुपये राजस्व प्राप्ति का दावा किया है।
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मंशा हो सही, तो दोगुना मिले हाउस टैक्स
शहर की जनता हाउस टैक्स देना चाहती है, क्योंकि भवन पर ऋण लेने, बिजली कनेक्शन आदि सुविधाओं के लिए हाउस टैक्स का होना अनिवार्य है। सच्चाई यह है कि आवेदन करने के बाद निगम के अधिकारी और लिपिक भवनों पर हाउस टैक्स लगाने को तैयार नहीं होते। अगर साफ मंशा के साथ अधिकारी व कर्मचारी काम करें, तो हाउस टैक्स से राजस्व बढ़कर दोगुना हो सकता है।
अधिकारी काम करें तो धन संकट से उबरेगा नगर निगम
निगम में खर्च बढ़ रहा है लेकिन आय नहीं बढ़ रही है। इस कारण नगर निगम के पास धन का संकट रहता है। इस संकट से उबरने के लिए नगर निगम के अधिकारियों को एसी की ठंडक को छोड़कर फील्ड में उतरना होगा। जीआईएस कस्टोडियन संस्था की रिपोर्ट पर ही काम कर लिया जाए, तो चालू वित्तीय वर्ष में हाउस टैक्स से निगम की आय बढ़कर 50-60 करोड़ पहुंच जाएगी। इस समय अप्रैल, मई और जून माह में हाउस टैक्स विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों के पास कोई काम नहीं है। इन माह में न तो हाउस टैक्स के बिल भेजे जाते हैं और न ही वसूली होती है। इसके बावजूद निगम प्रशासन ने अभी तक इस संबंध में कोई कार्य योजना तक तैयार नहीं की है।
महानगर में चार लाख से अधिक भवन
महानगर में चार लाख से अधिक आवासीय और कामर्शियल भवन हैं। हालांकि  नगर निगम प्रशासन अभी तक केवल दो लाख 32 हजार आवासीय और केवल 44 हजार कॉमर्शियल भवनों से ही हाउस टैक्स वसूली कर रहा है।

हाउस टैक्स विभाग में अधिकारियों की फौज
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी - एक
- कर निर्धारण अधिकारी - तीन,
- कर अधीक्षक         - छह
- हाउस टैक्स इंस्पेक्टर - 15,
- हाउस टैक्स लिपिक  - 15 ,

जीआईएस कस्टोडियन संस्था ने शहर के भवनों का सर्वे किया था। वह रिपोर्ट अभी हमारे पास नहीं पहुंची है। उस रिपोर्ट के आधार पर छूटे भवनों पर हाउस टैक्स लगाया जाएगा। शुरू में नोटिस भेजने की कार्रवाई करेंगे। इस वित्तीय वर्ष में हाउस टैक्स बढ़ाने पर पूरा जोर रहेगा।
- अवधेश कुमार, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी

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