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अकलापुरा में ईंख बंधाई के रेट पर दो पक्षों में सहमति का दावा

Mon, 09 Aug 2021 01:59 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 09 Aug 2021 01:59 AM IST
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Claim of agreement between two parties on the rate of binding of cane in Akalapura
अकलापुरा में ईंख बंधाई के रेट पर दो पक्षों में सहमति का दावा
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सरधना। क्षेत्र के अकलपुरा में ईंख बंधाई के रेट को लेकर पंद्रह दिन पूर्व किसानों और मजदूरों के बीच शुरू हुआ विवाद रविवार को पुराने रेट पर सहमति के दावे के साथ ही विवाद समाप्त हो गया। इसके बाद किसानों ने मजदूरों को खेतों से चारा काटने का प्रतिबंध भी हटा लिया है। रेट पर विवाद के बाद किसान मजदूरों को खेतों में नहीं आने दे रहे थे।
अकलपुरा में ईंख बंधाई के रेट बढ़ाने को लेकर किसानों और मजदूरों में विवाद बढ़ गया था। अनुसूचित जाति के मजदूर 350 की जगह 400 रुपये प्रति बीघा के रेट की मांग कर रहे थे, वहीं राजपूत और अन्य समाज के किसान पहले रेट पर ही अड़े थे। मामला बढ़ा तो किसानों ने मजदूरों को खेतों में प्रवेश करने और चारा काटने पर प्रतिबंध लगा दिया था। मुनादी कराई थी कि यदि कोई खेत में चारा काटता पाया गया तो उस पर चार हजार रुपये का जुर्माना लगेेगा। वहीं, अधिकतर किसानों ने खुद ही ईंख बंधाई का काम शुरू कर दिया था।
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पिछले 15 दिन से चल रहे विवाद के कारण मजदूरों ने अकलपुरा से बाहर दूसरे गांव मोम्मन फरीदपुर, खेड़ा सहित आसपास के खेतों से पशुओं के लिए चारे का प्रबंध किया। सलावा चौकी पुलिस मामले को दबाए रही। इसी बीच चार अगस्त को फिर से गांव में दोनों पक्षों के लोगों के बीच मामला उठा तो पुलिस पहुंची थी। वहीं, इसी प्रकरण में शनिवार को शिव मंदिर में पंचायत हुई। इसमें दोनों पक्षों की ओर से किसान और मजदूर शामिल हुए। राजपूत समाज से ज्ञान सिंह, राजेंद्र सिंह, ओमकार सिंह, कृष्णपाल सिंह, दिनेश सिंह और दूसरे पक्ष से मदन, सहेंद्र, राजकुमार, सतीश आदि मौजूद रहे। काफी देर के मंथन के बाद पुराने रेट पर ही सहमति बन गई और मजदूरों को खेतों में प्रवेश पर लगाया गया प्रतिबंध भी हटा दिया गया। इस बारे में ग्राम प्रधान पति विश्वास कुमार उर्फ बबलू ने कहा कि वह पंचायत में नहीं थे, मगर रेट पर सहमति बनने के बारे में जानकारी मिली है।
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हैंडपंप की हत्थी निकालने के बाद मामले ने तूल पकड़ा था
बताया जा रहा है कि गांव में सरकारी हैंडपंप से पानी पीने से मना करने और हत्थी निकालने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा था। वहीं, भाजपा विधायक के प्रतिनिधि और मैनेजर पर पुलिसकर्मी से मारपीट का केस दर्ज होने के बाद दोनों ही पक्षों के अधिकतर लोग रेट पर विवाद को दूर करने के प्रयास में थे। इसके चलते ही यह पंचायत कराई गई। अब रेट पर सहमति का दावा किया जा रहा है।
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