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शहर को मिल सकती है चिड़ियाघर की सौगात   

Fri, 21 Apr 2017 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 21 Apr 2017 02:20 AM IST
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city will get zoo
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
 सब कुछ ठीक रहा तो पश्चिम उत्तर प्रदेश का पहला चिड़ियाघर अपने मेरठ में बनेगा। बच्चों को चिड़ियाघर देखने के लिए पास में दिल्ली जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यूपी सरकार पश्चिम उत्तर प्रदेश में चिड़ियाघर बनाने जा रही है। पिछले दिनों शासन में हुई बैठक में मेरठ में चिड़ियाघर बनाने पर सहमति बन चुकी है। वन विभाग से प्रस्ताव मांगा है। विभाग ने संजय वन में चिड़ियाघर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।
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प्रदेश में अभी दो चिड़ियाघर कानपुर और लखनऊ में है। गोरखपुर में चिड़ियाघर बनाने का काम चल रहा है। प्रदेश सरकार पश्चिम उत्तर प्रदेश में भी एक चिड़ियाघर बनाना चाहती है। छह और सात अप्रैल को इस बारे में लखनऊ में बैठक हुई। इसमें मेरठ के वन अधिकारी शामिल हुए। मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार का कहना है शासन ने मेरठ में चिड़ियाघर बनाने पर सहमति जताई है। विभाग से कहां पर चिड़ियाघर बनाया जा सकता है इसकी जानकारी मांगी थी। विभाग ने संजय वन में चिड़ियाघर बनाने का प्रस्ताव भेज दिया है। अवगत करा दिया है कि संजय वन चिड़ियाघर बनाने के लिए उपयुक्त रहेगा। चिड़ियाघर बनाने के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया से मान्यता लेनी होती है। उसकी आवेदन प्रक्रिया है। अथॉरिटी की क्वेरी दूरी करनी होती है। उम्मीद है जल्द इस दिशा में काम आगे बढ़ेगा।  
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23 हेक्टेयर में फैला है संजय वन 
दिल्ली रोड पर वन विभाग का संजय वन 23 हेक्टेयर एरिया में फैला है। कनेक्टिविटी की यहां समस्या नहीं है। शहर से एकदम सटा है। चिड़ियाघर यहां बनता है तो आने जाने वालों को सुविधा रहेगी। एरिया के हिसाब से यहां छोटा चिड़ियाघर बनाया जा सकता है। शासन अगर मीडिया या बड़ा चिड़ियाघर बनाने के लिए कहता है तो हस्तिनापुर में जगह की कमी नहीं है। बड़े चिड़ियाघर के लिए 75 हेक्टेयर और मीडियम के लिए 35 हेक्टेयर जमीन चाहिए। सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नियम मुताबिक चिड़ियाघर में 30 प्रतिशत जमीन ग्रीन बेल्ट में होनी चाहिए। 30 प्रतिशत से अधिक जानवरों के लिए बनाए जाने वाले आशियाना पर खर्च नहीं होनी चाहिए। 
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चिड़ियाघर के प्रकार और शर्त  
कैटेगरी              एरिया             विजिटर की संख्या साल में        प्रजाति की संख्या     जानवरों की संख्या   संकटग्रस्त जानवरों की प्रजाति
बड़ा चिड़ियाघर    75 हेक्टेयर              7.5 लाख                         75                    750                        100
मध्यम चिड़ियाघर  35 हेक्टेयर              3.5 लाख                         35                    350                         50
छोटा चिड़ियाघर   10 हेक्टेयर              1.0 लाख                         10                    100                         15 


नोट: यह नियम सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया के हैं। चिड़ियाघर बनाने और उनके प्रदर्शन का आंकलन इन नियमों के आधार पर किया जाता है। 

स्टॉफ की होगी तैनाती
चिड़ियाघर बनाने के लिए पूरा सेटअप तैयार होता है। जानवरों के अस्पताल से लेकर उनकी रखरखाव करने वाली स्पेशल टीम होती है। क्यूरेटर, वेटरनेरयिन, एजूकेशन ऑफिसर और बायोलॉजिस्ट तैनात किए जाते हैं। जानवरों की सुरक्षा से लेकर उनके खानपान, हेल्थ चेकअप आदि का ख्याल रखा जाता है। संख्या अधिक होने पर वह ट्रांसफर किए जाते हैं।
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