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सिटी बस के संचालन पर संकट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Jun 2018 12:48 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रोडवेज सिटी बस सेवा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। 15 से 20 बसें दुर्घटना और खस्ता हाल के कारण पहले ही सड़कों पर नहीं है और 50 से अधिक बसें प्रतिबंध की जद में आने वाली हैं। एनजीटी के दस साल पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध का आदेश दे रखा है। ऐसे में अगले नौ महीने के अंदर शहर की सड़कों पर रोडवेज की मात्र 45 सिटी बसें ही बचेंगी। इतनी बसों के बेड़े से बाहर होने पर नगर और देहात से यात्री अवैध रूप से दौड़ रही डग्गामार बसों पर ज्यादा निर्भर हो जाएंगे।
यूपीए सरकार ने प्रदेश के बड़े नगरों की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए जेएनएनयूआरएम योजना के तहत वर्ष 2009 में लो फ्लोर बसों के साथ ही छोटी बसें मुहैया कराई थीं। प्रदेश के छह नगरों के साथ ही मेरठ के हिस्से में भी 120 बसेें आई थी। नगर विकास मंत्रालय से मिली इन बसों के संचालन का जिम्मा नगर निगम को दिया गया था। लेकिन नगर निगम ने बस संचालन का अनुभव नहीं होने पर हाथ खडे़ कर दिए थे। तब ये इन बसों का संचालन मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड के जरिये रोडवेज कर रहा है। 120 बसों में से करीब 100 बसों का संचालन शहरी रूटों के अलावा नगर निगम क्षेत्रों के गांवों, सरधना, किठौर आदि में किया जा रहा है।
खटारा हो चुकी हैं बसें
करीब नौ साल पहले मिलीं 120 बसों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। 15 से 20 बसों का तो संचालन भी संभव नहीं हो पा रहा है। बसों की बॉडी जर्जर हो चुकी है, सीटों का भी बुरा हाल है। पांच लाख किलोमीटर पूरे करने की तरफ बढ़ रही बसों के बंद होने के अलावा दस साल की उम्र तक पहुंचने वाली बसों पर एनजीटी का भी चाबुक चलने जा रहा है। एनजीटी के आदेश की जद में कंपनी की 55 बसें आ रही हैं। इनकी उम्र 31 मार्च 2019 को दस साल पूरी हो जाएगी। इसके बाद इन बसों को रूट से हटाना पड़ेगा।
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45 बसें बचेगी कंपनी के पास
120 बसों में से करीब 20 बसें कंडम हो चुकी हैं। कुछ बसें दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुई तो कुछ बसें पिछले दिनों दलित आंदोलन का शिकार हो गई थीं। बची हुई 100 बसों में से 55 बसें अगले साल एक अप्रैल से बंद हो जाएंगी। इसके बाद कंपनी के पास संचालन योग्य सिर्फ 45 बसें ही बचेंगी।
सरकार को देनी होगी नई बसें
इतनी बड़ी संख्या में बसें चलन से बाहर होने पर नगर बस सेवा का संकट लाजिमी है। प्रदेश सरकार को लोगों की परेशानी को देखते हुए अगले नौ महीने के अंदर नई बस मुहैया करानी होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो नगर बस सेवा दम तोड़ जाएगी। इस सेवा से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों के घरों का चूल्हा ठप हो जाएगा।
मेरठ दर्शन बस सेवा भी हुई ठप
मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार की पहल पर शुरू की गई मेरठ हेरिटेज बस सेवा भी ठप हो चुकी है। इस सेवा की बुकिंग नहीं होने पर कंपनी ने मेरठ हेरिटेज बस सेवा को बंद कर बाइपास रूट पर संचालित करना शुरू कर दिया है। यह बस सेवा हर रविवार को संचालित होती थी। इस सेवा के जरिये लोगों को मेरठ के महत्वपूर्ण एवं एतिहासिक स्थलों के दर्शन कराए जाते थे।
क्या बोले अधिकारी
अगले साल मार्च में कंपनी की 55 बसें दस साल की उम्र पूरी कर रही है। इसकी चिंता कंपनी को भी है। नई बसों का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। हालांकि नगर बस सेवा के लिए इलेक्ट्रिक बसों का फैसला शासन द्वारा लिया गया है।
विजय कुमार, एमडी एमसीटीएसएल
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यूपीए सरकार ने प्रदेश के बड़े नगरों की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए जेएनएनयूआरएम योजना के तहत वर्ष 2009 में लो फ्लोर बसों के साथ ही छोटी बसें मुहैया कराई थीं। प्रदेश के छह नगरों के साथ ही मेरठ के हिस्से में भी 120 बसेें आई थी। नगर विकास मंत्रालय से मिली इन बसों के संचालन का जिम्मा नगर निगम को दिया गया था। लेकिन नगर निगम ने बस संचालन का अनुभव नहीं होने पर हाथ खडे़ कर दिए थे। तब ये इन बसों का संचालन मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड के जरिये रोडवेज कर रहा है। 120 बसों में से करीब 100 बसों का संचालन शहरी रूटों के अलावा नगर निगम क्षेत्रों के गांवों, सरधना, किठौर आदि में किया जा रहा है।
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खटारा हो चुकी हैं बसें
करीब नौ साल पहले मिलीं 120 बसों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। 15 से 20 बसों का तो संचालन भी संभव नहीं हो पा रहा है। बसों की बॉडी जर्जर हो चुकी है, सीटों का भी बुरा हाल है। पांच लाख किलोमीटर पूरे करने की तरफ बढ़ रही बसों के बंद होने के अलावा दस साल की उम्र तक पहुंचने वाली बसों पर एनजीटी का भी चाबुक चलने जा रहा है। एनजीटी के आदेश की जद में कंपनी की 55 बसें आ रही हैं। इनकी उम्र 31 मार्च 2019 को दस साल पूरी हो जाएगी। इसके बाद इन बसों को रूट से हटाना पड़ेगा।
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45 बसें बचेगी कंपनी के पास
120 बसों में से करीब 20 बसें कंडम हो चुकी हैं। कुछ बसें दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुई तो कुछ बसें पिछले दिनों दलित आंदोलन का शिकार हो गई थीं। बची हुई 100 बसों में से 55 बसें अगले साल एक अप्रैल से बंद हो जाएंगी। इसके बाद कंपनी के पास संचालन योग्य सिर्फ 45 बसें ही बचेंगी।
सरकार को देनी होगी नई बसें
इतनी बड़ी संख्या में बसें चलन से बाहर होने पर नगर बस सेवा का संकट लाजिमी है। प्रदेश सरकार को लोगों की परेशानी को देखते हुए अगले नौ महीने के अंदर नई बस मुहैया करानी होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो नगर बस सेवा दम तोड़ जाएगी। इस सेवा से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों के घरों का चूल्हा ठप हो जाएगा।
मेरठ दर्शन बस सेवा भी हुई ठप
मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार की पहल पर शुरू की गई मेरठ हेरिटेज बस सेवा भी ठप हो चुकी है। इस सेवा की बुकिंग नहीं होने पर कंपनी ने मेरठ हेरिटेज बस सेवा को बंद कर बाइपास रूट पर संचालित करना शुरू कर दिया है। यह बस सेवा हर रविवार को संचालित होती थी। इस सेवा के जरिये लोगों को मेरठ के महत्वपूर्ण एवं एतिहासिक स्थलों के दर्शन कराए जाते थे।
क्या बोले अधिकारी
अगले साल मार्च में कंपनी की 55 बसें दस साल की उम्र पूरी कर रही है। इसकी चिंता कंपनी को भी है। नई बसों का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। हालांकि नगर बस सेवा के लिए इलेक्ट्रिक बसों का फैसला शासन द्वारा लिया गया है।
विजय कुमार, एमडी एमसीटीएसएल