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सिगेरट फैक्टरी पकड़ी:-कंटेनर के आते ही खुलता था गेट, अंदर ही बना था श्रमिकों का ठिकाना
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रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। दूधली खादर में जिस इमारत में नकली सिगरेट बनाने का खेल चल रहा था। वहां पर पुलिस के छापे के दौरान कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं पुलिस जांच में सामने आया है कि सिगरेट की इस नकली फैक्टरी की बिल्डिंग में बाहरी लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित थी। फैक्टरी का गेट आम लोगों के लिए नहीं खुलता था। कंटेनर के पहुंचने पर ही गेट खोला जाता था। इसके बाद माल को अंदर पहुंचाने और तैयार माल को बाहर भेजने का काम किया जाता था। इस व्यवस्था से फैक्टरी के अंदर चल रही गतिविधियों को आसपास के लोगों की नजर से दूर रखा जाता था।
फैक्टरी में करीब दो दर्जन श्रमिक काम करते थे। इनमें अधिकांश श्रमिक दूसरे जिलों के बताए जा रहे हैं। श्रमिकों के लिए इमारत के अंदर ही रहने और खाने की व्यवस्था की गई थी। दिन-रात काम होने के कारण श्रमिकों को बाहर जाने की जरूरत न पड़े, इसका भी पूरा इंतजाम किया गया था। इससे फैक्टरी में लगातार उत्पादन बढ़ाने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस जांच के बाद ही पता चलेगा कि यहां कितने समय से नकली सिगरेट का उत्पादन किया जा रहा था और अब तक कितना माल बाजार में खपाया जा चुका है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा है कि बिल्डिंग किसकी है और इस गिरोह में कौन-कौन शामिल है।
मशरूम की खेती की आड़ में गतिविधियां
फैक्टरी जिस बंद इमारत में संचालित हो रही थी, वहां मशरूम की खेती भी की जाती थी। इससे बाहरी लोगों को इमारत के अंदर होने वाली गतिविधियों को लेकर संदेह कम रहता था। पुलिस और कंपनी की टीम अब यह भी जांच कर रही है कि मशरूम की खेती कब से की जा रही थी और इसका इस्तेमाल अवैध गतिविधियों को छिपाने के लिए किया जा रहा था।
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हस्तिनापुर। दूधली खादर में जिस इमारत में नकली सिगरेट बनाने का खेल चल रहा था। वहां पर पुलिस के छापे के दौरान कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं पुलिस जांच में सामने आया है कि सिगरेट की इस नकली फैक्टरी की बिल्डिंग में बाहरी लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित थी। फैक्टरी का गेट आम लोगों के लिए नहीं खुलता था। कंटेनर के पहुंचने पर ही गेट खोला जाता था। इसके बाद माल को अंदर पहुंचाने और तैयार माल को बाहर भेजने का काम किया जाता था। इस व्यवस्था से फैक्टरी के अंदर चल रही गतिविधियों को आसपास के लोगों की नजर से दूर रखा जाता था।
फैक्टरी में करीब दो दर्जन श्रमिक काम करते थे। इनमें अधिकांश श्रमिक दूसरे जिलों के बताए जा रहे हैं। श्रमिकों के लिए इमारत के अंदर ही रहने और खाने की व्यवस्था की गई थी। दिन-रात काम होने के कारण श्रमिकों को बाहर जाने की जरूरत न पड़े, इसका भी पूरा इंतजाम किया गया था। इससे फैक्टरी में लगातार उत्पादन बढ़ाने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस जांच के बाद ही पता चलेगा कि यहां कितने समय से नकली सिगरेट का उत्पादन किया जा रहा था और अब तक कितना माल बाजार में खपाया जा चुका है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा है कि बिल्डिंग किसकी है और इस गिरोह में कौन-कौन शामिल है।
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मशरूम की खेती की आड़ में गतिविधियां
फैक्टरी जिस बंद इमारत में संचालित हो रही थी, वहां मशरूम की खेती भी की जाती थी। इससे बाहरी लोगों को इमारत के अंदर होने वाली गतिविधियों को लेकर संदेह कम रहता था। पुलिस और कंपनी की टीम अब यह भी जांच कर रही है कि मशरूम की खेती कब से की जा रही थी और इसका इस्तेमाल अवैध गतिविधियों को छिपाने के लिए किया जा रहा था।
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