फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Children with autism prefer solitude and speak less.

Meerut News: एकांत और कम बोलना पसंद करते हैं ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे

Thu, 02 Apr 2026 02:43 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 02 Apr 2026 02:43 AM IST
विज्ञापन
Children with autism prefer solitude and speak less.
मेरठ। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) एक जटिल तंत्रिका-विकासात्मक स्थिति है। जो आमतौर पर बचपन के शुरुआती वर्षों में दिखते हैं। ये अक्सर 12 से 24 महीने की उम्र के बीच स्पष्ट होने लगते हैं। इससे पीड़ित बच्चों में संपर्क, संचार, व्यवहार और सीखने की क्षमता कम होती है लेकिन सोचने की क्षमता अन्य सामान्य लोगों से कम नहीं होती। वह किसी न किसी क्षेत्र में अन्य लोगों से भी उत्तम कार्य कर सकते हैं। जिसको इनके माता-पिता को समझाना होगा।
विज्ञापन

विश्व ऑटिज्म दिवस की पूर्व संध्या पर लाला लाजपतराय मेडिकल कॉलेज की बाल चिकित्सा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपमा वर्मा से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि यह बीमारी बच्चों में बचपन से ही देखने को मिलती है। इन लक्षणों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है। सामाजिक संपर्क में चुनौतियों में आंखों का संपर्क न बनाना, अकेले रहना पसंद करना, भावनाओं को समझने में कठिनाई महसूस करने, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना भी एक प्रमुख लक्षण है। संचार में कमी में देर से बोलना और शब्दों को दोहराना शामिल है। कुछ बच्चे बोलने में असमर्थ हो सकते हैं या अशाब्दिक संचार कम करते हैं। व्यवहार में दोहराव और संवेदी मुद्दे भी देखे जाते हैं, जैसे बार-बार एक ही गतिविधि करना या हाथों को फड़फड़ाना। इन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन दो से तीन बच्चे ऑटिज्म लक्षणों वाले पहुंच रहे हैं। जागरूकता की जरूरत है।
विज्ञापन


ऑटिज्म की पहचान और प्रबंधन
ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है, बल्कि मस्तिष्क के काम करने का एक अलग तरीका है। यह किसी व्यक्ति के चरित्र या परवरिश की कमी का परिणाम नहीं होता है। प्रारंभिक पहचान और उचित हस्तक्षेप से बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण सुधार होता है। ऑटिज्म की समस्या से समाधान के लिए प्रभावी प्रबंधन है। जैसे स्पीच थेरेपी, व्यावहारिक थेरेपी और व्यावसायिक थेरेपी बच्चों को कौशल विकसित करने में सहायक होती हैं। यदि बच्चे में ऑटिज्म के उपरोक्त लक्षण दिखें तो माता-पिता को तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञ या पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना उचित है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed