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Meerut News: परिषदीय स्कूलों के बच्चे सीखेंगे बागवानी के गुर
Mon, 07 Oct 2024 02:02 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Mon, 07 Oct 2024 02:02 AM IST
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शामली। जनपद में संचालित परिषदीय विद्यालयों में वाटिकाएं विकसित की जाएंगी। इनके माध्यम से बच्चों को बागवानी के गुर सिखाएं जाएंगे। इसको लेकर विभाग को ग्रांट जारी कर दी गई है। हर परिषदीय विद्यालय को पांच हजार रुपये की धनराशि दी जाएगी।
परिषदीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों की तर्ज पर व्यवस्थित किया जा रहा है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में किचन गार्डन बनेंगे। इससे स्कूल परिसर हरा-भरा दिखने के साथ ही बच्चों को फसलों के प्रकार, फसल चक्र आदि का ज्ञान मिलेगा। साथ ही वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होंगे। इन किचन गार्डनों में लौकी, तोरई, करेला, भिंडी जैसी मौसमी सब्जियां उगाई जाएंगी। वहीं फलों में केला, पपीता, अनार और अमरूद के पौधे लगाए जाएंगे। वाटिका के रखरखाव के लिए प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। विद्यार्थियों की मदद से ही इसे संवारा जाएगा।
-पर्यावरण के प्रति भी किया जाएगा जागरूक
बीएसए लता राठौर ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को पर्यावरण के प्रति सजग करने के लिए जागरूक किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण के प्रति शुरूआत से ही जिम्मेदारी का भाव पैदा हो, इसलिए यह फहल की जा रही है। न्याय पंचायत व ब्लॉक स्तर पर अच्छी वाटिकाओं को सूचीबद्ध किया जाएगा। शिक्षक व छात्र इसके माध्यम से किस तरह के प्रयोग कर रहें हैं, इसकी जानकारी दूसरे विद्यालयों को भी दी जाएगी। वाटिकाओं की निगरानी शासन स्तर से की जाएगी। स्कूलों का स्थलीय निरीक्षण करते हुए इसका सत्यापन किया जाएगा।
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-एमडीएम में ताजी सब्जियों का होगा प्रयोग
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि स्कूलों में पैदा होने वाली सब्जियों को बच्चों के लिए बनने वाले एमडीएम में प्रयोग किया जाएगा। इससे बच्चों को ताजी सब्जियों का स्वाद मिलेगा, वहीं बच्चों को कौन सी सब्जी कब पैदा होती है, फलों के सीजन के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी।
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परिषदीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों की तर्ज पर व्यवस्थित किया जा रहा है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में किचन गार्डन बनेंगे। इससे स्कूल परिसर हरा-भरा दिखने के साथ ही बच्चों को फसलों के प्रकार, फसल चक्र आदि का ज्ञान मिलेगा। साथ ही वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होंगे। इन किचन गार्डनों में लौकी, तोरई, करेला, भिंडी जैसी मौसमी सब्जियां उगाई जाएंगी। वहीं फलों में केला, पपीता, अनार और अमरूद के पौधे लगाए जाएंगे। वाटिका के रखरखाव के लिए प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। विद्यार्थियों की मदद से ही इसे संवारा जाएगा।
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-पर्यावरण के प्रति भी किया जाएगा जागरूक
बीएसए लता राठौर ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को पर्यावरण के प्रति सजग करने के लिए जागरूक किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण के प्रति शुरूआत से ही जिम्मेदारी का भाव पैदा हो, इसलिए यह फहल की जा रही है। न्याय पंचायत व ब्लॉक स्तर पर अच्छी वाटिकाओं को सूचीबद्ध किया जाएगा। शिक्षक व छात्र इसके माध्यम से किस तरह के प्रयोग कर रहें हैं, इसकी जानकारी दूसरे विद्यालयों को भी दी जाएगी। वाटिकाओं की निगरानी शासन स्तर से की जाएगी। स्कूलों का स्थलीय निरीक्षण करते हुए इसका सत्यापन किया जाएगा।
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-एमडीएम में ताजी सब्जियों का होगा प्रयोग
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि स्कूलों में पैदा होने वाली सब्जियों को बच्चों के लिए बनने वाले एमडीएम में प्रयोग किया जाएगा। इससे बच्चों को ताजी सब्जियों का स्वाद मिलेगा, वहीं बच्चों को कौन सी सब्जी कब पैदा होती है, फलों के सीजन के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी।