सीएए बवाल में नाबालिगों की भूमिका की जांच करने मुजफ्फरनगर पहुंची बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम
- बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष व सदस्या ने की लोगों से वार्ता
- बवाल की चपेट में आए दो बैंकों के शाखा प्रबंधकों के भी किए बयान दर्ज
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विस्तार
सीएए के विरोध में गत 20 दिसंबर 2019 को शहर क्षेत्र में जमकर बवाल हुआ था। मदीना चौक, मेरठ रोड, मीनाक्षी चौक व महावीर चौक पर हुए बवाल में बड़े पैमाने पर वाहनों, दुकानों को फूंक दिया गया था। इस बवाल में नाबालिगों के भी बड़ी तादाद में मौजूद रहने की बात जांच में सामने आई थी।
पुलिस ने सादात हॉस्टल के छात्रों समेत जिन लोगों को नामजद किया था, उनमें भी कई नाबालिग पाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग को जांच के आदेश दिए थे। शनिवार को आयोग अध्यक्ष डॉ विशेष गुप्ता और सदस्या जया सिंह शहर में पहुंचे।
टीम ने सबसे पहले टीम मीनाक्षी चौक पर पहुंचकर स्थानीय लोगों से वार्ता की। इसके बाद टीम ने आर्यसमाज रोड पर भारत ऑटो मोबाइल, सुपर ऑटो मोटर्स, बेस्ट ऑटो डीलर व ब्राइट ऑटो मोबाइल समेत कई अन्य दुकानों के व्यापारियों से भी बवाल की जानकारी ली। स्थानीय लोगों व व्यापारियों ने जांच टीम को यही बताया कि वे बवाल शुरू होते ही वहां से चले गए थे।
किसके आदेश से किया गया कॉलेज का गेट बंद ?
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने इस्लामिया इंटर कॉलेज पहुंचकर प्रधानाचार्य सलीम अहमद और चौकीदार फजल हक से पूछताछ की। टीम ने बवाल के दौरान कॉलेज का गेट बंद किए जाने को लेकर जानकारी ली कि किसके आदेश पर कॉलेज का मेन गेट बंद किया गया था ? इस पर कॉलेज प्रबंधन ने चुप्पी साध ली।
बैंकों को फूंकने पर आमादा थे उपद्रवी
आयोग की टीम आर्यसमाज रोड स्थित यूको बैंक व कोटक महिंद्रा बैंक भी पहुंची। यूको बैंक मैनेजर चंद्रकला ने टीम को बताया कि बवाल करती भीड़ बैंक को फूंकने पर आमादा थी। बैंक में घुसकर तोड़फोड़ की गई और कर्मचारियों से बदसलूकी की गई। पुलिस ने बाद में बैंक कर्मचारियों को रेस्क्यू कर वहां से सकुशल बाहर निकाला। कोटक महिंद्रा बैंक के शाखा प्रबंधक मनोज कुमार ने भी उपद्रवियों द्वारा बैंक में घुसकर तोड़फोड़ व आगजनी का प्रयास करने की जानकारी दी।
सीएए को लेकर हुए बवाल में पुलिस ने सादात हॉस्टल के छात्रों को भी मुकदमे में नामजद किया था। कुछ छात्रों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया था। हालांकि कुछ दिन बाद ही छात्रों को क्लीनचिट देते हुए न केवल मुकदमे से उनके नाम निकाले गए, बल्कि सभी छात्रों को जेल से बाहर भी निकलवाया गया था। टीम ने बवाल में नामजद व जेल भेजे गए छात्रों के साथ ही चश्मदीदों से भी वार्ता करने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी छात्र आयोग की टीम को हॉस्टल में नहीं मिला।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ विशेष गुप्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वे बवाल की जांच के लिए आए हैं। बवाल में नाबालिगों के साथ ही पुलिस की भूमिका की भी जांच की जाएगी। सादात हॉस्टल के छात्र टीम को नहीं मिल पाए हैं, जिनके लिए दोबारा आकर उनके बयान दर्ज करने का प्रयास किया जाएगा। फाइनल जांच रिपोर्ट शासन को दी जाएगी, जहां से रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी।