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फर्जी रसीद काटकर सैकड़ों लोगों से धोखाधड़ी

Fri, 05 Jul 2019 02:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jul 2019 02:12 AM IST
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cheating with rakshapuram resident
cheating with rakshapuram resident
मेरठ। गंगानगर योजना की रक्षापुरम कॉलोनी में रहने वाले सैंकड़ों लोगों को मेंटीनेंस शुल्क की फर्जी रसीद देकर धोखाधड़ी की गई। यहां के लोगों के पास तो साल दर साल की रसीदें उपलब्ध हैं, लेकिन प्राधिकरण के पास उनके दिए गए पैसे का कोई ब्यौरा नहीं है। ऐसे में लोग खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। प्राधिकरण की ओर से दोबारा मेंटीनेंस शुल्क जमा करने के आदेश पर लोग आक्रोशित हो गए।
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ऐसे पकड़ में आया मामला
करीब 20 दिन पहले एमडीए के कर्मचारियों ने क्षेत्र में कैंप लगाया। इसमें निवासियों से अपनी समस्या रखने और मेंटीनेंस शुल्क जमा करने की बात कही। कई लोग यहां पर बकाया मेंटीनेंस शुल्क की रकम देखकर चौंक पड़े। एमडीए कर्मचारियों ने निवासियों से पुरानी रसीद लाकर देने को कहा तो लोगों ने रसीद लगाकर दिखा दी। लेकिन एमडीए के पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं था। अब सवाल उठ रहा है कि अगर मेंटीनेंस बिल जमा नहीं किया गया तो अगले वर्ष के शुल्क के साथ पुराना शुल्क क्यों नहीं लगाकर भेजा गया। वहीं, एमडीए ने मेंटीनेंस शुल्क न जमा करने पर आंवटियों को नोटिस या वसूली पत्र भी नहीं भेजे।
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हाउस टैक्स के साथ मेंटीनेंस शुल्क भी
रक्षापुरम के निवासी हाउस टैक्स के साथ मेंटीनेंस शुल्क भी दे रहे हैं। निवासियों का कहना है कि जब हमसे हाउस टैक्स लिया जा रहा है तो एमडीए मेंटीनेंस शुल्क क्यों वसूल रहा है। इसका क्या औचित्य है। वहीं, हर साल मेंटीनेंस शुल्क में दस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर भार डाल दिया जाता है।
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प्रतिवर्ष बदलता रहता है शुल्क
वर्ष 2005 - 1440 रुपये
वर्ष 2006 - 3360 रुपये
वर्ष 2008 - 3840 रुपये
वर्ष 2011 - 1920 रुपये
वर्ष 2015 - 5520 रुपये
वर्ष 2017 - 6072 रुपये
बोले पीड़ित निवासी
एमडीए ने धोखा किया है। जिसने भी इस कार्य को अंजाम दिया है, कार्रवाई होनी चाहिए। हमारे पास सभी रसीदें मौजूद हैं।
राजपाल ढ़ाका, स्थानीय निवासी
यह तो धोखाधड़ी है। हमने साल दर साल अनुरक्षण शुल्क समय पर जमा किया था। इससे ज्यादा बड़ा धोखा कुछ नहीं हो सकता।
मूलचंद वर्मा, स्थानीय निवासी
हमने एमडीए कर्मचारियों को कैंप में अनुरक्षण शुल्क जमा कराया। अब बकाया की बात कर रहे हैं। रसीद हमारे पास हैं। यह कैसे हो गया।
एसपी रस्तोगी, स्थानीय निवासी
मैंने तो एमडीए को 15 अगस्त तक का समय दिया है। अगर मेरे इस मामले का निस्तारण नहीं किया गया तो आत्मदाह करूंगा।
जितेंद्र सिंह अहलावत, भूतपूर्व सैनिक
वर्जन=========
मामले की जांच अधीक्षण अभियंता को सौंपी गई है। प्राथमिक जांच में मेट की भूमिका संदिग्ध लग रही है। उसे निलंबित कर एफआईआर दर्ज कराई गई है। जांच पूरी होने के बाद जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। -राजेश पांडेय, एमडीए वीसी
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