फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Chaudhari Charan Singh University VC and former VC including 13 convicted in corruption case

चौधरी चरण सिंह विश्विद्यालय के वीसी और पूर्व वीसी समेत 13 भ्रष्टाचार में दोषी करार

Thu, 12 Jul 2018 04:05 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 12 Jul 2018 04:05 PM IST
विज्ञापन
Chaudhari Charan Singh University VC and former VC including 13 convicted in corruption case
एनके तनेजा और एसके काक - फोटो : अमर उजाला

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के पूर्व कुलपति प्रो. एसके काक और वर्तमान कुलपति प्रो. एनके तनेजा समेत 13 अफसरों-कर्मचारियों और कॉलेज संचालक को विजिलेंस ने भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार दिया है। 

विज्ञापन


आरोप पत्र दाखिल करने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। शासन से अनुमोदन के बाद सभी आरोपियों को जेल जाना पड़ेगा। प्रो. एसके काक सीसीएसयू के अलावा महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी नोएडा के भी वाइस चांसलर रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर मेरठ की तरफ से 06 दिसंबर 2017 को मेडिकल थाने में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप थे कि कुलपति प्रो. एसके काक ने पद पर रहते हुए आपसी हित लाभ देखकर कर्मचारियों की नियुक्तियां कीं। विजिलेंस ने खुली जांच में माना कि कुलपति विवि के प्रिंसीपल एक्जीक्यूटिव एवं एकेडमिक अधिकारी हैं। कॉलेजों की संबद्घता प्रदान किए जाने में जो विधिक प्रावधान हैं, उनका पालन प्रो. काक ने नहीं किया। 
विज्ञापन


मौके पर नहीं मिला था भवन
रुद्राक्ष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मामले में पाया गया कि सत्र 2009-10 के लिए 100 सीटों की संबद्धता किए जाने के संबंध में कुलपति प्रो. एसके काक ने निरीक्षण मंडल गठित किया। उक्त संस्थान के निरीक्षण के दौरान कमेटी को मौके पर संस्थान का कोई भवन नहीं मिल। जबकि इस मामले में तत्कालीन कुल सचिव वीके सिन्हा ने उच्च शिक्षा अनुभाग को बताया था कि तीन सदस्यीय समिति द्वारा निरीक्षण की आख्या मिलने के बाद संस्तुति दी गई। प्रो. एनके तनेजा तत्कालीन संयोजक निरीक्षण मंडल ने लिखित रूप से 4 मार्च 2009 को बताया कि वे उक्त कॉलेज में निरीक्षण के लिए अकेले गए थे। उक्त संस्थान के निरीक्षण के संबंध में डॉ. शिखा चतुर्वेदी ने निरीक्षण करने के संबंध में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया। इससे स्पष्ट है कि प्रो. एसके काक ने स्ववित्त पोषित संस्थानों को संबद्धता दिए जाने में नियमों का उल्लंघन किया। विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक शासन से अनुमोदन के बाद गिरफ्तारी कर आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

तत्कालीन वीसी प्रो. एसके काक, तत्कालीन कुलसचिव वीके सिन्हा, तत्कालीन कुलसचिव प्रभात रंजन, तत्कालीन उप कुलसचिव प्रशासन नारायण प्रसाद, तत्कालीन कुलसचिव प्रशासन रामकुमार, तत्कालीन सहायक लेखा अधीक्षक हरवंश लाल, तत्कालीन वरिष्ठ सहायक अरविंद कुमार, प्रभारी सामान्य एसएस शर्मा, पीए शिव कुमार गुप्ता, वित्त नियंत्रक अतुल कुमार, तत्कालीन प्रवक्ता अर्थशास्त्र प्रो. एनके तनेजा वर्तमान में कुलपति, प्रवक्ता डॉ. शिखा चतुर्वेदी, रुद्राक्ष इंस्टीट्यूट के सचिव अमित गिरि शामिल थे।

उम्रकैद तक हो सकती है सजा 
वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल बख्शी बताते हैं कि जो धाराएं लगाई गई हैं, उनमें दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। जांच एजेंसी को पहले ऐसे मामलों में शासन से अनुमोदन मिलने के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करनी होती थी। उसके बाद गिरफ्तारी होती थी। लेकिन अब शासन से अनुमोदन के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने से पहले गिरफ्तारी होती है। अब देखना ये है शासन क्या अनुमोदन देता हैं। 

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed