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णमोकार महामंत्र का जाप ही परम औषधि : भाव भूषण
Sat, 23 May 2026 06:56 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sat, 23 May 2026 06:56 PM IST
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर
श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे विधान में देशभर से पहुंचे श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में आयोजित 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के तीसरे दिन भगवान शांतिनाथ की प्राचीन प्रतिमा के समक्ष विधान में देशभर से श्रद्धालु पहुंचे।
कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण, दिग्वंदन, पात्र व भूमि शुद्धि तथा जिनेंद्र भगवान के अभिषेक से हुई। शनिवार को शांतिधारा का सौभाग्य कलादेवी परिवार, प्रवीण जैन को प्राप्त हुआ। उन्होंने सौधर्म इंद्र बनकर भगवान को पांडुक शिला पर विराजमान कर प्रथम अभिषेक व शांतिधारा की। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने श्रद्धालुओं का तिलक व माल्यार्पण कर स्वागत किया। बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने शांतिधारा मंत्रों का वाचन कराया।
मंगल प्रवचन में मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि दिगंबर मुनिराज समस्त परिग्रहों के त्यागी होते हैं और जिनेंद्र भगवान की भक्ति व णमोकार महामंत्र का जाप ही परम औषधि है। उन्होंने श्रीपाल, आचार्य वादिराज और सनत कुमार चक्रवर्ती के प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जिनवचन और जिनभक्ति से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं। तीसरे दिन विधान में 130 परिवारों ने भाग लिया। संध्याकालीन बेला में संगीतमय महाआरती और धार्मिक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष जिवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन सहित अनेक पदाधिकारियों व श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।
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हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में आयोजित 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के तीसरे दिन भगवान शांतिनाथ की प्राचीन प्रतिमा के समक्ष विधान में देशभर से श्रद्धालु पहुंचे।
कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण, दिग्वंदन, पात्र व भूमि शुद्धि तथा जिनेंद्र भगवान के अभिषेक से हुई। शनिवार को शांतिधारा का सौभाग्य कलादेवी परिवार, प्रवीण जैन को प्राप्त हुआ। उन्होंने सौधर्म इंद्र बनकर भगवान को पांडुक शिला पर विराजमान कर प्रथम अभिषेक व शांतिधारा की। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने श्रद्धालुओं का तिलक व माल्यार्पण कर स्वागत किया। बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने शांतिधारा मंत्रों का वाचन कराया।
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मंगल प्रवचन में मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि दिगंबर मुनिराज समस्त परिग्रहों के त्यागी होते हैं और जिनेंद्र भगवान की भक्ति व णमोकार महामंत्र का जाप ही परम औषधि है। उन्होंने श्रीपाल, आचार्य वादिराज और सनत कुमार चक्रवर्ती के प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जिनवचन और जिनभक्ति से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं। तीसरे दिन विधान में 130 परिवारों ने भाग लिया। संध्याकालीन बेला में संगीतमय महाआरती और धार्मिक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष जिवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन सहित अनेक पदाधिकारियों व श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर
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