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Meerut News: आचार संहिता में 650 व्यापारियों के पुनर्वास की घोषणा पर उठाए सवाल
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आचार संहिता में 650 व्यापारियों के पुनर्वास की घोषणा पर उठाए सवाल
.. निर्वाचन आयोग से मामले का संज्ञान लेने की मांग, लिखित नीति और समयसीमा के बिना आश्वासन पर उठाए सवाल
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ।
सेंट्रल मार्केट, शास्त्रीनगर के करीब 650 प्रभावित व्यापारियों के पुनर्वास को लेकर 23 सितंबर को सर्किट हाउस में भाजपा सांसद, मंत्री, विधायक और महापौर की प्रेस वार्ता में की गई घोषणा पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप जैन ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आचार संहिता लागू होने के दौरान पुनर्वास नीति और लीज पर दुकानें देने की घोषणा किस आधार पर की गई।
सुदीप जैन ने निर्वाचन आयोग के 26 दिसंबर 2016 के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव अवधि में मतदाताओं को प्रभावित करने वाली नई नीति या कार्यक्रम की घोषणा पर रोक है। उन्होंने पूछा कि यदि पुनर्वास की नीति पहले से तैयार थी तो आचार संहिता में घोषणा क्यों की गई और यदि नीति तैयार नहीं थी तो 650 व्यापारियों को दुकानें देने का आधार क्या है।
उन्होंने निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर घोषणा की वैधता स्पष्ट करने की मांग की। जैन ने कहा कि व्यापारियों को जुबानी आश्वासन के बजाय लिखित नीति, स्पष्ट समयसीमा और पारदर्शी पुनर्वास व्यवस्था चाहिए।
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.. निर्वाचन आयोग से मामले का संज्ञान लेने की मांग, लिखित नीति और समयसीमा के बिना आश्वासन पर उठाए सवाल
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ।
सेंट्रल मार्केट, शास्त्रीनगर के करीब 650 प्रभावित व्यापारियों के पुनर्वास को लेकर 23 सितंबर को सर्किट हाउस में भाजपा सांसद, मंत्री, विधायक और महापौर की प्रेस वार्ता में की गई घोषणा पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप जैन ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आचार संहिता लागू होने के दौरान पुनर्वास नीति और लीज पर दुकानें देने की घोषणा किस आधार पर की गई।
सुदीप जैन ने निर्वाचन आयोग के 26 दिसंबर 2016 के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव अवधि में मतदाताओं को प्रभावित करने वाली नई नीति या कार्यक्रम की घोषणा पर रोक है। उन्होंने पूछा कि यदि पुनर्वास की नीति पहले से तैयार थी तो आचार संहिता में घोषणा क्यों की गई और यदि नीति तैयार नहीं थी तो 650 व्यापारियों को दुकानें देने का आधार क्या है।
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उन्होंने निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर घोषणा की वैधता स्पष्ट करने की मांग की। जैन ने कहा कि व्यापारियों को जुबानी आश्वासन के बजाय लिखित नीति, स्पष्ट समयसीमा और पारदर्शी पुनर्वास व्यवस्था चाहिए।
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