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ऑनलाइन ठगी में जांच एजेंसियों की लिस्ट लीक, 50 से अधिक नाम शामिल

Thu, 23 Feb 2017 02:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Thu, 23 Feb 2017 02:53 PM IST
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central investigation agency list leak in online cheating
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

ऑनलाइन ट्रेडिंग में अब नया खेल शुरू हो गया है। फर्मों की ओर से अचानक कारोबार बंद करने का प्रार्थना पत्र देने पर सवाल उठ रहे हैं। केंद्रीय जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि उनकी ओर से दी गई लिस्ट किसी स्तर पर लीक हुई है। खास बात यह है कि नोएडा और गाजियाबाद स्थित जिन फर्मों के नाम लिस्ट में थे, उनमें से अधिकांश ने ऐसे आवेदन किए हैं। यही नहीं, वेबवर्क ट्रेड लिंक व ऐडबुक मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े अहम दस्तावेज लीक होने की बात पहले ही सामने आ चुकी है।

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पुलिस के साथ करीब 10 दिन पहले आयकर विभाग और सेंट्रल एक्साइज की सूची साझा की गई थी। सूत्रों का कहना है कि इस सूची में करीब 11 ऐसी कंपनियों ने लगभग तीन महीने पहले अपना पंजीकरण कराया था। इनमें से हर कंपनी ने लगभग 40 से 50 करोड़ रुपये का तिमाही टैक्स भी जमा कराया। इन तमाम कंपनियों ने पंजीकरण के समय अपनी कैपिटल वैल्यू बेहद कम दिखाई। किसी ने एक लाख दिखाई तो किसी ने पांच लाख रुपये की ही जानकारी दी।
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घोटाला सामने आते ही अर्जी
इस बीच अनुभव मित्तल की कंपनी एब्लेज इंफो सॉल्यूशंस का 37 अरब रुपये का घोटाला सामने आने के बाद केंद्र सरकार की तरफ से तमाम सरकारी एजेंसियां ऑनलाइन ट्रेडिंग के कारोबार में जुड़ीं कंपनियों की कुंडली खंगालने में लग गई थीं। डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस (डीजीसीईआई) की मदद से संदिग्ध कंपनियों की लिस्ट तैयार की गई। यह सूची पुलिस के साथ भी साझा की गई। सूत्रों का कहना है कि सूची साझा होने के दो या तीन दिन बाद ही कंपनियों ने अपना कारोबार बंद करने की अर्जी देनी शुरू कर दी। ऐसे में जांच एजेंसियों को आशंका है कि किसी स्तर पर कंपनियों तक हर सूचना पहुंच रही है।
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फाइल दरोगा जी के पास
दो दिन पहले ही वेबवर्क से जुड़े अहम कागजात लीक होने का मामला सामने आया था। इसमें पुलिस का जांच अधिकारी एक ऑडियो टेप में यह कहते हुए भी सुनाई पड़ रहा है कि वह मेरठ आया है। लेकिन फाइल दरोगा जी के पास है। दरोगा से यह पूछने की बात कहता है कि फाइल से गोपनीय दस्तावेज कैसे लीक हुए। बताया जा रहा है कि फाइल में लगी एक सूची में वेबवर्क में मोटा पैसा लगाने वाले 50 से अधिक लोगों के नाम शामिल हैं। आरोपी बनाए गए कुछ लोगों तक इसकी जानकारी पहुंच गई।


उच्चस्तरीय जांच की मांग
उधर, वेबवर्क के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे अमित किशोर जैन से अपनी जान को खतरा बताते हुए राज्यपाल, मुख्यमंत्री और डीजीपी यूपी को पत्र लिखा है। इसमें मांग की है कि दस्तावेज लीक होने से उनकी जान को खतरा है। उन्होंने नोएडा पुलिस के बजाय मामले की जांच एसआईटी या फिर किसी केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग की है।

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