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Meerut News: रोडवेज बसों से डीजल चोरी पर सेंसर करेगा अलर्ट
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मेरठ, मुरादाबाद और सहारनपुर डिपो की दो-दो बसों में एक माह से चल रहा ट्रायल हुआ सफल
अधिकारियों के मोबाइल से रहेगा अटैच, लीकेज तक की मिलेगी जानकारी
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। अब रोडवेज बसों से डीजल चोरी अथवा लीकेज का संदेश सेंसर तुरंत अफसरों को देगा। इसका मेरठ, मुरादाबाद और सहारनपुर डिपो की दो-दो बस में एक माह से चल रहा ट्रायल सफल हो गया है। प्रधान प्रबंधक जल्द ट्रायल की रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपेंगे। प्रदेश की सभी रोडवेज बसों में यह सेंसर लगाया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि तमाम प्रयास के बावजूद रोडवेज बसों में डीजल की खपत कम नहीं हो रही है। इससे विभाग को नुकसान हो रहा है। लीकेज से डीजल के बर्बाद होने की बात भी सामने आ रही है। कोई पुख्ता तथ्य नहीं मिलता है, इसलिए किसी पर कार्रवाई भी नहीं हो पाती है। प्रधान प्रबंधक रविंद्र सिंह ने सेंसर से डीजल की खपत रोकने के लिए मेरठ, मुरादबाद और सहारनपुर डिपो की दो-दो बसों को चुना। इन बसों की डीजल टंकी के अंदर और इंजन की तरफ एक-एक सेंसर लगवाया। सेंसर को उन्होंने अपने मोबाइल से कनेक्ट कर लिया। इसके बाद सभी बसों की टंकी डीजल से फुल करवाकर संचालित करवाई गई। इन बसों ने कितना सफर किया और कितने डीजल की खपत उनके मोबाइल पर आती रही। बतौर ट्रायल डीजल से भरी बसों से डीजल निकलवाया गया, जिसका भी मेसेज तुरंत मिला। करीब 25 दिन तक तीनों जिलों की बसों की मॉनीटरिंग की गई, जो सफल रही। एआरएम मेरठ डिपो जगदीश कुमार ने बताया कि विगत दिनों वर्कशाप में खड़ी दोनों बसों में लीकेज किया गया, जैसे ही लीकेज हुआ वैसे ही मेसेज मिल गया।
बीएस-6 बसें रोडवेज में अनुबंध पर चलाने की तैयारी
मेरठ। रोडवेज अफसरों ने सोमवार को अनुबंध से ठिठक रहे निजी बस ऑपरेटर्स संग करीब तीन घंटे बैठक की। उन्होंने बताया कि 65-66 फीसदी यात्रियों के लोड से भी फायदा हो सकता है। डीजल की बीएस-6 (भारत स्टेज-6) बसों को जल्द अनुबंध पर चलवाने का भरोसा दिया।
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प्रदेश सरकार ने हर डिपो में 75 फीसदी अनुबंधित और 25 फीसदी रोडवेज बसें चलाने का आदेश दिया है। रोडवेज अधिकारी लगातार निजी बस आपरेटर्स को अनुबंध के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, मगर तमाम शंकाओं के चलते चंद आपरेटर्स ही आगे आए हैं। इसके मद्देनजर सोमवार को क्षेत्रीय प्रबंधक और आरटीओ ने आपरेटर्स के साथ बैठक की। अफसरों ने बताया कि यह गलत है कि 75 फीसदी से कम सवारियां होने पर घाटा होगा। हकीकत में 65-66 फीसदी सवारियां होने पर भी फायदा होगा। आपरेटर्स ने डीजल की बीएस-6 बसें अनुबंध पर चलवाने की अनुमति की बात कही। ब्यूरो
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अधिकारियों के मोबाइल से रहेगा अटैच, लीकेज तक की मिलेगी जानकारी
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। अब रोडवेज बसों से डीजल चोरी अथवा लीकेज का संदेश सेंसर तुरंत अफसरों को देगा। इसका मेरठ, मुरादाबाद और सहारनपुर डिपो की दो-दो बस में एक माह से चल रहा ट्रायल सफल हो गया है। प्रधान प्रबंधक जल्द ट्रायल की रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपेंगे। प्रदेश की सभी रोडवेज बसों में यह सेंसर लगाया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि तमाम प्रयास के बावजूद रोडवेज बसों में डीजल की खपत कम नहीं हो रही है। इससे विभाग को नुकसान हो रहा है। लीकेज से डीजल के बर्बाद होने की बात भी सामने आ रही है। कोई पुख्ता तथ्य नहीं मिलता है, इसलिए किसी पर कार्रवाई भी नहीं हो पाती है। प्रधान प्रबंधक रविंद्र सिंह ने सेंसर से डीजल की खपत रोकने के लिए मेरठ, मुरादबाद और सहारनपुर डिपो की दो-दो बसों को चुना। इन बसों की डीजल टंकी के अंदर और इंजन की तरफ एक-एक सेंसर लगवाया। सेंसर को उन्होंने अपने मोबाइल से कनेक्ट कर लिया। इसके बाद सभी बसों की टंकी डीजल से फुल करवाकर संचालित करवाई गई। इन बसों ने कितना सफर किया और कितने डीजल की खपत उनके मोबाइल पर आती रही। बतौर ट्रायल डीजल से भरी बसों से डीजल निकलवाया गया, जिसका भी मेसेज तुरंत मिला। करीब 25 दिन तक तीनों जिलों की बसों की मॉनीटरिंग की गई, जो सफल रही। एआरएम मेरठ डिपो जगदीश कुमार ने बताया कि विगत दिनों वर्कशाप में खड़ी दोनों बसों में लीकेज किया गया, जैसे ही लीकेज हुआ वैसे ही मेसेज मिल गया।
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बीएस-6 बसें रोडवेज में अनुबंध पर चलाने की तैयारी
मेरठ। रोडवेज अफसरों ने सोमवार को अनुबंध से ठिठक रहे निजी बस ऑपरेटर्स संग करीब तीन घंटे बैठक की। उन्होंने बताया कि 65-66 फीसदी यात्रियों के लोड से भी फायदा हो सकता है। डीजल की बीएस-6 (भारत स्टेज-6) बसों को जल्द अनुबंध पर चलवाने का भरोसा दिया।
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प्रदेश सरकार ने हर डिपो में 75 फीसदी अनुबंधित और 25 फीसदी रोडवेज बसें चलाने का आदेश दिया है। रोडवेज अधिकारी लगातार निजी बस आपरेटर्स को अनुबंध के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, मगर तमाम शंकाओं के चलते चंद आपरेटर्स ही आगे आए हैं। इसके मद्देनजर सोमवार को क्षेत्रीय प्रबंधक और आरटीओ ने आपरेटर्स के साथ बैठक की। अफसरों ने बताया कि यह गलत है कि 75 फीसदी से कम सवारियां होने पर घाटा होगा। हकीकत में 65-66 फीसदी सवारियां होने पर भी फायदा होगा। आपरेटर्स ने डीजल की बीएस-6 बसें अनुबंध पर चलवाने की अनुमति की बात कही। ब्यूरो