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रामचरित मानस और श्रीमद्भागवत गीता में कोर्स कराएगी सीसीएसयू
Tue, 22 Sep 2020 03:22 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
माई सिटी रिपोर्टर, मेरठ
माई सिटी रिपोर्टर, मेरठ
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Tue, 22 Sep 2020 03:22 PM IST
सार
- एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लगी मुहर, नई शिक्षा नीति को भी स्वीकृति
- एमफिल कोर्स बंद, एमएससी एजी हॉर्टीकल्चर कोर्स फिर से होगा शुरू
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श्रीमद्भागवत
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विस्तार
समाज की संकीर्णता को दूर करने के लिए धार्मिक किताबें पढ़ने और उसके भीतर छिपे विज्ञान को बाहर लाकर व्यवहारिक सामाजिक बदलाव लाने के उद्देश्य से सीसीएसयू रामचरित मानस और श्रीमद्भागवत में सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स शुरू करेगा। सोमवार को कैंपस में ऑनलाइन हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इन दोनों कोर्सों पर मुहर लग गई है। तीन सदस्य समिति बनाकर पूरी रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है। सर्टिफिकेट कोर्स एक वर्ष और डिप्लोमा कोर्स दो साल का होगा।
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कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में सोमवार को ऑनलाइन माध्यम से एकेडमिक काउंसिल की बैठक हुई। इसमें नई शिक्षा नीति के अनुसार एमफिल पाठ्यक्रमों को समाप्त कर दिया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किए जाने के लिए सभी संकायाध्यक्षों को निर्देशित किया। साथ ही बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक बुलाकर नई शिक्षा नीति के अनुसार पाठ्यक्रम निर्धारित किये जाने की स्वीकृति दी गई।
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बीएससी ऑप्टोमेंटरी पाठ्यक्रम को विज्ञान संकाय से चिकित्सा संकाय में परा चिकित्सकीय पाठ्यक्रम के रूप में सम्मिलित किए जाने की स्वीकृति दी गई। बीएससी नर्सिंग एवं पोस्ट बेसिक नर्सिंग पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्षों में सीएचओ कोर्स सत्र 2019-2020 से अंगीकार करने की स्वीकृति प्रदान की गई। एमएससी एजी हार्टीकल्चर कोर्स इस बार से फिर शुरू होगा।
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कार्य परिषद के सदस्य द्वारा अनुमोदित किए जाने पर एकेडमिक काउंसिल द्वारा रामचरित्र मानस में विज्ञान एवं श्रीमद्भागवत गीता में विज्ञान का 1 वर्ष का सर्टिफिकेट कोर्स तथा 2 वर्षीय डिप्लोमा कोर्स शुरू करने के लिए तीन सदस्य कमेटी का गठन किया गया। कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने समिति से दूसरे विवि में चल रहे कोर्स पर संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट जल्द देने को कहा। अगले सत्र से यह कोर्स शुरू हो जाएंगे। इसके अलावा विभिन्न पाठ्यक्रम के विषयों के सिलबेस के संबंध में बोर्ड ऑफ स्ट्डीज द्वारा लिए गए निर्णयों पर अनुमोदन प्रदान किया गया।
लेटरल एंट्री से प्रवेश को अनुमति
किसी विद्यार्थी के हाईस्कूल उत्तीर्ण होने के बाद दो वर्ष का आईटीआई डिप्लोमा और इंटरमीडिएट एक विषय के साथ उत्तीर्ण होने के बाद विवि द्वारा संचालित बीए-बीकॉम पाठ्यक्रम में प्रवेश की स्वीकृति प्रदान की गई। इसी प्रकार बीएससी-बीटेक पाठ्यक्रमों में किसी विद्यार्थी द्वारा हाईस्कूल यूपी बोर्ड के उत्तीर्ण होने के बाद दो वर्ष का या तीन वर्ष का इलेक्ट्रॉनिक्स कंप्यूटर साइंस इन्फॉमेशन टेक्नोलॉजी का आईटीआई, पॉलीटेक्निक डिप्लोमा और इंटरमीडिएट एकल विषय (हिंदी) यूपी बोर्ड के साथ उत्तीर्ण होने के बाद बीएससी (गणित) बीएससी (कंप्यूटर साइंस) बीटेक (इलेक्ट्रोनिक्स) बीटेक (कंप्यूटर साइंस) बीसीए पाठ्यक्रमों में वर्ष 2020-21 से प्रवेश की स्वीकृति प्रदान की गई।
शोध के मूल्यांकन में किया बदलाव
विवि ने शोध के मूल्यांकन में थोड़ा बदलाव किया है। शोध ग्रंथ को पहले तीन शिक्षकों के पास जांचने के लिए भेजा जाता था, उनमें से एक भी ग्रंथ को अगर निरस्त कर देता था तब वह निरस्त ही माना जाता था। लेकिन अब चौथे शिक्षक के पास ग्रंथ भेजा जाएगा। इससे छात्रों को राहत मिलेगी।
ये रहे मौजूद
प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, कुलसचिव धीरेंद्र कुमार, कुलानुशासक प्रो. वीरपाल सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. भूपेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. रूप नारायण, प्रो. नवीन चंद्र लोहानी, प्रो. जितेंद्र कुमार ढाका, प्रो. हरे कृष्णा, प्रो. एसएस गौरव, प्रो. मृदुल कुमार गुप्ता सहित सभी संकायाध्यक्ष व प्राचार्य तथा प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार गुप्ता मौजूद रहे।
किसी विद्यार्थी के हाईस्कूल उत्तीर्ण होने के बाद दो वर्ष का आईटीआई डिप्लोमा और इंटरमीडिएट एक विषय के साथ उत्तीर्ण होने के बाद विवि द्वारा संचालित बीए-बीकॉम पाठ्यक्रम में प्रवेश की स्वीकृति प्रदान की गई। इसी प्रकार बीएससी-बीटेक पाठ्यक्रमों में किसी विद्यार्थी द्वारा हाईस्कूल यूपी बोर्ड के उत्तीर्ण होने के बाद दो वर्ष का या तीन वर्ष का इलेक्ट्रॉनिक्स कंप्यूटर साइंस इन्फॉमेशन टेक्नोलॉजी का आईटीआई, पॉलीटेक्निक डिप्लोमा और इंटरमीडिएट एकल विषय (हिंदी) यूपी बोर्ड के साथ उत्तीर्ण होने के बाद बीएससी (गणित) बीएससी (कंप्यूटर साइंस) बीटेक (इलेक्ट्रोनिक्स) बीटेक (कंप्यूटर साइंस) बीसीए पाठ्यक्रमों में वर्ष 2020-21 से प्रवेश की स्वीकृति प्रदान की गई।
शोध के मूल्यांकन में किया बदलाव
विवि ने शोध के मूल्यांकन में थोड़ा बदलाव किया है। शोध ग्रंथ को पहले तीन शिक्षकों के पास जांचने के लिए भेजा जाता था, उनमें से एक भी ग्रंथ को अगर निरस्त कर देता था तब वह निरस्त ही माना जाता था। लेकिन अब चौथे शिक्षक के पास ग्रंथ भेजा जाएगा। इससे छात्रों को राहत मिलेगी।
ये रहे मौजूद
प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, कुलसचिव धीरेंद्र कुमार, कुलानुशासक प्रो. वीरपाल सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. भूपेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. रूप नारायण, प्रो. नवीन चंद्र लोहानी, प्रो. जितेंद्र कुमार ढाका, प्रो. हरे कृष्णा, प्रो. एसएस गौरव, प्रो. मृदुल कुमार गुप्ता सहित सभी संकायाध्यक्ष व प्राचार्य तथा प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार गुप्ता मौजूद रहे।