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Meerut News: टीबी के मरीजों को गोद लेंगे सीसीएसयू शिक्षक
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- सीसीएसयू ने 70 टीबी मरीजों को ले रखा है गोद, टीबी मुक्त भारत अभियान में हैं अनूठा योगदान
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने 70 टीबी मरीजों को गोद लिया है। विश्वविद्यालय के 70 शिक्षक इन मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी संभालेंगे। प्रत्येक शिक्षक एक-एक मरीज को गोद लेकर हर माह उनकी दवाई और पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराएंगे। इस पहल से न केवल मरीजों को चिकित्सा और पोषण संबंधी सहायता मिलेगी, बल्कि उन्हें मानसिक संबल और बीमारी से लड़ने का आत्मविश्वास भी प्राप्त होगा। सीसीएसयू की यह पहल उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है।
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि समाज के कमजोर और वंचित वर्ग के लोगों तक पहुंचकर उनकी बीमारी और पोषण की समस्या का समाधान करना शिक्षकों का नैतिक दायित्व है। विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक क्षेत्र तक सीमित न रहकर समाज के लिए उपयोगी कार्यों में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। टीबी (क्षय रोग) आज भी भारत में बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में हर साल लाखों नए मरीज सामने आते हैं। पोषण की कमी और जागरूकता की कमी इस बीमारी के प्रसार का प्रमुख कारण हैं। ऐसे में सामाजिक संस्थानों और शैक्षणिक संगठनों की भागीदारी अहम है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने 70 टीबी मरीजों को गोद लिया है। विश्वविद्यालय के 70 शिक्षक इन मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी संभालेंगे। प्रत्येक शिक्षक एक-एक मरीज को गोद लेकर हर माह उनकी दवाई और पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराएंगे। इस पहल से न केवल मरीजों को चिकित्सा और पोषण संबंधी सहायता मिलेगी, बल्कि उन्हें मानसिक संबल और बीमारी से लड़ने का आत्मविश्वास भी प्राप्त होगा। सीसीएसयू की यह पहल उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है।
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि समाज के कमजोर और वंचित वर्ग के लोगों तक पहुंचकर उनकी बीमारी और पोषण की समस्या का समाधान करना शिक्षकों का नैतिक दायित्व है। विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक क्षेत्र तक सीमित न रहकर समाज के लिए उपयोगी कार्यों में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। टीबी (क्षय रोग) आज भी भारत में बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में हर साल लाखों नए मरीज सामने आते हैं। पोषण की कमी और जागरूकता की कमी इस बीमारी के प्रसार का प्रमुख कारण हैं। ऐसे में सामाजिक संस्थानों और शैक्षणिक संगठनों की भागीदारी अहम है।
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