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सीसीएसयू : कॉपी में नंबर ज्यादा, मार्कशीट में कम
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- मूल्यांकन और परिणाम में गड़बड़ी पर छात्रों ने रोष जताया
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में छात्रों के मूल्यांकन और परिणाम से जुड़ी लापरवाही सामने आ रही है। कई छात्रों को गलत अंकों के कारण बैक पेपर परीक्षा देनी पड़ रही हैं और जब वे स्क्रूटनी के लिए आवेदन करते हैं तो उनकी मार्कशीट और उत्तर पुस्तिका के अंकों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
पूर्व छात्र संघ के महामंत्री अंकित अधाना सहित अन्य छात्र नेताओं ने बताया कि बीएड की एक छात्रा की मार्कशीट में 20 अंक थे, वहीं उसकी कॉपी में 52 अंक पाए गए। इसी तरह बीकॉम के एक छात्र को मार्कशीट में शून्य अंक दिए गए थे, जबकि उसकी कॉपी में 48 अंक थे। एक अन्य मामले में बीएलएलबी की एक छात्रा को 20 अंक मिले थे, जबकि उसकी कॉपी में 65 अंक दर्ज थे। ऐसे ही एलएलबी की एक छात्रा के 41 अंक बढ़कर 55 हो गए। इसके अलावा भी कई छात्रों के अंकों में 10 अंकों तक का अंतर पाया गया।
उन्होंने कहा कि स्क्रूटनी के बाद जिस छात्र को पहले शून्य अंक मिले थे, उसके 48 अंक हो गए। ऐसे कई छात्र हैं जिनकी मार्कशीट और उत्तर पुस्तिका के अंकों में भारी अंतर है। उन्होंने यह भी बताया कि छात्र अपनी कॉपी की जांच करवाने और स्क्रूटनी के लिए 550 रुपये खर्च करते हैं। इसके बाद ही उन्हें सही अंक मिल पाते हैं। इससे छात्रों का आर्थिक शोषण हो रहा है। विवि में मूल्यांकन और परिणाम अपलोड करने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने त्रुटियों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में छात्रों के मूल्यांकन और परिणाम से जुड़ी लापरवाही सामने आ रही है। कई छात्रों को गलत अंकों के कारण बैक पेपर परीक्षा देनी पड़ रही हैं और जब वे स्क्रूटनी के लिए आवेदन करते हैं तो उनकी मार्कशीट और उत्तर पुस्तिका के अंकों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
पूर्व छात्र संघ के महामंत्री अंकित अधाना सहित अन्य छात्र नेताओं ने बताया कि बीएड की एक छात्रा की मार्कशीट में 20 अंक थे, वहीं उसकी कॉपी में 52 अंक पाए गए। इसी तरह बीकॉम के एक छात्र को मार्कशीट में शून्य अंक दिए गए थे, जबकि उसकी कॉपी में 48 अंक थे। एक अन्य मामले में बीएलएलबी की एक छात्रा को 20 अंक मिले थे, जबकि उसकी कॉपी में 65 अंक दर्ज थे। ऐसे ही एलएलबी की एक छात्रा के 41 अंक बढ़कर 55 हो गए। इसके अलावा भी कई छात्रों के अंकों में 10 अंकों तक का अंतर पाया गया।
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उन्होंने कहा कि स्क्रूटनी के बाद जिस छात्र को पहले शून्य अंक मिले थे, उसके 48 अंक हो गए। ऐसे कई छात्र हैं जिनकी मार्कशीट और उत्तर पुस्तिका के अंकों में भारी अंतर है। उन्होंने यह भी बताया कि छात्र अपनी कॉपी की जांच करवाने और स्क्रूटनी के लिए 550 रुपये खर्च करते हैं। इसके बाद ही उन्हें सही अंक मिल पाते हैं। इससे छात्रों का आर्थिक शोषण हो रहा है। विवि में मूल्यांकन और परिणाम अपलोड करने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने त्रुटियों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
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