देश में सबसे ज्यादा कानून का पाठ पढ़ा रहा सीसीएसयू
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चौधरी चरण सिंह विवि से जुड़ी फर्जीवाड़े और बदनामी से भरी खबरें पढ़कर आप उकता गए होंगे। लेकिन यहां सब कुछ बुरा ही नहीं है। यकीन मानिए, हर साल देश में जहां 55 हजार के करीब स्टूडेंट्स बार काउंसिल ऑफ इंडिया में रजिस्ट्रेशन कराते हैं। वहीं, अकेले सीसीएसयू से हर साल 20 हजार स्टूडेंट्स कानून की पढ़ाई करके निकल रहे हैं। इतना ही नहीं न्यायिक सेवाओं में चयन के बाद जज बनने में भी विवि के लॉ ग्रेजुएट अव्वल हैं।
चौधरी चरण सिंह विवि से संबद्ध कॉलेजों से हर साल 20 हजार छात्र-छात्राएं एलएलबी कर रहे हैं। इनमें प्रदेश के अन्य जिलों के साथ दिल्ली और हरियाणा के छात्र-छात्राओं की संख्या अच्छी खासी है। कैंपस, एडेड और सेल्फ फाइनेंस में तीन वर्षीय एलएलबी के कॉलेजों की संख्या 100 के पार है। हर कॉलेज में दो सेक्शन हैं। एक सेक्शन में 60 सीटें हैं। इसके अलावा मेरठ कॉलेज, एमएमएच कॉलेज गाजियाबाद और दूसरे कुछ कॉलेजों में पांच-पांच सेक्शन तक हैं। इन कॉलेजों में 14 हजार से ज्यादा सीटें तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स की हैं। जो कि प्रदेश के किसी भी विवि में एलएलबी के छात्रों की संख्या से ज्यादा है।
पांच वर्षीय बीए-एलएलबी की बात करें तो कैंपस समेत 50 कॉलेजों में यह कोर्स चल रहा है। इनमें छह हजार के करीब छात्र-छात्राएं कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। तीन वर्षीय और पांच वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में प्रवेश मेरिट से होते हैं। एलएलबी ही नहीं एलएलएम में भी सीसीएसयू के कॉलेजों में 300 सीटें हैं। एलएलएम में प्रवेश लेने को मारामारी रहती है। पांच गुना से ज्यादा स्टूडेंट्स प्रवेश परीक्षा देते हैं।
मेरठ के लिए बड़ी बात
-बार काउंसिल ऑफ उप्र के सदस्य वरिष्ठ एडवोकेट अनिल बख्शी बताते हैं कि यूपी में हर साल 11 हजार के करीब रजिस्ट्रेशन होते हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की बात करें तो हर साल 50 से 55 हजार के करीब ही रजिस्ट्रेशन हो पाते हैं।
-पूरे देश की बात करें तो साढ़े छह लाख के करीब वकील हैं। इनमें से अकेले उप्र से वकीलों की संख्या 1. 67 लाख के करीब है। ऐसे में यूनिवर्सिटी से हर साल 20 हजार छात्र-छात्राओं के कानून की पढ़ाई करना मेरठ के लिए बड़ी बात है।
कम हो गए नौ लाख के करीब वकील
कई साल पहले तक देश में 15 लाख से ज्यादा वकीलों के रजिस्ट्रेशन थे। बीते सालों में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने प्रैक्टिस नहीं करने वाले वकीलों का ब्यौरा मांगा था। इसके चलते नौ लाख के करीब रजिस्ट्रेशन रिन्युअल नहीं किए गए। यूपी में जहां साढ़े तीन लाख वकीलों के रजिस्ट्रेशन थे, वहीं अब इनकी संख्या में पौने दो लाख रह गई है।
वर्जन
विवि से संबद्ध डेढ़ सौ कॉलेजों में एलएलबी की पढ़ाई हो रही है। इन कॉलेजों में 20 हजार के करीब सीटें हैं। इतनी सीटें किसी दूसरी यूनिवर्सिटी में नहीं हैं।
डॉ. सत्य प्रकाश गर्ग, डायरेक्टर विधि अध्ययन संस्थान, सीसीएसयू
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