यूपी: मुंह पर दुपट्टा बांधा तो कॉलेज में 'नो एंट्री', छात्राओं के लिए नया नियम लागू
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मेरठ कॉलेज में अब छात्राएं कैंपस के अंदर मुंह पर कपड़ा बांधकर नहीं जा सकेंगी। चेकिंग के दौरान कॉलेज में बाहरी युवक-युवतियां पकड़े गए थे। इनके रोकथाम के लिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बाहरी युवाओं की एंट्री रोकने के लिए कैंपस में दो बार चेकिंग कराई जाएगी।
कॉलेज प्रशासन को कई दिन से सूचनाएं मिल रही थीं कि बाहरी युवक-युवतियां कॉलेज में माहौल खराब कर रहे हैं। इसके चलते प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम ने चेकिंग की तो ऑडीटोरियम के पास पेड़ के नीचे एक युवक-युवती खाना खा रहे थे। उनसे आईकार्ड मांगा तो दोनों ने खुद के छात्र-छात्रा होने से इंकार कर दिया। युवक ने बताया कि वो तो यहां टाइम पास करने आ गए थे। इस पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने दोनों को चेतावनी देते हुए कॉलेज से बाहर कर दिया। कैंपस में टीम ने एक युवक के साथ मुंह पर कपड़ा बांधकर जा रही युवती को रोककर आईकार्ड मांगा तो वे भी बाहरी निकले। दोनों को चेतावनी देकर छोड़ दिया।
इसके बाद बोर्ड ने निर्णय लिया कि सोमवार से कॉलेज में रोजाना दो बार चेकिंग की जाएगी। चीफ प्रॉक्टर डॉ. अलका चौधरी ने बताया कि सभी छात्र-छात्राओं को स्पष्ट कर दिया गया है कि आईकार्ड हर सूरत में लेकर आएं। बाहरी युवक-युवतियां मिलने पर कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी।
रैगिंग की तो होगी सख्त कार्रवाई
कॉलेज में रैगिंग न हो इसको लेकर प्राचार्य डॉ. आभा चंद्रा की मौजूदगी में एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक हुई। बैठक में कमेटी के कन्वीनर डॉ. वीरेंद्र सिंह, डॉ. सुधीर कुमार पुंडीर, डॉ. भूपेंद्र सिंह, चीफ प्रॉक्टर डॉ. अलका चौधरी, डॉ. निशा मनीष, डॉ. संगीता गुप्ता और डॉ. पीएस उज्ज्वल मौजूद रहे। बैठक में निर्णय लिया गया कि रैगिंग कमेटी भी कॉलेज में चेकिंग करेगी। इसके साथ रैगिंग को लेकर एक-दो दिन में जगह-जगह बोर्ड लगा दिए जाएंगे। जिन पर रैगिंग को लेकर सारे नियम लिखे होंगे। इसमें शिकायत नंबर भी होगा।
16 तक ऑफिस छोड़ें
छात्रसंघ पदाधिकारियों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में उनको 16 जुलाई तक ऑफिस की चाबी कॉलेज प्रशासन को सौंपनी होगी। इसके साथ ही सीताराम हॉस्टल में रहने वाले छात्रों से 17 जुलाई तक कमरा खाली करने को कहा गया है।
हंगामा न करें छात्र
कॉलेज का माहौल सुधारने के लिए प्राचार्य डॉ. आभा चंद्रा की तरफ से एक अच्छी पहल की गई है। अक्सर कोई भी समस्या होने पर छात्र हंगामा करते हैं। जिसकी वजह से कॉलेज का माहौल खराब होता है। ऐसे में छात्रों से कहा गया है कि जो भी समस्या है उसे प्रॉक्टोरियल बोर्ड में लिखकर दें, समस्या का समाधान बिना हंगामे के ही हो जाएगा। इससे कॉलेज का माहौल भी बदलेगा।
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