शानदार सफर : 56 साल पहले टेंट व बल्ली लगाकर चलाई गई थी पहली कक्षा, आज प्रदेश के टाॅप विवि में होती है सीसीएसयू की गिनती
गुरुवार को विवि के स्थापना दिवस पर माल्यार्पण और हवन का सूक्ष्म कार्यक्रम होगा। पिछले साल भी कोरोना के चलते कोई आयोजन नहीं हो पाया था।
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एक जुलाई 1965 को मेरठ यूनिवर्सिटी की शुरुआत नौचंदी में राजस्थान के पूर्व गवर्नर रघुकुल तिलक के घर प्रभात प्रेस से हुई थी। यहां पर टेंट लगाकर काम होता था। कैलाश प्रकाश जब उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री बने तो उन्होंने डिग्गी के पास पड़ी जमीन को विवि के लिए आवंटित कराया।
करीब साल भर तक टेंट आदि लगाकर ही काम किया गया। कक्षाएं भी टेंट में ही चलीं। पहले कुलपति प्रो. आरके सिंह ने कैंपस में बहुत काम कराया। वर्ष 1994 में मेरठ विवि का नाम पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर हो गया।
मेरठ-सहारनपुर परिक्षेत्र में सीसीएसयू के एक हजार के करीब कॉलेजों में आज पांच लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। कॉलेजों में पढ़ाई का स्तर जो भी रहा हो, लेकिन कैंपस में हमेशा बेहतर रहा है।
कुछ वर्षों में खुले यूजी कोर्सों को छोड़ दें तो यहां पर पीजी, एमफिल और पीएचडी करने वाले अधिकतर छात्र-छात्राओं को अपने क्षेत्र में कामयाबी मिली है। इसके चलते डिग्री कॉलेजों में यहां के छात्र बड़ी संख्या में शिक्षक चयनित हो रहे हैं।
पढ़ाई के साथ पर्यावरण बचाने की भी सीख
सीसीएसयू कैंपस शिक्षा के साथ पर्यावरण बचाने की भी सीख दे रहा है। यहां पर 13 हजार से ज्यादा पेड़ हैं। सैकड़ों प्रजातियों के इन पेड़ों में नीम, कंघी, साइकस, एनोस्टोनिया, यूकेलिप्टिस, अमनतास, बरगद, पीपल, पिलखन, नीम, बेल पत्थर, आंवला, आम और अमरूद आदि शामिल हैं।
हरियाली की वजह से यहां पर दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां है। हजारों लोगों के घूमने के लिए कैंपस के भीतर पेड़ों घिरा तपोवन में खूबसूरत ट्रैक है। पानी को संजोने के लिए 40 रेन वाटर हार्वेसिंग सिस्टम लगाए गए हैं। 70 फीसदी बिजली की खपत सोलर ऊर्जा प्लांट से हो रही है। कूड़ा निस्तारण प्लांट भी लगा है।
कोरोना काल में सब हुआ ऑनलाइन
पिछले साल तक सीसीएसयू में मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन, प्रोविजनल सर्टिफिकेट आदि बनवाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था नहीं थी। कोरोना के चलते लॉकडाउन लगा तो छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र दिए जाने का कार्य जारी रहा। कुलपति प्रो. एनके तनेजा के निर्देश पर रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने खुद खड़े होकर प्रमाण पत्र दिलवाए। इसके बाद पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन किया गया। अब डिग्री, मार्कशीट, माइग्रेशन और प्रोविजनल सर्टिफिकेट के लिए छात्र सीसीएसयू की वेबसाइट www.ccsu.ac.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रमाण पत्र डाक द्वारा खुद भेजे जाएंगे।
प्राइवेट छात्रों को अब नहीं लगाने पड़ते चक्कर
प्राइवेट छात्रों को डिग्री के लिए कैंपस में चक्कर लगाने पड़ते थे। वर्ष 2019 तक की डिग्री विवि कोरियर से छात्रों के घर भिजवा रहा है। इसमें छात्रों को कोई शुल्क नहीं देना है। नियमित छात्रों की सारी डिग्रियां भी कॉलेजों में भेजे जा चुकी हैं।
हर साल नंबरों में आसमान छू रहे छात्र
दीक्षांत समारोह में यूजी-पीजी के तमाम कोर्सों में छात्र-छात्राएं 95 फीसदी तक भी नंबर ला रहे हैं। छात्राओं का प्रतिशत भी यहां पर छात्रों से ज्यादा है। कोरोना महामारी के बावजूद विवि लगातार परीक्षा, ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर छात्रों का मार्गदर्शन कर रहा है।
कोरोना गाइड लाइन के चलते सूक्षम होगा आयोजन
गुरुवार को विवि के स्थापना दिवस पर माल्यार्पण और हवन का सूक्ष्म कार्यक्रम होगा। पिछले साल भी कोरोना के चलते कोई आयोजन नहीं हो पाया था।
डिजिटलाइजेशन के अभी कई काम बाकी हैं। जहां पर कमियां हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है। कोरोना महामारी से सत्र को काफी नुकसान पहुंचा है, ऐसे में सभी शिक्षक-कर्मचारी अपना सौ फीसदी योगदान दें। ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर छात्रों के कोर्स को पूरा कराया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सिलेबस तैयार हो गया है। नए सत्र से इसका क्रियान्वयन होना है। -प्रो. एनके तनेजा, कुलपति चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय।