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सीसीएसयू उत्तर पुस्तिका घोटाला: ‘रद्दी’ में डाली प्रशासन की जांच, लगा दी एफआर

Tue, 05 Feb 2019 01:36 PM IST
Dimple Sirohi मनु चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
मनु चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 05 Feb 2019 01:36 PM IST
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CCSU answer book scandal: Investigation of cast administration in junk, figured FR
सीसीएसयू
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में हुए रद्दी घोटाले के मुकदमे में विवेचक ने फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगा दी। तत्कालीन कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार के निर्देश पर अपर आयुक्त जयशंकर दूबे ने इस पूरे प्रकरण की जांच में आरोप सही पाए थे। जिसके बाद 28 जुलाई 2018 को विवि के तत्कालीन वित्त अधिकारी समेत चार के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया था। अब शासन ने पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। एसपी सिटी ने एफआर को वापस करते हुए नए सिरे से विवेचना कराने की बात कही है।
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सीसीएसयू में पुरानी उत्तर पुस्तिकाओं की रद्दी की बिक्री में बड़ा गड़बड़झाले के आरोप लगे थे। रुखसाना और एडवोकेट शरीफ ने तत्कालीन कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार से इसकी शिकायत की थी। अपर आयुक्त की जांच में सामने आया कि विवि में रद्दी के लिए टेंडर जारी किया गया था। निविदा में शामिल करने के लिए ठेकेदार को स्टांप पत्र चार सितंबर 2017 को जारी किए गए, जबकि उन पर निष्पादन अनुबंध की तारीख 16 मार्च 2016 रही। यानी टेंडर पहले और स्टांप खरीद बाद में।
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इतना ही नहीं, एन बालियान नाम के व्यक्ति द्वारा तीन लाख रुपये का बैंक ड्राफ्ट जमा कराया गया। गवाह नंबर दो के रूप में कुशमेंद्र मलिक ने साइन किए। जांच में सामने आया कि निविदा में तीन फर्मों ने भाग लिया, जो एक ही व्यक्ति द्वारा संचालित की गईं। बैंक से बने ड्राफ्टों से भी इसकी पुष्टि हुई। मेडिकल थाने में केस दर्ज होने के बाद पहला पर्चा वरिष्ठ उपनिरीक्षक सलीम खान ने काटा। उसके बाद विवेचना सीओ सिविल लाइन ने की और फाइनल रिपोर्ट लगा दी।

सोमवार को जब मामला शासन तक पहुंचा तो उच्च अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। इस बीच सीओ ऑफिस से एफआर की फाइल एसपी सिटी कार्यालय पहुंची। एसपी सिटी ने एफआर को वापस सीओ कार्यालय को लौटाते हुए फिर से विवेचना की बात कही।

रेट के लिए खेला था पूरा खेल
जांच में सामने आया कि वर्ष 2017-2018 में ई-टेंडरिंग के माध्यम से जो रद्दी बेची गई, उसकी दरें उत्तर पुस्तिका हेतु रुपये 2289 प्रति कुंतल एवं मिश्रित रद्दी की दर 1852 आई, जबकि आपराधिक साजिश कर एक फर्म के पक्ष में उत्तर पुस्तिकाओं का रेट 1605 तथा मिश्रित का 1330 रुपये प्रति क्विंटल आया। इस फर्म ने उत्तर पुस्तिका की 300 और मिश्रित की 200 क्विंटल रद्दी खरीदी। यानी विवि को 30.98 लाख रुपये का चूना लगाया गया।

तत्कालीन वित्त अधिकारी भी हैं आरोपी
सीसीएसयू के तत्कालीन वित्त अधिकारी अनिल अग्रवाल भी पूरे प्रकरण में आरोपी हैं। इन पर इस साजिश में शामिल फर्म के प्रतिनिधि विवेक राठी, एनके बालियान और कुशमेंद्र मलिक का साथ देने का आरोप है। कमिश्नर के आदेश पर विवि के रजिस्ट्रार ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कराया था।

मुख्य बातें

26 जून 2018 को आयुक्त ने अपर आयुक्त को जांच सौंपी।
02 जुलाई 2018 को आयुक्त ने रजिस्ट्रार को कार्रवाई के लिए पत्र लिखकर मुकदमे के आदेश दिए।
28 जुलाई 2018 को मेडिकल थाने में चार आरोपियों पर केस दर्ज हुआ।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा होने पर विवेचना सीओ सिविल लाइन रामअर्ज ने की।

एफआर रोक दी है
विवेचक ने एफआर किन परिस्थितियों में लगाई, अब इसकी ही जांच की जा रही है। कहां गलतियां हुई हैं, साक्ष्यों की रिपोर्ट मांगी गई है। मामला बेहद गंभीर होने के चलते एफआर रोक दी गई है। पुन: विवेचना के लिए कहा गया है। -रणविजय सिंह, एसपी सिटी
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