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सीबीआई के रडार पर कई चिकित्सक
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sun, 31 Jul 2016 02:01 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत खरीदे गए सामान, दवाइयों और नियुक्ति में हुई गड़बड़ी की जांच के लिए सीबीआई टीम छह दिनों से जुटी है। टीम अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई रिकार्ड खंगाले हैं। इनमें मिली गड़बड़ी के आधार पर कयास लगाए जा रहे हैं कि सीबीआई स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों से जल्द पूछताछ करेगी। सामान आपूर्ति करने वाली कई फर्म भी जांच के दायरे में हैं।
हफ्ते भर से सीबीआई की टीम चौधरी चरण सिंह विवि के गेस्ट हाउस में डेरा डाले हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक टीम ने स्वास्थ्य विभाग में 2008 से वर्तमान समय तक हुई विभिन्न सामान की खरीदारी का रिकार्ड मांगा था। जांच के बाद कुछ बिंदुओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग से वर्ष 2012-13 के दौरान हुई खरीदारी पर सवाल पूछे गए हैं। खास बात यह है कि कई ऐसी फर्मों से भी खरीदारी की गई, जो सेल्स टैक्स विभाग में पंजीकृत हीं नहीं हैं। ऐसी फर्मों में मेरठ के अलावा मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद और मुरादाबाद जिलों की कई फर्म शामिल हैं। कई फर्म एक ही पते पर पंजीकृत हैं। सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि टेंडर हासिल करने के लिए लोगों ने कई फर्म फर्जी तरीके से दर्शाई गई हैँ। बताया जा रहा है कि है कि जल्द ही सीबीआई स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और संदेह के दायरे में आईं फर्म के मालिकों से पूछताछ करेगी।
फर्नीचर खरीद में बड़ा खेल
जांच के दौरान सीबीआई टीम को फर्नीचर खरीद में भी भारी गड़बड़ी मिली है। स्वास्थ्य केंद्रों के लिए जरूरत नहीं होने के बाद भी सामान खरीदा गया है। कई स्वास्थ्य केंद्र ऐसे भी हैं, जिनके लिए एक साल में तीन से चार बार फर्नीचर की खरीद हुई है। खरीद का काम भी एक ही फर्म को दिया गया है। खरीद से पहले स्वास्थ्य विभाग ने कोई वित्तीय स्वीकृति भी नहीं ली।
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जिला स्तरीय क्रय समिति तक से छुपाई खरीद
नियमानुसार जिला स्तर पर सीएमओ क्रय समिति के अध्यक्ष होते हैं। मंडल में जिले की क्रय समिति का अध्यक्ष जिला अस्पताल का सीएमएस होता है। मेरठ मंडलीय जिला है तो यहां भी क्रय समिति के अध्यक्ष सीएमएस थे। उन्हें भी इस खरीद के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई। खुद ही सारी स्वीकृति देकर खेल कर लिया गया।
मामले पकड़ में आने के बाद भी जारी रहा खेल
सूत्रों के अनुसार एनएचएम मामले में एक करोड़ रुपये की दवा और फर्नीचर खरीद में गड़बड़ी पकड़ी गई थी। मामला पकड़ में आने के बाद भी अधिकारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इसके बाद भी गड़बड़ी का दौर जारी रहा। पिछले साल क्रय समिति के तत्कालीन अध्यक्ष आरपीएन मिश्रा ने भी ऐसा ही एक मामला पकड़ा था। इस मामले में एक करोड़ रुपये के सामान की खरीद बिना प्रस्ताव पारित हुए ही कर ली गई थी। जब मामला पकड़ में आया तो प्रस्ताव बनाकर सीएमएस को भेजा गया था। इस बाबत अभी भी शासन स्तर पर जांच चल रही है। माना जा रहा है कि इसमें भी बडे़ नाम सामने आ रहे हैं।
सेल टैक्स विभाग भी शक के दायरे में
सीबीआई की जांच में पता चला है कि कई ऐसी फर्मों ने टेंडर डाले जो पंजीकृत ही नहीं थी। सवाल उठता है कि आखिर ऐसी कंपनियों को चिन्हित क्यों नहीं किया गया, पूरे मामले में सेल्स टैक्स अधिकारियों को भनक क्यों नहीं लगी। या फिर अधिकारियों ने ही जानबूझकर चुप्पी साध ली थी। सीबीआई टीम आने की वजह से कई कंपनी संचालकों में भी हड़कंप की स्थिति है। कंपनियां अपना रिकॉर्ड दुरुस्त करने में जुटी हैं।
आय से अधिक वाले भी घेरे में
शहर में सीबीआई की दो टीमें जांच कर रही है। एक टीम एनएचएम मामले की तो दूसरी आय से अधिक संपत्ति रखने वाले अधिकारियों पर नजर रखे हुए है। कई चिकित्सकों को चिह्नित किया जा चुका है। टीम उनके खिलाफ पुख्ता सुबूत जुटाने में लगी हुई है। उम्मीद जताई जा रही है कि कई बडे़ नाम इस दौरान उजागर हो सकते हैं।
बैंकों से मिली अहम जानकारी
सीबीआई अधिकारियों ने शहर के कई बैंकों से भी तमाम जानकारी जुटाई है। बैंक प्रबंधकों से कई खातों के लेनदेन का ब्योरा तलब किया है ताकि आय से अधिक संपत्ति वाले खातों की जानकारी जुटाई जा सके। साथ ही खाताधारकों की आय के बारे में भी पुख्ता सुबूत मिल सकें।
आनाकानी कर रहे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग में कई अधिकारी सीबीआई अधिकारियों को बरगलाने का प्रयास कर रहे हैं। दो दिन पूर्व सीबीआई इंस्पेक्टर ने सीएमओ कार्यालय से कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इस पर स्वास्थ्य विभाग के लेखा अधिकारियों ने सीबीआई इंस्पेक्टर को टरकाने का प्रयास किया। सीबीआई टीम ने कड़ा रवैया अपनाया तो कुछ बिंदुओं पर जानकारी दे दी गई। उधर, सीबीआई अधिकारियों ने सीएमओ कार्यालय से सूचना मांगी है कि साल दर साल एक ही कंपनी से दवा और सामान खरीदने की वजह क्या थी, जबकि अधिकारियों को पहले ही पता चल गया था कि कंपनियां सेल्स टैक्स विभाग में पंजीकृत नहीं है। सूत्रों का दावा है कि टेंडर जारी करने वाले अधिकारियों से लेकर उन फर्मों के मालिकों पर एक साथ सीबीआई कार्रवाई करेगी, जो इन्हें संचालित कर रही हैं।
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हफ्ते भर से सीबीआई की टीम चौधरी चरण सिंह विवि के गेस्ट हाउस में डेरा डाले हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक टीम ने स्वास्थ्य विभाग में 2008 से वर्तमान समय तक हुई विभिन्न सामान की खरीदारी का रिकार्ड मांगा था। जांच के बाद कुछ बिंदुओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग से वर्ष 2012-13 के दौरान हुई खरीदारी पर सवाल पूछे गए हैं। खास बात यह है कि कई ऐसी फर्मों से भी खरीदारी की गई, जो सेल्स टैक्स विभाग में पंजीकृत हीं नहीं हैं। ऐसी फर्मों में मेरठ के अलावा मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद और मुरादाबाद जिलों की कई फर्म शामिल हैं। कई फर्म एक ही पते पर पंजीकृत हैं। सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि टेंडर हासिल करने के लिए लोगों ने कई फर्म फर्जी तरीके से दर्शाई गई हैँ। बताया जा रहा है कि है कि जल्द ही सीबीआई स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और संदेह के दायरे में आईं फर्म के मालिकों से पूछताछ करेगी।
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फर्नीचर खरीद में बड़ा खेल
जांच के दौरान सीबीआई टीम को फर्नीचर खरीद में भी भारी गड़बड़ी मिली है। स्वास्थ्य केंद्रों के लिए जरूरत नहीं होने के बाद भी सामान खरीदा गया है। कई स्वास्थ्य केंद्र ऐसे भी हैं, जिनके लिए एक साल में तीन से चार बार फर्नीचर की खरीद हुई है। खरीद का काम भी एक ही फर्म को दिया गया है। खरीद से पहले स्वास्थ्य विभाग ने कोई वित्तीय स्वीकृति भी नहीं ली।
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जिला स्तरीय क्रय समिति तक से छुपाई खरीद
नियमानुसार जिला स्तर पर सीएमओ क्रय समिति के अध्यक्ष होते हैं। मंडल में जिले की क्रय समिति का अध्यक्ष जिला अस्पताल का सीएमएस होता है। मेरठ मंडलीय जिला है तो यहां भी क्रय समिति के अध्यक्ष सीएमएस थे। उन्हें भी इस खरीद के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई। खुद ही सारी स्वीकृति देकर खेल कर लिया गया।
मामले पकड़ में आने के बाद भी जारी रहा खेल
सूत्रों के अनुसार एनएचएम मामले में एक करोड़ रुपये की दवा और फर्नीचर खरीद में गड़बड़ी पकड़ी गई थी। मामला पकड़ में आने के बाद भी अधिकारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इसके बाद भी गड़बड़ी का दौर जारी रहा। पिछले साल क्रय समिति के तत्कालीन अध्यक्ष आरपीएन मिश्रा ने भी ऐसा ही एक मामला पकड़ा था। इस मामले में एक करोड़ रुपये के सामान की खरीद बिना प्रस्ताव पारित हुए ही कर ली गई थी। जब मामला पकड़ में आया तो प्रस्ताव बनाकर सीएमएस को भेजा गया था। इस बाबत अभी भी शासन स्तर पर जांच चल रही है। माना जा रहा है कि इसमें भी बडे़ नाम सामने आ रहे हैं।
सेल टैक्स विभाग भी शक के दायरे में
सीबीआई की जांच में पता चला है कि कई ऐसी फर्मों ने टेंडर डाले जो पंजीकृत ही नहीं थी। सवाल उठता है कि आखिर ऐसी कंपनियों को चिन्हित क्यों नहीं किया गया, पूरे मामले में सेल्स टैक्स अधिकारियों को भनक क्यों नहीं लगी। या फिर अधिकारियों ने ही जानबूझकर चुप्पी साध ली थी। सीबीआई टीम आने की वजह से कई कंपनी संचालकों में भी हड़कंप की स्थिति है। कंपनियां अपना रिकॉर्ड दुरुस्त करने में जुटी हैं।
आय से अधिक वाले भी घेरे में
शहर में सीबीआई की दो टीमें जांच कर रही है। एक टीम एनएचएम मामले की तो दूसरी आय से अधिक संपत्ति रखने वाले अधिकारियों पर नजर रखे हुए है। कई चिकित्सकों को चिह्नित किया जा चुका है। टीम उनके खिलाफ पुख्ता सुबूत जुटाने में लगी हुई है। उम्मीद जताई जा रही है कि कई बडे़ नाम इस दौरान उजागर हो सकते हैं।
बैंकों से मिली अहम जानकारी
सीबीआई अधिकारियों ने शहर के कई बैंकों से भी तमाम जानकारी जुटाई है। बैंक प्रबंधकों से कई खातों के लेनदेन का ब्योरा तलब किया है ताकि आय से अधिक संपत्ति वाले खातों की जानकारी जुटाई जा सके। साथ ही खाताधारकों की आय के बारे में भी पुख्ता सुबूत मिल सकें।
आनाकानी कर रहे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग में कई अधिकारी सीबीआई अधिकारियों को बरगलाने का प्रयास कर रहे हैं। दो दिन पूर्व सीबीआई इंस्पेक्टर ने सीएमओ कार्यालय से कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इस पर स्वास्थ्य विभाग के लेखा अधिकारियों ने सीबीआई इंस्पेक्टर को टरकाने का प्रयास किया। सीबीआई टीम ने कड़ा रवैया अपनाया तो कुछ बिंदुओं पर जानकारी दे दी गई। उधर, सीबीआई अधिकारियों ने सीएमओ कार्यालय से सूचना मांगी है कि साल दर साल एक ही कंपनी से दवा और सामान खरीदने की वजह क्या थी, जबकि अधिकारियों को पहले ही पता चल गया था कि कंपनियां सेल्स टैक्स विभाग में पंजीकृत नहीं है। सूत्रों का दावा है कि टेंडर जारी करने वाले अधिकारियों से लेकर उन फर्मों के मालिकों पर एक साथ सीबीआई कार्रवाई करेगी, जो इन्हें संचालित कर रही हैं।