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सावधान! गूगल पर फैला सायबर ठगों का जाल
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सावधान! गूगल पर फैला साइबर ठगों का जाल
मेरठ।
अगर आप गूगल का प्रयोग करते हैं तो सावधानी के साथ करें। वजह आपकी एक छोटी सी गलती, आपको बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है। इस सर्च इंजन पर साइबर ठगों ने अपना जाल फैला रखा है। यह पूरा फर्जीवाड़ा राजस्थान, झारखंड, पश्चिम बंगाल से संचालित हो रहा है। ये ठग साइबर सेल के लिए भी चुनौती बने हुए हैं।
केस-1 : एटीएम से पैसा निकलते समय कंकरखेड़ा निवासी युवक का ट्रांजेक्शन फेल हो गया। एकाउंट से पैसे कट गए। बैंक का कस्टमर केयर नंबर गूगल पर सर्च कर संपर्क किया। भरोसा दिलाया गया कि जल्द पैसे अकाउंट में क्रेडिट हो जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दरअसल, वह फर्जी नंबर था। जिस कारण युवक ठगी का शिकार हो गया।
केस-2 : इंचौली निवासी युवक के मोबाइल पर मैसेज आया कि उसका 50 लाख का जैकपॉट लगा है। लालच में युवक ने बिना सोचे समझे नीचे दिए गए लिंक को खोल लिया और उसके निर्देश फॉलो किए। जब तक युवक कुछ समझ पाता उसके साथ ठगी हो चुकी थी। खास बात यह थी कि उसने खुद मोबाइल पर आया ओटीपी शेयर किया।
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लॉकडाउन में बढ़ा शिकायतों का ग्राफ
लॉकडाउन में लोग पूरी तरह मोबाइल पर निर्भर रहे। साइबर अपराधियों ने इसी का फायदा उठाया। विभाग की माने तो इस साल शिकायतों का आंकड़ा 950 तक पहुंच गया है। आधी शिकायतें लॉकडाउन के दौरान की हैं। पिछले दो साल में साइबर ठगी से जुड़े मामलों में तेजी आई है।
कई राज्यों से नेटवर्क संचालित
राजस्थान के जनपद भरतपुर, अलवर, झारखंड के जामतारा, देवधर, पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना और हरियाणा के मेवात से ठगों के नेटवर्क चल रहे हैं। फर्जी सिम और फर्जी बैंक खातों से वारदात की जा रही हैं।
लालच के चलते लोग साइबर अपराधियों के शिकार बन रहे हैं। पहले अपनी गोपनीय जानकारी शेयर कर देते हैं और फिर पछताते हैं। इस साल करीब 50 लाख की रिकवरी कराई गई है। जहां से नेटवर्क संचालित है, वहां तक पहुंच पाना संभव नहीं है, फिर भी कोशिश जारी है। - दिलीप शर्मा, प्रभारी, साइबर सेल
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मेरठ।
अगर आप गूगल का प्रयोग करते हैं तो सावधानी के साथ करें। वजह आपकी एक छोटी सी गलती, आपको बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है। इस सर्च इंजन पर साइबर ठगों ने अपना जाल फैला रखा है। यह पूरा फर्जीवाड़ा राजस्थान, झारखंड, पश्चिम बंगाल से संचालित हो रहा है। ये ठग साइबर सेल के लिए भी चुनौती बने हुए हैं।
केस-1 : एटीएम से पैसा निकलते समय कंकरखेड़ा निवासी युवक का ट्रांजेक्शन फेल हो गया। एकाउंट से पैसे कट गए। बैंक का कस्टमर केयर नंबर गूगल पर सर्च कर संपर्क किया। भरोसा दिलाया गया कि जल्द पैसे अकाउंट में क्रेडिट हो जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दरअसल, वह फर्जी नंबर था। जिस कारण युवक ठगी का शिकार हो गया।
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केस-2 : इंचौली निवासी युवक के मोबाइल पर मैसेज आया कि उसका 50 लाख का जैकपॉट लगा है। लालच में युवक ने बिना सोचे समझे नीचे दिए गए लिंक को खोल लिया और उसके निर्देश फॉलो किए। जब तक युवक कुछ समझ पाता उसके साथ ठगी हो चुकी थी। खास बात यह थी कि उसने खुद मोबाइल पर आया ओटीपी शेयर किया।
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लॉकडाउन में बढ़ा शिकायतों का ग्राफ
लॉकडाउन में लोग पूरी तरह मोबाइल पर निर्भर रहे। साइबर अपराधियों ने इसी का फायदा उठाया। विभाग की माने तो इस साल शिकायतों का आंकड़ा 950 तक पहुंच गया है। आधी शिकायतें लॉकडाउन के दौरान की हैं। पिछले दो साल में साइबर ठगी से जुड़े मामलों में तेजी आई है।
कई राज्यों से नेटवर्क संचालित
राजस्थान के जनपद भरतपुर, अलवर, झारखंड के जामतारा, देवधर, पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना और हरियाणा के मेवात से ठगों के नेटवर्क चल रहे हैं। फर्जी सिम और फर्जी बैंक खातों से वारदात की जा रही हैं।
लालच के चलते लोग साइबर अपराधियों के शिकार बन रहे हैं। पहले अपनी गोपनीय जानकारी शेयर कर देते हैं और फिर पछताते हैं। इस साल करीब 50 लाख की रिकवरी कराई गई है। जहां से नेटवर्क संचालित है, वहां तक पहुंच पाना संभव नहीं है, फिर भी कोशिश जारी है। - दिलीप शर्मा, प्रभारी, साइबर सेल