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अब कैंट बोर्ड सुधारेगा इन 19 ऐतिहासिक स्थलों की सूरत 

Sat, 17 Jun 2017 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Sat, 17 Jun 2017 02:39 AM IST
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cantt board will develope 19 historical places
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

शहर की शान मेरठ कैंट दो वजह से खास है। एक क्षेत्र की सुंदरता और दूसरा इसका ऐतिहासिक महत्व। स्वतंत्रता आंदोलन की चिंगारी यहां से फूटी और पूरे देश में फैल गई। क्रांतिकारियों ने अपनी जान दी तो अंग्रेजों का खून भी यहां पर बहा। क्रांति से जुड़े ऐतिहासिक लम्हें और वजह को लेकर कैंट क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण स्थल हैं। कैंट बोर्ड अपनी निगरानी में ऐसे स्थलों की मरम्मत और देखभाल कराएगा। 

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बोर्ड ने जो 19 स्थल चिन्हित किए गए हैं। उनमें अधिकांश स्मारक हैं। जैसे जीरो माइल स्टोन। यह स्टोन 1857 से भी पहले का है। 150 साल पहले यह स्टोन मेरठ से दूसरे जिलों की दूरी बयां करता था। 2001 में इस स्मारक को बनाया गया। चारदीवारी की गई। अब चारदीवारी टूट चुकी है और इसे मरम्मत की जरूरत है। सीमेट्री, सेंट थॉमस चर्च का ऐतिहासिक स्टोन, कंपनी गार्डन का कुआं, जिसमें लाल किला से लाकर छतरी लगाई गई थी। डीईओ ऑफिस के सामने आदि कई जगहों पर छोटे और बड़े स्मारक और प्रतीक आजादी की लड़ाई की पहचान हैं। 
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अधिकांश स्थल आर्मी के एरिया में 
1857 की क्रांति से जुड़े अधिकांश स्थल आर्मी के एरिया में है। क्रांति के दौरान रेस कोर्स में सबसे पहले एक अंग्रेज की हत्या की गई थी। सेना के पास मौजूद कई बंगले क्रांति के कहानियों के गवाह हैं। आजकल वह सेना की मेस है। कुछ स्थल ऐसे हैं जो सेना के अधीन हैं और गोपनीयता की वजह से उनके नाम उजागर नहीं किए जा सकते। कैंट बोर्ड का फोकस सिविल एरिया में मौजूद स्थलों पर रहेगा। 
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सराहनीय कदम 
इतिहासकार डॉ. अमित पाठक का कहना है कैंट बोर्ड का यह सराहनीय काम होगा। ऐतिहासिक स्थल उपेक्षा का शिकार हैं। आर्मी के पास जो हैं, उनकी स्थिति ठीक है। कैंट के कई बंगले न केवल आजादी की पहचान हैं, बल्कि कई बड़ी शख्सियत उनमें आई हैं। मेरठ छावनी को स्थलों की पहचान कायम रखनी चाहिए। कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष बीना वाधवा का कहना है छावनी क्षेत्र और अधिकार में जो ऐतिहासिक स्थल आते हैं, उनकी देखभाल की जाएगी। मरम्मत का काम होगा। लोगों को उसके बारे में जागरूक किया जाएगा।   


स्मारक हो जाते हैं बीमार
देखभाल के अभाव में ऐतिहासिक स्मारक बीमार हो जाते हैं। ऐसा कैंट और शहरी क्षेत्र में मौजूद स्मारकों के साथ हो रहा है। कैंट में तो फिर भी स्थिति कुछ बेहतर है, शहर की हालत और भी खराब है। ऐतिहासिक मकबरे और स्मारकों के आसपास गंदगी और अतिक्रमण उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन गए हैं। प्रशासन और लोगों को इसके लिए जागरूक होने और उनकी अहमियत समझने की जरूरत है।

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