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कैंट बोर्ड की बैठक में गरमाया प्रवेश शुल्क वसूली का मामला, एक अप्रैल से बढ़ेगा दुकानों का किराया

Tue, 14 Jan 2020 01:31 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 14 Jan 2020 01:31 PM IST
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Cantt Board Meerut meeting, matter of recovery of admission fee heats up
cantt board meeting - फोटो : अमर उजाला
मेरठ कैंट में रुड़की रोड, मवाना रोड और दिल्ली रोड पर वाहन प्रवेश शुल्क वसूली का मामला आज कैंट बोर्ड बैठक में गरमाया हुुआ है। कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल भी बैठक में मौजूद हैं। बैठक में शामिल होने से पहले ही उन्होंने साफ कर दिया कि कि जनता के हितों से ज्यादा कुछ नहीं हो सकता है। कैंट बोर्ड की जिद के सामने शहर को बर्बाद नहीं किया जा सकता है। डीएम की तरफ से भी इस मामले में बड़ा कदम उठाया जा सकता है। 
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केंट बोर्ड बैठक में अभी तक डोर टू डोर कूड़ा, कैंट क्षेत्र में सर्किल रेट के अनुसार दुकानों का किराया 1 अप्रैल से बढ़ाए जाने पर मुहर लगी। वहीं 55 साल से ऊपर केंट बोर्ड कर्मचारियों का रिव्यू  कराने की बात कही गई। गांधी बाग के अंदर की रोड ठीक करने पर भी चर्चा हुई है। वहीं प्रवेश वाहन शुल्क चर्चा शुरू होते ही मीडिया को बाहर जाने के लिए कहा। कैंट बोर्ड सीईओ और सांसद ने भी मीडिया को बाहर जाने के लिए कहा।
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गौरतलब है कि कैंट क्षेत्र में आठ दिसंबर 2019 की आधी रात से 11 जगहों पर वाहन प्रवेश शुल्क की वसूली शुरू की गई थी। इनमें रुड़की रोड, मवाना रोड और दिल्ली रोड पर वसूली का तीखा विरोध शुरू हुआ था। डीएम से शिकायत की थी कि मवाना रोड और रुड़की रोड का रखरखाव एनएचएआई करता है।

दिल्ली रोड की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी के पास है। ऐसे में राज्य और केंद्र सरकार के रखरखाव वाली सड़कों पर कैंट बोर्ड वसूली कैसे कर सकता है। विरोध प्रदर्शन के बाद कैंट बोर्ड ने 12 दिसंबर 2019 को आपात बैठक में रुड़की रोड, मवाना रोड और दिल्ली रोड पर प्रवेश शुल्क लिए जाने पर तत्काल रोक लगाते हुए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। समिति को दो माह बाद बोर्ड बैठक में समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
 

इस मामले में ठेके दार की तरफ से सीईओ के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका डाली गई थी। कोर्ट ने एक महीने में कैंट बोर्ड को जवाब दाखिल करने को कहा था। जिसके बाद दोबारा से वसूली शुरू कर दी गई। ऐसे में आज हो रही यह बोर्ड बैठक काफी अहम मानी जा रही है।

डीएम के प्रतिनिधि के तौर जो अफसर यहां मौजूद है। वह साल 2008 का भी हवाला देंगे। उस वक्त तत्कालीन सीईओ ने रुड़की रोड और मवाना रोड पर प्रवेश शुल्क लेना शुरू किया तो लोगों के प्रदर्शन के बाद डीएम ने इसे बंद करा दिया था। तब भी ठेकेदार ने आदेशों का हवाला दिया था। 
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