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कैंट बोर्ड ने नहीं की पैरोकारी, विधायक बोले हम भी जाएंगे कोर्ट

Thu, 09 Jan 2020 01:57 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jan 2020 01:57 AM IST
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Cant board did not advocate, MLA said we will also go to court
कैंट बोर्ड ने नहीं की पैरोकारी, विधायक बोले हम भी जाएंगे कोर्ट
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मेरठ। कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल का कहना है कि कोर्ट के फैसले का सम्मान है। हम इस मामले में विधिक राय लेकर जनता की बात रखेंगे। कैंट बोर्ड ने इस मामले में पैरोकारी नहीं की। पीडब्ल्यूडी और रक्षा मंत्रालय के अफसरों से भी इसको लेकर बात की जाएगी। कैंट बोर्ड के अफसर तो शुरू से ही सिर्फ राजस्व बढ़ाने की बात करते रहे। वे तो चाहते ही नहीं थे कि इन जगहों पर प्रवेश शुल्क वसूली रोकी जाए। ऐसे में उनसे ठीक पैरवी की उम्मीद भी नहीं रख सकते हैं। जनता के मामले को उठाने के लिए हमें सुप्रीमकोर्ट भी जाना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे।
कैंट विधायक के अनुसार रुड़की रोड, मवाना रोड और दिल्ली रोड पर प्रवेश शुल्क वसूली शुरू होने के बाद व्यापारियों पर इसका बड़ा फर्क पड़ेगा। कैंट बोर्ड के अफसरों को बस राजस्व बढ़ाने से मतलब है। इनको शायद जनता की आवाज सुनाई नहीं देती। इस मामले में कैंट बोर्ड ने ठीक से न तो पैरोकारी की और न ही डीएम को इसके बारे में बताया। कैंट बोर्ड के अफसर तो चाहते भी यही थे। पूरे मामले में हम भी कोर्ट में जनता की बात रखेंगे। इसके साथ ही शासन और रक्षा मंत्रालय को पूरे प्रकरण से अवगत कराया जाएगा।
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बिना बोर्ड बैठक बुलाए ही शुरू कर दी गई वसूली
मेरठ। आमतौर पर कैंट बोर्ड हाईकोर्ट के इस तरह के आदेशों के मामले में आपात बैठक बुलाता है। लेकिन इस मामले में कैंट बोर्ड की तरफ से कोई बैठक नहीं बुलाई गई। ठेकेदार की तरफ से सीईओ को पत्र दिया गया। जिसमें लिखा गया कि आपके द्वारा 12 दिसंबर 2019 को दिल्ली, मवाना एवं रुड़की रोड पर प्रवेश शुल्क बंद करा दिया गया। आपके इस आदेश के खिलाफ ठेकेदार ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट याचिका संख्या 42817-2019 अनीता सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया अदर्स दायर की गई थी। जिसमें उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पारित आदेश दिनांक 20 दिसंबर 2019 के द्वारा आपके आदेश पत्र 12 दिसंबर 2019 को अग्रिम आदेश तक स्थगित करते हुए उसके प्रभाव एवं क्रियान्वयन को स्थगित कर दिया है। ऐसी स्थिति में आपके द्वारा दिया गया कार्य वर्क आर्डर 15 नवंबर 2019 प्रभावी हो गया है। ऐसे में प्रवेश शुल्क की वसूली 11 प्वाइंटों पर कार्यवाही की जानी है। बुधवार रात 10 बजे से हमारे द्वारा शुल्क वसूली प्रारंभ कर दी जाएगी।
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विधिक परीक्षण कराएंगे
अभी मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इसका विधिक परीक्षण कराने के बाद हम भी अपनी बात कोर्ट में रखेंगे। हमको नहीं सुना गया है। जनता को कोई परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।
-अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी
आम जनता पर पड़ेगा बोझ
एडवोकेट मनीष सिंह का कहना है कि वह रोजाना रुड़की रोड से निकलते हैं। यह एनएचएआई के रखरखाव वाली रोड है। ऐसे में वह हाईकोर्ट के पूरे निर्णय को पढ़ने के बाद आगे का कदम उठाएंगे। वह इस मामले में सुप्रीमकोर्ट जाएंगे। उनका कहना है कि कोर्ट के निर्णय का सम्मान है लेकिन कैंट बोर्ड यह बताए कि वह दूसरे की सड़क पर कैसे वसूली कर सकता है। इस वाहन प्रवेश शुल्क की वसूली का भार आखिरकार आम जनता की जेब पर पड़ेगा। जाम लगेगा वह अलग। उन्होंने कहा कि इस तरह से राजमार्ग पर वाहनों को बीच में कैसे रोक सकते हैं, इसको लेकर भी विधिक राय लेंगे।
ये हैं वाहन प्रवेश शुल्क की नई दरें
कैंट बोर्ड को राजस्व की बात करें तो अब तक व्हीकल एंट्री फीस से सालाना चार करोड़ 30 लाख से अधिक प्राप्त होते थे। पांच जगहों पर टोल बढ़ाने से ये बढ़कर 15 करोड़ 39 लाख, 38 हजार 750 रुपये हो गई। प्रवेश शुल्क की नई दरों की बात करें तो वह भी बढ़ा दी गई हैं।

थ्री व्हीलर, ऑटो रिक्शा - 10 रुपये
लाइट कॉमर्शियल चार पहिया वाहन - 50 रुपये
ट्रक-बस - 100 रुपये
क्रेन और अन्य भारी वाहन - 350 रुपये
2008 में विरोध के बाद हटाया गया था शुल्क
कैंट क्षेत्र में साल 2005 में प्रवेश शुल्क की शुरुआत हुई। यहां पर छह जगहों पर शुल्क लिया जाने लगा। साल 2008 में तत्कालीन सीईओ केसी गुप्ता ने रुड़की रोड और मवाना रोड पर प्रवेश शुल्क लेना शुरू किया तो उस वक्त प्रदेश में बसपा की सरकार थी। बसपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष योगेंद्र जाटव और कैंट प्रभारी सुनील वाधवा ने इसका विरोध किया। ट्रांसपोर्टर और लोगों ने धरना प्रदर्शन किया। जिसके बाद डीएम ने रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखा था। आठ दिन तक शुल्क लिए जाने के बाद नौवे दिन बैरियर हटा दिए गए थे। तब भी ठेकेदार ने कोर्ट के आदेश का हवाला दिया था।
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